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Pithoragarh News: एक अगस्त को लिपुलेख दर्रा पार कर तकलाकोट पहुंचेंगे व्यापारी
Mon, 20 Jul 2026 10:41 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 20 Jul 2026 10:41 PM IST
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पिथौरागढ़। छह साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भारत-चीन सीमा व्यापार पर लगा कुहासा छंट गया है। पुरंग काउंटी (चीन प्रशासन) ने धारचूला प्रशासन को पत्र भेजकर एक अगस्त से भारतीय व्यापारियों को लिपुलेख दर्रे के रास्ते तकलाकोट आने की अनुमति दे दी है। कोरोना काल के बाद शुरू हो रहे इस पारंपरिक व्यापार में अब यह देखना होगा कि सीमांत के कारोबारी कितनी दिलचस्पी दिखाते हैं।
दोनों देशों के मध्य व्यापार शुरू कराने को लेकर भारत-चीन व्यापार समिति की ओर से काफी प्रयास किए गए। चीन की ओर से सहमति मिलने के बाद एक जून को धारचूला में ट्रेड कार्यालय खोला गया।
ट्रेड अधिकारी व एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि कुल 154 ट्रेड पास बने हैं। इनमें व्यापारियों के 62 और सहायकों के 92 पास हैं। गुंजी में कस्टम कार्यालय, आईबी कर्मचारियों की तैनाती आदि के बाद व्यापारियों को आठ-नौ जुलाई को लिपुलेख दर्रे से तकलाकोट मंडी पहुंचना था। इसी बीच पुरंग काउंटी से धारचूला प्रशासन को मेल के जरिये बताया गया कि अभी भारतीय मंडी का कार्य पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा व्यापारियों के संबंध में कई जानकारियां भी मांगी गई थीं।
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प्रशासन की ओर से सभी जानकारी चीन प्रशासन को उपलब्ध कराई गई। एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि चीन प्रशासन ने एक अगस्त को भारतीय व्यापारियों को भेजने को कहा है उन्होंने बताया कि व्यापारियों को लिपुलेख दर्रे से एक अगस्त को तकलाकोट भेजा जाएगा।
गुंजी, गर्ब्यांग आदि जगहों पर पड़ा है व्यापारियों का सामान
चीन प्रशासन की ओर से पत्र आने के बाद तकलाकोट मंडी जाने के गुंजी पहुंचे कई व्यापारी वापस धारचूला लौट आए थे। व्यापारियों का सामान गर्ब्यांग, गुंजी, कुटी आदि जगहों पर पड़ा है। सीमांत के व्यापारी गुड़, मिश्री, सौंदर्य प्रसाधन, बर्तन लेकर तकलाकोट जाते हैं। नेपाल के व्यापारी पहले ही वहां पहुंच चुके हैं। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकली ने बताया कि विलंब से शुरू हो रहे व्यापार से भारतीय व्यापारियों पर असर पड़ेगा। सीमांत के व्यापारियों का पहले से ही करीब एक करोड़ का सामान तकलाकोट में पड़ा है। व्यापारियों की मौजूदगी में चीन प्रशासन दुकान, गोदामों का ताला तोड़ उन्हें सामान सुपुर्द करेगा। इसके बाद भारतीय व्यापारी नई मंडी में जाएंगे।
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दोनों देशों के मध्य व्यापार शुरू कराने को लेकर भारत-चीन व्यापार समिति की ओर से काफी प्रयास किए गए। चीन की ओर से सहमति मिलने के बाद एक जून को धारचूला में ट्रेड कार्यालय खोला गया।
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ट्रेड अधिकारी व एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि कुल 154 ट्रेड पास बने हैं। इनमें व्यापारियों के 62 और सहायकों के 92 पास हैं। गुंजी में कस्टम कार्यालय, आईबी कर्मचारियों की तैनाती आदि के बाद व्यापारियों को आठ-नौ जुलाई को लिपुलेख दर्रे से तकलाकोट मंडी पहुंचना था। इसी बीच पुरंग काउंटी से धारचूला प्रशासन को मेल के जरिये बताया गया कि अभी भारतीय मंडी का कार्य पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा व्यापारियों के संबंध में कई जानकारियां भी मांगी गई थीं।
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प्रशासन की ओर से सभी जानकारी चीन प्रशासन को उपलब्ध कराई गई। एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि चीन प्रशासन ने एक अगस्त को भारतीय व्यापारियों को भेजने को कहा है उन्होंने बताया कि व्यापारियों को लिपुलेख दर्रे से एक अगस्त को तकलाकोट भेजा जाएगा।
गुंजी, गर्ब्यांग आदि जगहों पर पड़ा है व्यापारियों का सामान
चीन प्रशासन की ओर से पत्र आने के बाद तकलाकोट मंडी जाने के गुंजी पहुंचे कई व्यापारी वापस धारचूला लौट आए थे। व्यापारियों का सामान गर्ब्यांग, गुंजी, कुटी आदि जगहों पर पड़ा है। सीमांत के व्यापारी गुड़, मिश्री, सौंदर्य प्रसाधन, बर्तन लेकर तकलाकोट जाते हैं। नेपाल के व्यापारी पहले ही वहां पहुंच चुके हैं। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकली ने बताया कि विलंब से शुरू हो रहे व्यापार से भारतीय व्यापारियों पर असर पड़ेगा। सीमांत के व्यापारियों का पहले से ही करीब एक करोड़ का सामान तकलाकोट में पड़ा है। व्यापारियों की मौजूदगी में चीन प्रशासन दुकान, गोदामों का ताला तोड़ उन्हें सामान सुपुर्द करेगा। इसके बाद भारतीय व्यापारी नई मंडी में जाएंगे।