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हेंवल के किनारे संचालित हो रहे अवैध कैंप
ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश
Updated Fri, 18 Mar 2016 02:01 AM IST
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कैंप
- फोटो : amar ujala
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पौड़ी जिले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियम कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। पौड़ी प्रशासन की मिलीभगत के चलते बैरागढ़ से घट्टूगाड़ तक गंगा की सहायक नदी हेंवल के तटों पर खुलेआम अवैध तरीके से राफ्टिंग बीच कैंप संचालित हो रहे हैं। हैरत की बात है कि मामला प्रशासन की संज्ञान में होनेे के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशानुसार गंगा से सौ मीटर की दूरी पर कैंप संचालित करने पर रोक है।
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गंगा को स्वच्छ एवं निर्मल बनाए रखने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गंगा नदी से सौ मीटर की दूरी पर संचालित हो रहे कैंपों पर रोक लगा रखी है। इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने गंगा की सहायक नदियों पर भी कैंप संचालित करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। बावजूद इसके, पौड़ी जिले के बैरागढ़, मोहनचट्टी और घट्टूगाड़ क्षेत्र में खुलेआम हेंवल नदी के तटों पर कैंप संचालित हो रहे हैं।
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इन कैंपों से निकलने वाला मैला हेंवल नदी के जरिए सीधे गंगा में गिर रहा है। पौड़ी प्रशासन इन पर कार्रवाई करने के बजाय एनजीटी के आदेश की अनदेखी की रहा है।
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टिहरी प्रशासन हटा चुका शिवपुरी में लगे कैंप
शिवपुरी क्षेत्र में गंगा की सहायक हेंवल नदी के किनारे राजस्व भूमि पर संचालित हो रहे कैंपों पर नरेंद्रनगर के उपजिलाधिकारी केके मिश्रा कुछ दिन पहले कार्रवाई कर चुके हैं, लेकिन पौड़ी प्रशासन को हेंवल के किनारे संचालित हो रहे कैंपों को हटाने के लिए एनजीटी के आदेश का इंतजार है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशानुसार गंगा से सौ मीटर की दूरी पर कैंप संचालित करने पर रोक है।
गंगा की सहायक नदी पर कैंप संचालित पर रोक का मामला संज्ञान में नहीं है। यदि एनजीटी ने सहायक नदी के किनारे भी कैंप संचालन पर रोक लगाई है तो इस दिशा में उचित कार्रवाई की जाएगी।-गोपालराम बिनवाल, उपजिलाधिकारी कोटद्वार।
पौड़ी प्रशासन तक नहीं पहुंचे एनजीटी के आदेश
मोक्षदायिनी की अक्षुण्णता के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का रवैया सख्त है। एनजीटी कुछ समय पहले राज्य सरकार के जरिए जिला प्रशासन को गंगा के किनारे संचालित किए जा रहे राफ्टिंग बीच कैंपों को हटाने के निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन ट्रिब्यूनल के आदेश के पालन को लेकर पौड़ी जिला प्रशासन गंभीर नहीं है। शिवपुरी के ठीक दूसरी ओर गंगा के किनारे बेरोकटोक संचालित बीच कैंपों से तो यही लगता है।
कुछ लोगों के लिए गंगा मोक्षदायिनी नहीं, बल्कि कमाई का जरिया बन चुकी है। ऐसे में गंगा की निर्मलता, अविरलता बरकरार रखने के लिए किए जा रहे तमाम सरकारी प्रयास तीर्थनगरी में शब्दश: लागू नहीं हो पाते। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा गंगा के किनारे संचालित हो रहे बीच कैंपों के मामले में भी यही हो रहा है।
एनजीटी ने नदी के किनारे संचालित हो रहे कैंपों को गंगा को मैला करने का कारक माना है, लिहाजा बाकायदा इन्हें हटाने के आदेश पारित किए हैं, लेकिन पौड़ी जिले के अंतर्गत शिवपुरी के आसपास के क्षेत्र में संचालित बीच कैंप अभी भी यथावत हैं। गंगा की स्वच्छता सहायक नदियों के स्वच्छ रहने पर भी टिकी है, मगर इस जिले में सहायक नदी हेंवल की स्थिति भी यही है।
इससे कैंपों से निकलने वाला कूड़ा कचरा आखिरकार गंगा तक पहुंच रहा है। एनजीटी के आदेश के लिहाज से इस मामले में जिला प्रशासन के स्तर से कार्रवाई तो दूर संचालित किए जा रहे कैंपों की मानिटरिंग तक नहीं की जा रही है।
क्या कहते हैं डीएम
गंगा के किनारे संचालित किए जा रहे कैंपों को हटाने के लिए तहसील प्रशासन को निर्देश जारी किए गए थे। क्या वहां पर अभी भी कैंप चलाए जा रहे हैं। अगर ऐसा है तो यह गंभीर मामला है। संबंधित अधिकारियों से इसकी रिपोर्ट तलब की जाएगी और ऐसे तमाम कैंपों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी।-चंद्रशेखर भट्ट, जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल।