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पाप का अंत करने को भगवान लेते हैं अवतार
ब्यूरो /अमर उजाला/ऋषिकेश।
Updated Thu, 09 Feb 2017 12:21 AM IST
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आचार्य रमेशचंद्र शास्त्री
- फोटो : amar ujala
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हरिद्वार रोड पर श्री शिवशंकर तीर्थ यात्रा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक आचार्य रमेश चंद्र शास्त्री ने कंस वध और रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया।
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रमेश चंद्र शास्त्री ने कहा कि जब धरती पर पाप बढ़ने लगता है, उसका अंत करने के लिए भगवान इस धरा पर किसी ने किसी रूप में अवतरित होते हैं।
मथुरा नरेश कंस के अत्याचारों से मथुरा और गोकुलवासियों को मुक्त कराने के लिए भगवान विष्णु ने इस धरा पर माता देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया। उन्होंने कंस का वध कर कारावास में बंदी बने अपने माता-पिता वासुदेव और देवकी को बंधन मुक्त किया।
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इस मौके पर कुलदीप धारिया, भगवान दास अग्रवाल, लक्ष्मी देवी, देवव्रत, काजल, पुष्पेंद्र, कविता, लक्ष्मी नारायण, संजय, रविंद्र, मनीष अग्रवाल, दीपक थापा, कल्याण सिंह नेगी, मीनू थापा आदि उपस्थित रहे।
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