झूला पुलों पर पसरा है अंधेरा
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अर्द्धकुंभ मेला प्रशासन कुंभ मेले में गंगा स्नान और तीर्थ दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा देने के नाम पर सिर्फ दावेभर कर रहा है। धरातल पर अव्यवस्थाएं इसकी तस्दीक करती हैं। तीर्थनगरी में विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मण झूला और शिवानंद (राम) झूला पुल पर सप्ताहभर से यात्री रात के समय घुप अंधेरे में यात्रा करने को विवश हैं, मगर इस ओर मेला प्रशासन लापरवाह बना बैठा है, जबकि मेले के लिए झूला पुलों पर लाखों रुपये खर्च कर अस्थायी लाइटिंग की व्यवस्था की हुई है, मगर उसका लाभ सैलानियों को नहीं मिल पा रहा है।
ढाई महीने से चल रहे अर्द्धकुंभ मेले की व्यवस्थाएं अभी भी पटरी पर नहीं आ पाई हैं, जबकि मेला प्रशासन सुविधाओं की बहाली की बजाय मेले को जैसे तैसे निबटाने की जुगतभर कर रहा है। व्यवस्थाओं के नाम पर करोड़ों खर्च किए जाने के दावे किए जा रहे हैं।
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण और आवागमन की सुविधा के लिए लाखों की लागत में दोनों झूला पुलों को चाइनीज लाइटें लगाकर चकाचौंध किया गया है, लेकिन देखरेख के अभाव और प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही लापरवाही के चलते यह व्यवस्था ठीक नहीं चल रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुंभ मेले के शुरुआती दौर में दोनों झूला पुल रात के समय लाइटों से जगमगाते थे।
यह विहंगम दृश्य तीर्थयात्रियों को दूर से ही आकर्षित करता था, मगर सप्ताहभर से झूला पुलों पर लाइटें बंद पड़ी हैं। इससे क्षेत्र में तीर्र्थांटन और पर्यटन के उद्देश्य से आ रहे सैलानियों को रात के समय आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस बाबत मेला प्रशासन से शिकायत भी की गई, मगर संज्ञान लेने वाला कोई नहीं।
इनकी सुनिए
मामला संज्ञान में नहीं है, यदि झूलों पुलों पर अंधेरा है तो तीर्थयात्रियों की परेशानी के दृष्टिगत लाइटिंग ठेकेदार को निर्देश देकर जल्द से जल्द विद्युतीकरण व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी -अवधेश कुमार, अपर मेलाधिकारी अर्द्धकुुंभ मेला-2016 हरिद्वार ।
आध्यात्मिक मणिकूट परिक्रमा यात्रा आज
मणिकूट परिक्रमा समिति के तत्वावधान में शनिवार को मणिकूट पर्वत परिक्रमा यात्रा आयोजित की जाएगी। इसके तहत धार्मिक यात्रा के तहत मार्ग में पड़ने वाले 12 द्वारों का पूजन किया जाएगा। यात्रा में करीब एक हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मणिकूट पर्वत परिक्रमा यात्रा के बारे में यात्रा के संयोजक और दर्जाधारी राज्यमंत्री रमेश उनियाल ने बताया कि वर्तमान में गृहस्थजन सांसारिक सुख-शांति, समृद्धि और साधु-संत परमात्मा की प्राप्ति के लिए परिक्रमा में शामिल होते हैं।
उन्होंने बताया कि इसके तहत प्रथम द्वार पांडव गुफा से यात्रा प्रारंभ होगी। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में उल्लिखित है कि यह स्थान स्वर्गारोहणी के समय पांडवों की तपस्थली रही है। त्रेतायुग में लक्ष्मण और हनुमान ने भी यहां तपस्या की। उन्होंने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार अनेक तपस्वियों के तपस्थल होने के कारण पांडव गुफा नामक स्थान पर मां गंगा शांत भाव से बहती दिखाई पड़ती है।
रमेश उनियाल ने बताया कि यात्रा के दौरान पांडव गुफा, गरुड़चट्टी, फूलचट्टी, काली कुंड, पीपलकोटी, दिउली हिंडोला, कुशाशिल, विध्यवासिनी, गौहरी बैराज, गणेश चौड़, भैरवघाटी नामक 12 द्वारों की पूजा की जाएगी।