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Rishikesh News: दफ्तर के सामने कूड़े का अंबार, तपोवन में वन विभाग की निगरानी पर सवाल
Thu, 13 Aug 2026 07:09 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Thu, 13 Aug 2026 07:09 PM IST
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- सीएम पोर्टल और हेल्पलाइन पर दर्जनों शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस
- तपोवन तिराहा से खरास्रोत, ब्रह्मानंद मोड़ और भद्रकाली मार्ग किनारे कई टन कचरा
- खुले में डंपिंग से पर्यावरण और वन्यजीवों पर मंडरा रहा खतरा
- तपोवन के प्रवेश द्वार पर स्वच्छता के दावों की खुली पोल, वन भूमि में सड़ रहा कई टन कचरा
ढालावाला। तपोवन तिराहा से खरास्रोत, ब्रह्मानंद मोड़ और भद्रकाली मार्ग के किनारे वन भूमि में कई टन कचरा खुले में पड़ा है और हैरानी की बात यह है कि अनधिकृत डंपिंग स्थल के पास ही डीएफओ और रेंजर कार्यालय स्थित हैं। घरेलू कचरे, होटलों के खाद्य अवशेष, प्लास्टिक, पॉलिथीन और शराब की बोतलों के ढेर के बीच स्थानीय लोगों व पर्यटकों को आवाजाही करनी पड़ रही है। पिछले छह महीनों में सीएम हेल्पलाइन और सीएम पोर्टल पर दर्जनों शिकायतों के बावजूद कचरे के ढेर नहीं हटाए गए। कचरे में भोजन की तलाश में वन्यजीवों के पहुंचने से उनके स्वास्थ्य और वन क्षेत्र के पर्यावरण पर भी खतरा बढ़ रहा है।
विश्व प्रसिद्ध तपोस्थली तपोवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही स्वच्छता व्यवस्था के दावे सवालों के घेरे में हैं। कचरे से उठती दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आसपास के होटल और रेहड़ी-ठेली संचालक रात में वन भूमि में कचरा फेंकते हैं। सड़क के दूसरी ओर आवासीय क्षेत्र होने के कारण कुछ लोग भी वन भूमि को डंपिंग साइट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सीएम हेल्पलाइन और पोर्टल पर शिकायत के बाद मोबाइल पर समस्या के निस्तारण का संदेश जरूर आ जाता है, लेकिन मौके पर स्थिति जस की तस रहती है। लोगों का आरोप है कि वन भूमि में गंदगी और अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ वन विभाग की ओर से प्रभावी कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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वन क्षेत्राधिकारी महेश सेमवाल से मामले में फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से साफ इन्कार कर दिया।
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बोर्डों पर संदेश, जमीन पर कचरा
वहीं, वन विभाग जगह-जगह वन बचाओ, कचरा न फेंको जैसे बोर्ड लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है और स्कूली बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रहा है। इसके बावजूद डीएफओ और रेंजर कार्यालय के पास ही वन भूमि का कूड़ाघर में तब्दील होना विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है।
- नगर पंचायत की ओर से पर्यावरण मित्रों को भेजकर इस क्षेत्र की कई बार सफाई कराई जा चुकी है।लेकिन इसके बावजूद लोग बार बार यहां कचरा फेंक रहे हैं। ये पूरी जमीन वन विभाग की है। हम बार-बार वन विभाग को पत्र लिखकर अनुरोध कर चुके हैं कि यहां बोर्ड लगाए, कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई करें या फेंसिंग लगाई जाए। वन विभाग की तरफ से आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंजलि रावत, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत तपोवन।
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- तपोवन तिराहा से खरास्रोत, ब्रह्मानंद मोड़ और भद्रकाली मार्ग किनारे कई टन कचरा
- खुले में डंपिंग से पर्यावरण और वन्यजीवों पर मंडरा रहा खतरा
- तपोवन के प्रवेश द्वार पर स्वच्छता के दावों की खुली पोल, वन भूमि में सड़ रहा कई टन कचरा
ढालावाला। तपोवन तिराहा से खरास्रोत, ब्रह्मानंद मोड़ और भद्रकाली मार्ग के किनारे वन भूमि में कई टन कचरा खुले में पड़ा है और हैरानी की बात यह है कि अनधिकृत डंपिंग स्थल के पास ही डीएफओ और रेंजर कार्यालय स्थित हैं। घरेलू कचरे, होटलों के खाद्य अवशेष, प्लास्टिक, पॉलिथीन और शराब की बोतलों के ढेर के बीच स्थानीय लोगों व पर्यटकों को आवाजाही करनी पड़ रही है। पिछले छह महीनों में सीएम हेल्पलाइन और सीएम पोर्टल पर दर्जनों शिकायतों के बावजूद कचरे के ढेर नहीं हटाए गए। कचरे में भोजन की तलाश में वन्यजीवों के पहुंचने से उनके स्वास्थ्य और वन क्षेत्र के पर्यावरण पर भी खतरा बढ़ रहा है।
विश्व प्रसिद्ध तपोस्थली तपोवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही स्वच्छता व्यवस्था के दावे सवालों के घेरे में हैं। कचरे से उठती दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आसपास के होटल और रेहड़ी-ठेली संचालक रात में वन भूमि में कचरा फेंकते हैं। सड़क के दूसरी ओर आवासीय क्षेत्र होने के कारण कुछ लोग भी वन भूमि को डंपिंग साइट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, सीएम हेल्पलाइन और पोर्टल पर शिकायत के बाद मोबाइल पर समस्या के निस्तारण का संदेश जरूर आ जाता है, लेकिन मौके पर स्थिति जस की तस रहती है। लोगों का आरोप है कि वन भूमि में गंदगी और अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ वन विभाग की ओर से प्रभावी कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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वन क्षेत्राधिकारी महेश सेमवाल से मामले में फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से साफ इन्कार कर दिया।
बोर्डों पर संदेश, जमीन पर कचरा
वहीं, वन विभाग जगह-जगह वन बचाओ, कचरा न फेंको जैसे बोर्ड लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है और स्कूली बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रहा है। इसके बावजूद डीएफओ और रेंजर कार्यालय के पास ही वन भूमि का कूड़ाघर में तब्दील होना विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है।
- नगर पंचायत की ओर से पर्यावरण मित्रों को भेजकर इस क्षेत्र की कई बार सफाई कराई जा चुकी है।लेकिन इसके बावजूद लोग बार बार यहां कचरा फेंक रहे हैं। ये पूरी जमीन वन विभाग की है। हम बार-बार वन विभाग को पत्र लिखकर अनुरोध कर चुके हैं कि यहां बोर्ड लगाए, कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई करें या फेंसिंग लगाई जाए। वन विभाग की तरफ से आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंजलि रावत, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत तपोवन।