{"_id":"588113bd4f1c1be232efe562","slug":"do-not-ignore-the-symptoms-of-heart-disease","type":"story","status":"publish","title_hn":"ह्रदय रोग के लक्षणों को न करें नजरअंदाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ह्रदय रोग के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
ब्यूरो /अमर उजाला/ऋषिकेश।
Updated Fri, 20 Jan 2017 01:00 AM IST
विज्ञापन
दिल की बीमारी
- फोटो : Demo Pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में बृहस्पतिवार को जनस्वास्थ्य गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में ह्रदय रोग के कारण, लक्षण और बचाव विषय पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। गोष्ठी के दौरान मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. मीनाक्षीधर ने उच्च रक्तचाप के परिवर्तनीय और अपरिवर्तनीय कारणों के प्राथमिक लक्षणों पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि तेज सिरदर्द, सीने में भारीपन, नजर में परिवर्तन, चक्कर आना, नकसीर फूटना और आंखों में रक्त प्रभाव बढ़ना ह्रदय रोग के कारण है। कार्डियोलॉजिस्ट डा. वरुन कुमार ने ईसीजी, टीएमटी, ईको और एंजियोग्राफी के बारे में जानकारी दी।
बायोकेमेस्टी विभागाध्यक्ष डा. मनीषा नैथानी ने कहा कि व्यक्ति को कितनी ऊर्जा कैलोरी की आवश्यकता होती है यह उसके वजन, उम्र तथा कार्यस्तर पर निर्भर करता है। अधिकांश लोगों में उम्र बढ़ने के साथ कैलोरी की आवश्यकता कम हो जाती है।
विज्ञापन
ऊर्जा का लगभग 45 फीसदी भाग कार्बोहाइड्रेट से प्राप्त होता है। इसके लिए हमें अधिक फाइबर वाला भोजन करने की जरूरत है। डा. सुरेश शर्मा ने गोष्ठी का संचालन किया। इस मौके पर डा. रंजीता कुमारी, डा. सुरेखा किशोर, डा. शोभा एस अरोड़ा, डा. जया चतुर्वेदी, डा. सौरभ वार्ष्णेय आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि तेज सिरदर्द, सीने में भारीपन, नजर में परिवर्तन, चक्कर आना, नकसीर फूटना और आंखों में रक्त प्रभाव बढ़ना ह्रदय रोग के कारण है। कार्डियोलॉजिस्ट डा. वरुन कुमार ने ईसीजी, टीएमटी, ईको और एंजियोग्राफी के बारे में जानकारी दी।
विज्ञापन
बायोकेमेस्टी विभागाध्यक्ष डा. मनीषा नैथानी ने कहा कि व्यक्ति को कितनी ऊर्जा कैलोरी की आवश्यकता होती है यह उसके वजन, उम्र तथा कार्यस्तर पर निर्भर करता है। अधिकांश लोगों में उम्र बढ़ने के साथ कैलोरी की आवश्यकता कम हो जाती है।
विज्ञापन
ऊर्जा का लगभग 45 फीसदी भाग कार्बोहाइड्रेट से प्राप्त होता है। इसके लिए हमें अधिक फाइबर वाला भोजन करने की जरूरत है। डा. सुरेश शर्मा ने गोष्ठी का संचालन किया। इस मौके पर डा. रंजीता कुमारी, डा. सुरेखा किशोर, डा. शोभा एस अरोड़ा, डा. जया चतुर्वेदी, डा. सौरभ वार्ष्णेय आदि उपस्थित रहे।