पर्यावरण संरक्षण ही है प्रकाश का जीवन
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उत्तरकाशी की टुंडा तहसील के गांव भेंत निवासी मोटर मैकेनिक प्रकाश पोखरियाल के जीवन का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है। किशोरावस्था से अब तक वे पंद्रह लाख पौधे रोप चुके है। इस नेक काम में उनके सामने आर्थिक समस्या आई, तो उन्होंने अपनी चार मैक्स पिकअप गाड़ी और दो नाली खेत भी बेच दिए। उनके इस समर्पण को देखते हुए परमार्थ निकेतन गंगातट पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने सम्मानित किया। इस मौके पर पर्यावरण प्रेमी प्रकाश ने अमर उजाला से अपने विचार साझा किये।
65 साल के प्रकाश पोखरियाल ने बताया कि वे तेरह साल की उम्र से पौधे रोप रहे है। बताया कि उत्तरकाशी के विभिन्न क्षेत्रों में वे 15 लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं। जिनमें बुरांस, कनेर, बांस, जामुन, अखरोट, आम, अनार, नाशपाती, सेब आदि के पौधे शामिल है। इन पौधों में से अस्सी फीसदी पौधे धरातल पर पनप रहे हैं। बताया कि साल 1980 में उनके सामने आर्थिक समस्या आई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पौधे खरीदने को उन्होंने अपनी चार मैक्स पिक अप गाड़ी और दो नाली खेत बेच दिए। अब वे उत्तरकाशी में मोटर गैराज चलाकर परिवार का पालन पोषण कर रहे है। उनका लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश दुनिया को देना है।
राज्य सरकार से भी मिला सम्मान
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले पर्यावरण प्रेमी प्रकाश पोखरियाल को वर्ष 2006, 10, 11, 15 में राज्य सरकार की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। यही नहीं उत्तरकाशी में 200 प्रजाति के पौधे रोपने पर उन्हें विश्व हिंदू परिषद द्वारा 2010 में पर्यावरण रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
मैती कार्यक्रम से जुड़े पर्यावरण प्रेमी
प्रकाश पोखरियाल का पर्यावरण के प्रति प्रेम यहीं नहीं रुका, वर्ष 1998 में वह मैती संस्था से जुड़ गए। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने चार हजार से अधिक नव दंपति जोड़ों के माध्यम से पौधा रोपण किया।