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पांच सौ में से एक बच्चा जन्म से विकलांग

Sun, 04 Dec 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला/ऋषिकेश।
ब्यूरो /अमर उजाला/ऋषिकेश। Updated Sun, 04 Dec 2016 12:48 AM IST
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One of five hundred children are born with disabilities
विश्व विकलांग दिवस पर एम्स में व्याख्यान देते वक्ता। - फोटो : amar ujala

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में विश्व विकलांगता दिवस पर वक्ताओं ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार विश्व में पांच सौ में से एक बच्चा विकलांगता के साथ पैदा होता है। एम्स में क्लबफुट (पैर टेढे़) विकलांगता विषय पर शनिवार को कार्यशाला आयोजित की गई थी।

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इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि प्रारंभिक अवस्था में क्लबफुट की पहचान होने पर इसका उपचार संभव है। पहले इस रोग का इलाज बेहद महंगा था, लेकिन आधुनिकता के दौर में बिना ऑपरेशन के बहुत कम खर्च में क्लबफुट का इलाज किया जा सकता है।
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कार्यशाला का शुभारंभ एम्स के निदेशक डा. संजीव मिश्रा ने किया। वक्ताओं ने बताया कि क्लबफुुट बच्चों में विकलांगता का मुख्य कारण है। इसमें नवजात शिशु के पैर टेढे़ रहते हैं। मां के पेट में पल रहे शिशु के क्लबफुट विकलांगता से अनजान लोग उक्त बीमारी के बारे में नहीं समझ पाते हैं, इसीलिए इसकी रोकथाम असंभव है।
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भारत में हर दसवें मिनट में एक बच्चा क्लबफुट के साथ पैदा होता है। हर साल 50 हजार से ज्यादा बच्चे इस रोग से ग्रसित होते हैं। बताया कि पहले इस रोग का इलाज बेहद मंहगा था, लेकिन बिना ऑपरेशन के बहुत कम खर्च में  इलाज है। जिसमें पोनसेटी मैथड की सहयता से प्लास्टरनुमा जूते पहने जाते हैं।


इस विधि से क्लबफुट विकलांगता को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि टेनिस खिलाड़ी मार्टिना नोवरातिलोवा भी क्लबफुुट के साथ पैदा हुई थीं। कार्यशाला में डा. पैनी नोरग्रोव, माइकल स्टीनबेक, डा. मैथ्यू वर्गीज, विकास गुप्ता, डा. सुकल्यान, डा. बी पशुपति  ने विचार व्यक्त किए।

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