लेखक गांव थानों में आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय 15वें यंग थिंकर मीट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सह सरकार्यवाह ने नव निर्मित प्रकृति की पाठशाला का शुभारंभ किया।संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार कहा कि प्रकृति अनुशासन की सबसे बड़ी पाठशाला है। प्रकृति से सभी को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इसीलिए अपने जीवन में भी प्रकृति के विपरीत आचरण करना लाभकारी नहीं होता है। इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक राम माधव और डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि प्रकृति का अनुसरण और उसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। कहा कि मनुष्य प्रकृति से सदा कुछ न कुछ लेता रहता है। प्रकृति को संरक्षित कर उसे लौटाया भी जाना चाहिए।लेखक गांव निदेशक विदुषी निशंक कहा कि ने प्रकृति की पाठशाला का उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रकृति के सान्निध्य में भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरणीय मूल्यों और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व से जोड़ना है। लेखक गांव में शुरू की गई प्रकृति की पाठशाला बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, कर्तव्यबोध और भारतीय जीवन मूल्यों का विकास करेगी। पद्मश्री कल्याण सिंह रावत मैती, पद्मश्री डॉ आरके जैन, पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती, स्पर्श हिमालय विवि अध्यक्ष डॉ. प्रदीप भारद्वाज, प्राचार्य डॉ. इंदौरिया आदि उपस्थित रहे।