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कंक्रीट का जंगल उगाया, हरियाली भूले
ब्यूरो, अमर उजाला/ऋषिकेश
Updated Sat, 27 Feb 2016 01:29 AM IST
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तीर्थनगरी में करीब 12 करोड़ की लागत से बने संयुक्त यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड में हरियाली के जंगल को नेस्तनाबूद कर कंक्रीट का जंगल स्थापित किया गया। लेकिन इसकी एवज में प्रोजेक्ट से पेड़-पौधे लगाने के प्रावधान को कार्यदायी और निर्माण एजेंसियों ने भुला दिया।
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लिहाजा बीटीसी परिसर में आने वाले तीर्थयात्री और पर्यटक अन्य सुविधाओं के साथ ही शुद्ध आबोहवा से भी वंचित हो गए। इसके लिए भूमि उपलब्ध कराने वाला वन विभाग भी उदासीन बना बैठा है। निर्माण एजेंसी का तर्क है कि प्रोजेक्ट को पूरी तरह धरातल पर उतारने में उन्हें कार्यदायी एजेंसी और नगर पालिका का सहयोग नहीं मिला।
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तीर्थनगरी में हरिद्वार, ऋषिकेश, मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम मेगा पर्यटन सर्किट योजना के अंतर्गत करीब 12 करोड़ की लागत से बस ट्रांजिट कंपाउंड का निर्माण किया गया। इसके लिए निर्माण एजेंसी यूपी निर्माण निगम ने कैंपस में करीब तीन दर्जन से अधिक पेड़ों पर आरियां चलाई थी।
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प्रोजेक्ट के लिए निर्माण एजेंसी द्वारा तैयार मानचित्र के मुताबिक वन विभाग की 4.48 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित बस ट्रांजिट कंपाउंड में कार्यालयी भवन, यात्री प्रतीक्षालय, कियोस्क, शौचालय, बस पार्किंग का निर्माण किया जाना था। योजना में शामिल भवनों के इर्दगिर्द पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए पेड़ पौधों की वाटिकाएं भी बनाई जानी थीं।
लेकिन निर्माण एजेंसी कैंपस में कंक्रीट के जंगल बनाकर नदारद हो गई। बीटीसी परिसर में हरियाली प्रोजेक्ट को निर्माण एजेंसी ने तो दरकिनार किया ही, कार्यदायी संस्था पर्यटन विभाग, भूमि उपलब्ध कराने वाले वन विभाग और प्रोजेक्ट हस्तांतरित होने के बाद नगर पालिका ऋषिकेश प्रशासन ने भी इस पर गौर करना उचित नहीं समझा।
खोखों ने ड्रीम प्रोजेक्ट पर लगाया ग्रहण
बीटीसी में खोखे लगाने वालों ने करोड़ों के ड्रीम प्रोजेक्ट का मानचित्र ही नहीं पूरा भूगोल ही बदल डाला। ऐसे ही लोगों की वजह से निर्माण एजेंसी अंतरराज्यीय बस अड्डे पर हरियाली प्रोजेक्ट को धरातल पर नहीं उतार पाई। योजना के मुताबिक कैंपस में जहां पार्किंग के लिए स्थान निर्धारित किया गया था, वहां खोखों का साम्राज्य है।
लिहाजा बसों को बीटीसी प्रवेश और निकास मार्गों के आसपास पार्क किया जाता है। इतना ही नहीं मनमानी का आलम यह है कि बस अड्डे पर संचालित होने वाली वर्कशॉप भी सड़कों पर चलाई जा रही हैं। इसी तरह जो स्थान पौधे और वाटिकाएं लगाकर हरियाली के लिए निर्धारित थे, वहां या तो खोखे लगा दिए गए या फिर पार्किंग से वंचित वाहन खड़े किए जा रहे हैं।
बीटीसी को भूमि हस्तांतरण मेरे कार्यकाल से पहले हो गया था। लिहाजा प्रोजेक्ट में हरियाली का प्रावधान संज्ञान में नहीं है। इस बारे में निर्माण एजेंसी से बात की जाएगी। यदि ऐसा हुआ तो वाटिकाएं बनवाकर पौधे लगाने को कहा जाएगा।-गंगासागर नौटियाल, रेंज अधिकारी, ऋषिकेश वन रेंज
बस ट्रांजिट कंपाउंड प्रोजेक्ट में हरियाली प्रोजेक्ट भी शामिल था। कुछ स्थानों पर पौधे लगाए भी गए थे। लेकिन कैंपस में लगे सैकड़ों खोखों के कारण समग्र योजना को धरातल पर नहीं उतार पाए। प्रोजेक्ट में ही काफी वक्त लग गया। जो पौधे लगाए भी गए थे, वह भी इस अव्यवस्था से खराब हो गए।-अतुल मलासी, इंजीनियर यूपी निर्माण निगम, बीटीसी प्रोजेक्ट के रेजिडेंट इंजीनियर