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तीर्थनगरी में हर्षोल्लास से मनाया गया भैयादूज

Wed, 30 Oct 2019 01:03 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 30 Oct 2019 01:03 AM IST
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Bhaiyuduj was celebrated with joy on the auspicious time in Tirth Nagar
11 भैया दूज पर भाई के माथे पर टीका लगाकर लंबी उम्र की कामना करती बहन - फोटो : RISHIKESH
भैयादूज का ये दिन बड़ा खास है, मन में आस्था और सच्चा विश्वास है, खुश रहे यूं ही बहन तू, इस भाई के मन में बस यही आस है। तीर्थनगरी में भैयादूज का त्यौहार हर्षोल्लास के संग मनाया गया। बहनों ने शुभ मुहुर्त में भाइयों का तिलक कर, कलावा बांध और नारियल देकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। वहीं भाइयों ने बहनों को विभिन्न प्रकार के उपहार दिए।
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विदित है कि दीपावली के दो दिन बाद भाई और बहनों के प्रेम का त्योहार भैयादूज मनाया जाता है। तीर्थनगरी में भैयादूज पर्व की धूम नजर आई। बहनों से शुभ मुहूर्त में भाइयों का तिलक किया और कलावा बांधा। इसके साथ ही प्रसाद के रूप में नारियल देकर भगवान यम से भाईयों के लंबी उम्र की कामना की। सोशल मीडिया फेसबुक और वाहट्सएप पर भी बड़ी संख्या में भाई बहन भैयादूज की फोटो अपलोड करते हुए दिखे।
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भैयादूज की पौराणिक मान्यता
ऋषिकेश। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। साथ ही यमराज से इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करने के लिए कहती थी। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बहन की बात को टालते रहे। कार्तिक शुक्ला के दिन यमुना ने फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया।
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यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर अपने भाई यमराज को भोजन कराया। यमुना के किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया।तब यमुना ने कहा कि आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण दिए और यमलोक की ओर रवाना हुए। इसी दिन से इस पर्व को भैयादूज के रूप में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।
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