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न विस्थापन, न सुरक्षा, खतरे में नौनिहालों की कक्षा
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय और राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय घट्टूगाड में इस तरह किया जा रहा सुर
- फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। यमकेश्वर ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत मराल के खंडग्राम घट्टूगाड के पाणीप्याऊ में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय और राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय में नौनिहाल खतरे की जद में सुनहरे भविष्य की बाट जोह रहे हैं। सात वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक विद्यालय का विस्थापन नहीं हुआ है। न ही शासन प्रशासन की ओर से यहां कोई सुरक्षात्मका कार्य किए गए।
वर्ष 2014 दैवीय आपदा में गंगा की सहायक नदी हेंवल नदी ने रौद्र रूप धारण कर दिया था। हेंवल नदी का जलस्तर बढ़ने से कई जगह भू-धंसाव और भूस्खलन हो गया था। दैवीय आपदा आने से हेंवल घाटी के मोहनचट्टी, बैरागढ, जोग्याणा, पस्तोड़ा, घट्टूगाड, रत्तापानी व फूलचट्टी आदि जगहों पर कई मकान, गोशाला व कृषि भूमि बाढ़ में जमींदोज हो गए थे। इससे लक्ष्मणझूला से मात्र 14 किमी दूर राजकीय प्राथमिक विद्यालय और राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय के भवन भी खतरे की जद में आ गए हैं। बाढ़ से विद्यालय प्रांगण, खेल मैदान, पानी की टंकी व शौचालय बाढ़ की भेंट चढ़ गए तब से लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण दोनों विद्यालयों में दरारें पड़ी हुई हैं। वर्तमान में इस स्कूल में 80 से 100 छात्र अध्ययनरत हैं। जो कभी भी नौनिहाल के जीवन के लिए जानमाल का खतरा साबित हो सकता है। इसके बावजूद आज तक शासन-प्रशासन ने यहां न तो सुरक्षात्मक उपायों की जहमत उठाई है और न ही स्कूलों के विस्थापन को मंजूरी दी है।
सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, दिनेश रावत, मुकेश, रविंद्र सिंह रावत ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन समिति कि बैठक में स्कूलों के विस्थापन संबंधी स्वीकृत प्रस्ताव विभाग को कई बार भेजे जा चुके हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन व गहरी होती दरारों से भवनों के कभी भी गिरने का खतरा बढ़ सकता है। कहा करीब डेढ़ वर्ष तो कोरोनाकाल में कट गया है। अब स्कूल में कक्षा छह से कक्षा आठ तक के बच्चों की पढ़ाई भी शुरू हो गई है। उसके बावजूद भी शिक्षा विभाग इस ओर लापरवाह बना हुआ है।
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विद्यालय के विस्थापन के लिए दूसरी जगह भूमि तलाशी जा रही है। विद्यालय के लिए उचित भूमि उपलब्ध नहीं होने से ऐसी समस्या बन रही है। जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा।
शैलेंद्र सिंह अमोली, खंड शिक्षा अधिकारी यमकेश्वर।
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वर्ष 2014 दैवीय आपदा में गंगा की सहायक नदी हेंवल नदी ने रौद्र रूप धारण कर दिया था। हेंवल नदी का जलस्तर बढ़ने से कई जगह भू-धंसाव और भूस्खलन हो गया था। दैवीय आपदा आने से हेंवल घाटी के मोहनचट्टी, बैरागढ, जोग्याणा, पस्तोड़ा, घट्टूगाड, रत्तापानी व फूलचट्टी आदि जगहों पर कई मकान, गोशाला व कृषि भूमि बाढ़ में जमींदोज हो गए थे। इससे लक्ष्मणझूला से मात्र 14 किमी दूर राजकीय प्राथमिक विद्यालय और राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय के भवन भी खतरे की जद में आ गए हैं। बाढ़ से विद्यालय प्रांगण, खेल मैदान, पानी की टंकी व शौचालय बाढ़ की भेंट चढ़ गए तब से लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण दोनों विद्यालयों में दरारें पड़ी हुई हैं। वर्तमान में इस स्कूल में 80 से 100 छात्र अध्ययनरत हैं। जो कभी भी नौनिहाल के जीवन के लिए जानमाल का खतरा साबित हो सकता है। इसके बावजूद आज तक शासन-प्रशासन ने यहां न तो सुरक्षात्मक उपायों की जहमत उठाई है और न ही स्कूलों के विस्थापन को मंजूरी दी है।
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सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, दिनेश रावत, मुकेश, रविंद्र सिंह रावत ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन समिति कि बैठक में स्कूलों के विस्थापन संबंधी स्वीकृत प्रस्ताव विभाग को कई बार भेजे जा चुके हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन व गहरी होती दरारों से भवनों के कभी भी गिरने का खतरा बढ़ सकता है। कहा करीब डेढ़ वर्ष तो कोरोनाकाल में कट गया है। अब स्कूल में कक्षा छह से कक्षा आठ तक के बच्चों की पढ़ाई भी शुरू हो गई है। उसके बावजूद भी शिक्षा विभाग इस ओर लापरवाह बना हुआ है।
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विद्यालय के विस्थापन के लिए दूसरी जगह भूमि तलाशी जा रही है। विद्यालय के लिए उचित भूमि उपलब्ध नहीं होने से ऐसी समस्या बन रही है। जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा।
शैलेंद्र सिंह अमोली, खंड शिक्षा अधिकारी यमकेश्वर।

हेंवल नदी के रौद्ररुप में आने के बाद खतरे की जद में राजकीय प्राथमिक विद्यालय और राजकीय उच्चतर प्र- फोटो : RISHIKESH