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हजारों नम आंखों ने दी शहीद पवन को अंतिम विदाई

Fri, 11 Aug 2017 10:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोलीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोलीहाट Updated Fri, 11 Aug 2017 10:50 PM IST
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Thousands of humble eyes gave the last farewell to Shaheed Pawan
शहीद पवन के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते लोग - फोटो : अमर उजाला

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के कृष्णा घाटी सेक्टर में आठ अगस्त को अपरान्ह 2.50 बजे पाकिस्तानी सेना की ओर से की गई गोलीबारी में शहीद पवन सिंह सुगड़ा का शुक्रवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के समय हजारों लोग मौजूद थे। सभी की आंखें नम हो गई। बेहद कम उम्र के इस होनहार की शहादत से पूरी गंगावली घाटी दुख में डूबी है। अंतिम यात्रा के समय रास्ते पर पड़ने वाले रोल, सिंतोला, कुंतोला, धराड़ी, नैनोलीकैणा, नागधूना, चौरपाल, सुगड़ी गांव के लोग हाथों में फूल लेकर खड़े रहे। सभी के मन में पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा था।

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शहीद का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार शाम यहां पहुंच गया था। रात में पार्थिव शरीर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया। सुबह पांच बजे सेना के जवान पार्थिव शरीर को लेकर शहीद के गांव सुगड़ी के लिए रवाना हुए और 7.25 बजे पार्थिव शरीर शहीद के घर पर पहुंच गया। वहां से करीब साढ़े तीन किलोमीटर का पैदल सफर तय करने के बाद शहीद की अंतिम यात्रा 9.05 बजे सरयू के किनारे स्थित रैकोला घाट पहुंची। सेना की ओर से 119 इंफेंट्री बटालियन के डिप्टी कमांडेंट कर्नल भूपेंद्र हाडा, कर्नल एसएस चौहान, कर्नल केके श्रीवास्तव, ले. कर्नल जेम्स सैमुअल, मेजर हिमांशु पंत, मेजर एके मिश्रा, सूबेदार जगत सिंह, उमेद सिंह, एसडीएम वैभव गुप्ता, खंड शिक्षा अधिकारी किशोर पंत, पूर्व विधायक नारायण राम, राम सिंह बिष्ट, गोकुल गंगोला, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष शेर सिंह गुरौ, सैनिक कल्याण अधिकारी वीएस थापा, सहायक सैनिक कल्याण अधिकारी महावीर राणा, चंचल जरमाल, सुरेश जोशी, रमेश बोरा, पुलिस क्षेत्राधिकारी विमल आचार्य आदि ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाए। उसके बाद कुमाऊं राइफल्स के हवलदार विक्रम सिंह के नेतृत्व में सेना के जवानों ने शहीद को अंतिम सलामी दी। 
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सेना की ओर से 119 इंफेंट्री ब्रिगेड ग्रुप के दो जेसीओ, 40 जवान, पंचशूल ब्रिगेड के दो अधिकारी, 195 मीडियम रेजीमेंट के दो जवान, 20 कुमाऊं रेजीमेंट के एक जोसीओ और दो जवान अंतिम संस्कार के समय मौजूद थे। शहीद के पार्थिव शरीर पर उनके ताऊ प्रताप सिंह ने तिरंगा चढ़ाया। बाद में प्रताप सिंह और शहीद के चचेरे भाई किशन सिंह ने चिता को मुखाग्नि दी।
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महिलाओं के करुण क्रंदन से सभी का दिल पसीजा 
गंगोलीहाट। सुगड़ी गांव में शहीद पवन का पार्थिव शरीर पहुंचते ही महिलाओं का करुण क्रंदन शुरू हो गया। हर तरफ से सिर्फ रोने की आवाजें आ रही थीं। इतनी कम उम्र में देश के लिए शहीद होने वाले पवन की तस्वीर, उसका नटखट स्वभाव सभी की आंखों में तैर रहा था। 13 जून को डेढ़ महीने की छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर गए पवन का दो महीने के भीतर ही पार्थिव शरीर पहुंच गया।

मां और बहन बदहवास हालत में 
गंगोलीहाट। शहीद पवन की मां देवकी देवी और बहन वंदना बदहवास हालत में हैं। मां तो पार्थिव शरीर से लिपट गई। वह बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं। आठ अगस्त से उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा है। बहन वंदना की स्थिति भी ऐसी ही हो रही है। गांव के लोग सांत्वना तो दे रहे हैं, लेकिन कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहा है।

पिता ने धैर्य दिखाने का साहस रखा
गंगोलीहाट। शहीद पवन के पिता पूर्व फौजी दान सिंह सुगड़ा ने धैर्य दिखाने का साहस किया, लेकिन उनकी जुबान से एक शब्द नहीं निकल पा रहा था। वह मूक बनकर सारी स्थिति को देख रहे थे। एक नौजवान बेटे को खोने का गम उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था।

ताऊ ने कहा कब तक शहादत सहेंगे 
गंगोलीहाट। शहीद पवन के ताऊ प्रताप सिंह ने कहा कि अब पाकिस्तान को सबक सिखाने का समय आ गया है। इस तरह की शहादतों को कब तक सहन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को शीघ्र फैसला लेना चाहिए और पाकिस्तान को नेस्तनाबूद कर देना चाहिए।

राज्य सरकार ने दस लाख रुपये दिए
गंगोलीहाट। प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत और जिले के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल को शुक्रवार को शहीद के गांव सुगड़ी आना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण उनका हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका। पंत ने फोन पर कहा कि जल्दी वह सुगड़ी गांव जाएंगे। इस बीच सरकार ने शहीद के परिजनों को दस लाख रुपये का चेक दिया है। विधायक मीना गंगोला ने शहीद के घर जाकर उनके पिता दान सिंह को यह चेक सौंपा।


गंगोलीहाट से पहुंची 25 गाड़ियां
गंगोलीहाट। शहीद पवन की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए गंगोलीहाट से 25 गाड़ियों में लोग पहुंचे थे। सुगड़ी गांव के आसपास के सभी गांवों के लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। घाट के पास स्थित रैखोला गांव की महिलाएं भी अंतिम संस्कार के समय सरयू के किनारे तक पहुंची थीं।

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