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आपदा की भयावह तस्वीरें देख हार गया था हिम्मत

Fri, 20 May 2016 01:42 AM IST
आलोक पंवार /अमर उजाला, ऋषिकेश
आलोक पंवार /अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Fri, 20 May 2016 01:42 AM IST
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See pictures of the terrible disaster lost courage
टूर आपरेटर विठ्ठल शर्मा। - फोटो : अमर उजाला

दैवी आपदा के खौफ का असर अब कम होने लगा है। यही वजह है कि तीन साल से मंद पड़ी चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। आपदा से खौफजदा लोगों में से ऐसे ही एक है हैदराबाद के टूर आपरेटर विठ्ठल शर्मा। आपदा की तस्वीरों ने उनको इतना डरा दिया कि उन्होंने दो साल तक उत्तराखंड की एक भी बुकिंग नहीं ली। बृहस्पतिवार को 90 श्रद्धालुओं का एक जत्था लेकर पहुुंचे शर्मा ने अमर उजाला संवाददाता से अपनी डर की दास्तां साझा की।

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उन्होंने बताया कि वह खुशनसीब रहे कि केदारघाटी में जलप्रलय से एक दिन पहले 16 जून 2013 को साथ लेकर आए करीब 80 श्रद्घालुओं को बाबा केदारनाथ के दर्शन कराने के बाद लौट आए थे। रास्ते में सूचना मिली कि केदारघाटी में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से शंकराचार्य समाधि स्मृति भवन पानी के सैलाब में बह गया और पानी में कई वाहन लापता हो गए। 17 जून की सुबह केदारनाथ में भारी तबाही की सूचना मिली। घर पहुंचे तो टीवी चैनलों पर केदारघाटी में भयंकर तबाही की खबरों ने उनको और डरा दिया।
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यही वजह है कि खौफ के चलते दो साल तक उत्तराखंड का रुख नहीं किया। वर्ष 2016 में चारधाम यात्रा के लिए श्रद्घालु ऑफिस में बुकिंग कराने आए। श्रद्घालुओं में देवधामों के प्रति आस्था और भक्ति देख किसी तरह हिम्मत जुटाई और चारधाम के लिए दो वाहनों की बुकिंग ले ली। तीर्थनगरी पहुंचने के बाद काफी सुकून मिला है। चारधामों के दर्शन का मौका फिर से देने के लिए ईश्वर के आभारी हैं।
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अमरनाथ, कैलास मानसरोवर की बुकिंग की
एसवीएम ट्रेवल्स संचालक विठ्ठल शर्मा ने बताया कि दैवी आपदा के खौफ का असर इस कदर जेहन में छाया रहा कि वर्ष 2014-15 में उत्तराखंड चारधाम यात्रा की बुकिंग नहीं की। इक्का दुक्का यात्री आए भी, लेकिन उन्हें मना कर दिया। दो साल श्रद्घालुओं को अमरनाथ, कैलास मानसरोवर, अयोध्या, मुक्तिनाथ धाम की यात्रा कराई। अब आपदा का खौफ नहीं है।


वर्ष 2013 में चारधाम यात्रा का प्लान बनाया था, लेकिन दैवी आपदा के चलते यात्रा बीच में रुक गई। तबाही की खबरों से मन में डर बैठ गया था। फिर मन को समझाया चारधाम यात्रा प्राचीनकाल से चल रही है। यह किसी प्राकृतिक आपदा के डर से बंद नहीं हो सकती है। ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास ही हमे यात्रा पर खींच लाया है।
रामाराव, श्रद्घालु हैदराबाद

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