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Rishikesh News: गन्ना समर्थन मूल्य यथावत रखने से किसानों में आक्रोश
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राज्य में गन्ना समर्थन मूल्य यथावत रखने पर किसानों ने नाराजगी का इजहार किया है। कहा कि गन्ने में लागत अधिक आ रही है।
महंगाई होने से हर साल लागत बढ़ती जा रही है। सरकार ने अगेती प्रजाति का मूल्य 375 और सामान्य प्रजाति का गन्ना मूल्य 365 प्रति क्विंटल रखा है। गन्ना समर्थन मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया। डोईवाला क्षेत्र में दस हजार से अधिक छोटे-बड़े किसान गन्ने की खेती करते हैं। नकदी फसल होने के कारण गन्ने की बुवाई में अधिक रूचि रहती है।-- -
- सरकार गन्ना किसानों की उपेक्षा कर रही है। इस साल गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया गया है। जिससे साफ हो रहा है कि गन्ना किसानों के लिए सरकार उदासीन बनी हुई है। किसानों की समस्याओं को समझा नहीं जा रहा है। नतीजा किसान हतोत्साहित हो रहा है। - मनोज नौटियाल, जौलीग्रांट
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- किसान मांग रहे हैं 500 प्रति क्विंटल और सरकार इस पर ध्यान न देकर गन्ने का समर्थन मूल्य यथावत रख रही है, जो उचित नहीं है। समझ में नहीं आ रहा है कि गन्ने को लेकर राज्य सरकार के पास ठोस नीति नहीं है। यहीं कारण है कि गन्ने का रकबा हर साल घट रहा है। -गुरदीप सिंह, शेरगढ़
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सरकार का दावा किसानों की आय दोगुनी करने का है। यह महज खोखला दावा साबित हो रहा है। किसानों का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। कैसे आय दोगुनी हो सकेगी। गन्ना किसानों के साथ सरकार ने धोखा किया है। - उमेद वोरा, सिमलास ग्रांट
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सरकार द्वारा गन्ने का समर्थन मूल्य यथावत रखना किसानों के हितों पर कुठाराघात है। गन्ने की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। श्रम, बीज, सुरक्षा, सिंचाई, खाद आदि सब कुछ महंगा होता जा रहा है। हर साल लागत बढ़ रही है। गन्ना मूल्य यथावत रखना सरकार का किसान विरोधी निर्णय कहा जा सकता है। -कमल अरोड़ा, डोईवाला
महंगाई होने से हर साल लागत बढ़ती जा रही है। सरकार ने अगेती प्रजाति का मूल्य 375 और सामान्य प्रजाति का गन्ना मूल्य 365 प्रति क्विंटल रखा है। गन्ना समर्थन मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया। डोईवाला क्षेत्र में दस हजार से अधिक छोटे-बड़े किसान गन्ने की खेती करते हैं। नकदी फसल होने के कारण गन्ने की बुवाई में अधिक रूचि रहती है।
- सरकार गन्ना किसानों की उपेक्षा कर रही है। इस साल गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया गया है। जिससे साफ हो रहा है कि गन्ना किसानों के लिए सरकार उदासीन बनी हुई है। किसानों की समस्याओं को समझा नहीं जा रहा है। नतीजा किसान हतोत्साहित हो रहा है। - मनोज नौटियाल, जौलीग्रांट
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- किसान मांग रहे हैं 500 प्रति क्विंटल और सरकार इस पर ध्यान न देकर गन्ने का समर्थन मूल्य यथावत रख रही है, जो उचित नहीं है। समझ में नहीं आ रहा है कि गन्ने को लेकर राज्य सरकार के पास ठोस नीति नहीं है। यहीं कारण है कि गन्ने का रकबा हर साल घट रहा है। -गुरदीप सिंह, शेरगढ़
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सरकार का दावा किसानों की आय दोगुनी करने का है। यह महज खोखला दावा साबित हो रहा है। किसानों का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। कैसे आय दोगुनी हो सकेगी। गन्ना किसानों के साथ सरकार ने धोखा किया है। - उमेद वोरा, सिमलास ग्रांट
सरकार द्वारा गन्ने का समर्थन मूल्य यथावत रखना किसानों के हितों पर कुठाराघात है। गन्ने की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। श्रम, बीज, सुरक्षा, सिंचाई, खाद आदि सब कुछ महंगा होता जा रहा है। हर साल लागत बढ़ रही है। गन्ना मूल्य यथावत रखना सरकार का किसान विरोधी निर्णय कहा जा सकता है। -कमल अरोड़ा, डोईवाला