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Rishikesh News: हेड कांस्टेबल की संदिग्ध परिस्थितियों में माैत
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देहरादून एयरपोर्ट स्थित राज्य अतिथि गृह में तैनात हेड कॉंस्टेबल सुनील कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में अपनी की कार्बाइन से चली गोलियों से माैत हो गई। घटना सोमवार की रात सवा नौ बजे के करीब रानीपोखरी क्षेत्र के नागाघेर स्थित उनके आवास पर हुई। परिजनों की सूचना पर पहुंची फाॅरेंसिक टीम और पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। थानाध्यक्ष राजेंद्र खोलिया ने बताया कि हेड कॉस्टेबल को तीन गोलियां लगी हैं जबकि सात गोलियां आसपास की दीवारों पर लगी हैं। उन्होंने बताया कि घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगा।हेड कॉंस्टेबल सुनील कुमार ने नागाघेर में अपनी पुश्तैनी जमीन पर घर बनाया है और करीब एक महीने पहले ही वो अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ यहां शिफ्ट हुए थे। मृतक के परिवार में उनका बड़ा भाई भी पुलिस से रिटायर्ड है। वहीं भतीजा भी पुलिस में तैनात है। भतीजे का भी पास में ही मकान बन रहा है। सोमवार रात करीब सवा नौ बजे रानीपोखरी क्षेत्र के नागाघेर स्थित आवास में अचानक गोलियां की तड़तड़ाहट हुई। उस दाैरान हेड कॉंस्टेबल सुनील कुमार घर के बरामदे में मौजूद थे। गोली चलने की आवाज सुनकर परिजन उनके पास पहुंचे तो वो खून से लथपथ मिले। उन्हें उपचार के लिए हिमालयन अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक रात करीब दस बजे जौलीग्रांट पुलिस चौकी के माध्यम से रानीपोखरी थाना पुलिस को घटना की सूचना मिली। मृतक के बेटे ने पुलिस को बताया कि उनके पिता को घर पर कार्बाइन से गोली लगी है। वे पुलिस लाइन देहरादून में नियुक्त थे और वर्तमान में दून एयरपोर्ट के राज्य अतिथि गृह में तैनात थे। पुलिस ने पंचनामा भरने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।पुलिस को मौके से दस खोखे मिले : पुलिस को मौके से कार्बाइन के अलावा दस खोखे बरामद हुए हैं। बताया जा रहा है कि तीन गोलियां सुनील को लगी हैं जबकि सात के आसपास निशान मिले हैं। कार्बाइन में कुल तीस गोलियां रहती हैं जिसमें से दस फायर हुईं हैं। खास बात यह है कि कार्बाइन से जिस तरह से गोलियां चली हैं। उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि कोई आसपास होता तो उसे भी नुकसान पहुंच सकता था। क्योंकि गोलियां छत, दीवार और लोहे व कांच की खिड़की पर भी लगी हैं। इससे खिड़की के कांच टूटे हैं। खिड़की के लोहे पर भी छेद हुए हैं जबकि छत और दीवार पर निशान साफ देखे जा सकते हैं।