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Rishikesh News: डीपीसी पर आर-पार, एम्स में नर्सिंग अधिकारियों के दो गुट आमने-सामने
Fri, 16 Oct 2026 06:41 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 16 Oct 2026 06:41 PM IST
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आरक्षण रोस्टर लागू नहीं करने का आरोप, पांच कर्मचारियों ने शुरू की भूख हड़ताल; पदोन्नत कर्मचारियों ने भी खोला मोर्चा
- आरक्षण रोस्टर के विरोध में चल रहे आंदोलन के सामने पदोन्नत नर्सिंग अधिकारियों ने दिया धरना
- डीपीसी निरस्त न करने की मांग
ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में सीनियर नर्सिंग अधिकारियों (एसएनओ) को असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट (एएनएस) पद पर पदोन्नति के लिए 10 अक्तूबर को आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रशासन की ओर से पूर्व चेतावनी के बावजूद डीपीसी निरस्त नहीं किए जाने के विरोध में एम्स एससी/एसटी कर्मचारी कल्याण संघ के पांच नर्सिंग अधिकारियों ने बृहस्पतिवार शाम पांच बजे से आमरण अनशन शुरू कर दिया। वहीं, पदोन्नति पाने वाले कर्मचारी भी डीपीसी निरस्त नहीं करने और अपनी पदोन्नति बरकरार रखने की मांग को लेकर धरने पर डटे हैं। दोनों पक्षों के आंदोलन से संस्थान में टकराव की स्थिति बन गई है और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होने लगी हैं।
भूख हड़ताल पर बैठने वालों में लोकेंद्र मीणा, मांगी लाल, दिनेश राठौर, युधिष्ठिर मीणा और दर्शन कुमार शामिल हैं। उनका कहना है कि डीपीसी और इसके तहत पदोन्नत कर्मचारियों की नियुक्तियां निरस्त होने तक आमरण अनशन जारी रहेगा।
एससी/एसटी कर्मचारी कल्याण संघ का आरोप है कि डीपीसी में आरक्षण रोस्टर लागू नहीं किया गया, जिसके कारण आरक्षित वर्ग के करीब 53 नर्सिंग अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह गए। संगठन ने डीपीसी में एससी/एसटी लाइजनिंग अधिकारी को शामिल नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। संघ से जुड़े 200 से अधिक नर्सिंग अधिकारी 11 अक्तूबर से निदेशक कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। उनकी मांग है कि विवादित डीपीसी निरस्त कर नई कमेटी गठित करते हुए दोबारा प्रक्रिया अपनाई जाए। संगठन के अनुसार, पदोन्नति में आरक्षण और रोस्टर से जुड़ा मामला विभिन्न संबंधित मंचों पर विचाराधीन है।
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दूसरी ओर, डीपीसी से पदोन्नति पाने वाले नर्सिंग अधिकारियों का कहना है कि उनकी पदोन्नति बरकरार रखी जाए और डीपीसी निरस्त न की जाए। दोनों पक्ष अपनी मांगों पर अड़े हैं। बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारियों के आंदोलन में शामिल होने से मरीजों की देखभाल और अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। फिलहाल एम्स प्रशासन की ओर से विवाद के समाधान के लिए कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
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कोट-
आंदोलित नर्सिंग अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। जल्द मामला सुलझा दिया जाएगा।
- डॉ. श्रीलॉय मोहंती, पीआरओ, एम्स।
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- आरक्षण रोस्टर के विरोध में चल रहे आंदोलन के सामने पदोन्नत नर्सिंग अधिकारियों ने दिया धरना
- डीपीसी निरस्त न करने की मांग
ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में सीनियर नर्सिंग अधिकारियों (एसएनओ) को असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट (एएनएस) पद पर पदोन्नति के लिए 10 अक्तूबर को आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रशासन की ओर से पूर्व चेतावनी के बावजूद डीपीसी निरस्त नहीं किए जाने के विरोध में एम्स एससी/एसटी कर्मचारी कल्याण संघ के पांच नर्सिंग अधिकारियों ने बृहस्पतिवार शाम पांच बजे से आमरण अनशन शुरू कर दिया। वहीं, पदोन्नति पाने वाले कर्मचारी भी डीपीसी निरस्त नहीं करने और अपनी पदोन्नति बरकरार रखने की मांग को लेकर धरने पर डटे हैं। दोनों पक्षों के आंदोलन से संस्थान में टकराव की स्थिति बन गई है और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होने लगी हैं।
भूख हड़ताल पर बैठने वालों में लोकेंद्र मीणा, मांगी लाल, दिनेश राठौर, युधिष्ठिर मीणा और दर्शन कुमार शामिल हैं। उनका कहना है कि डीपीसी और इसके तहत पदोन्नत कर्मचारियों की नियुक्तियां निरस्त होने तक आमरण अनशन जारी रहेगा।
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एससी/एसटी कर्मचारी कल्याण संघ का आरोप है कि डीपीसी में आरक्षण रोस्टर लागू नहीं किया गया, जिसके कारण आरक्षित वर्ग के करीब 53 नर्सिंग अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह गए। संगठन ने डीपीसी में एससी/एसटी लाइजनिंग अधिकारी को शामिल नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। संघ से जुड़े 200 से अधिक नर्सिंग अधिकारी 11 अक्तूबर से निदेशक कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। उनकी मांग है कि विवादित डीपीसी निरस्त कर नई कमेटी गठित करते हुए दोबारा प्रक्रिया अपनाई जाए। संगठन के अनुसार, पदोन्नति में आरक्षण और रोस्टर से जुड़ा मामला विभिन्न संबंधित मंचों पर विचाराधीन है।
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दूसरी ओर, डीपीसी से पदोन्नति पाने वाले नर्सिंग अधिकारियों का कहना है कि उनकी पदोन्नति बरकरार रखी जाए और डीपीसी निरस्त न की जाए। दोनों पक्ष अपनी मांगों पर अड़े हैं। बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारियों के आंदोलन में शामिल होने से मरीजों की देखभाल और अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। फिलहाल एम्स प्रशासन की ओर से विवाद के समाधान के लिए कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
कोट-
आंदोलित नर्सिंग अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। जल्द मामला सुलझा दिया जाएगा।
- डॉ. श्रीलॉय मोहंती, पीआरओ, एम्स।