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Pithoragarh News: हिमालय की तरफ खिसक रही है ट्री लाइन
Fri, 29 Aug 2025 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 29 Aug 2025 11:17 PM IST
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मुनस्यारी का खलिया बुग्याल। स्रोत:सोनू निर्खुपा।
पिथौरागढ़। प्रदेश के हिमालयी क्षेत्रों में ट्री लाइन हिमालयी की तरफ खिसक रही है और बुग्यालों का दायरा सिमट रहा है। जिन बुग्यालों में दूर-दूर तक सिर्फ हरी घास नजर आती थी अब यहां विभिन्न प्रजातियों के पेड़ पनपने लगे हैं। जलवायु परिवर्तन और मानवीय दबाव बढ़ने से हिमालयी क्षेत्रों में पेड़ों के उगने और पनपने का दायरा 3700 से 4000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया है।
आमतौर पर हिमालयी क्षेत्रों में समुद्र तल से तीन हजार मीटर के आसपास की ऊंचाई पर ही पेड़ होते हैं। इसे ट्री लाइन कहा जाता है। हिमालयी जिला पिथौरागढ़ के मुनस्यारी क्षेत्र में इससे अधिक ऊंचाई स्थित रालम, ल्वां, ग्वार, नंदा कुंड आदि बुग्यालों में पहुंचे ट्रैकरों ने बताया कि यहां बुरांश सहित अन्य प्रजाति के पेड़ उगने और पनपने शुरू हुए हैं।
वैज्ञानिकों के शोध में भी सामने आया है कि हिमालयी क्षेत्रों के बुग्यालों में बुरांश सहित अन्य प्रजाति की झाड़ियों और पेड़ों का 1.4 मीटर प्रति वर्ष फैलाव हो रहा है। ऊंचाई पर पेड़ों और झाड़ियों की ऊंचाई निचले इलाकों की अपेक्षा कम है। वन विभाग का भी मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में औसत ऊंचाई से ऊपर पेड़ों का पनपना और इससे बुग्यालों का सिमटता दायरा शुभ संकेत नहीं है। वैज्ञानिक और वन विभाग इसकी मुख्य वजह हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन से बढ़ता तापमान और मानवीय दखल बता रहे हैं। संवाद
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तीन साल पूर्व तुंगनाथ क्षेत्र में किया शोध
मानसखंड विज्ञान केंद्र अल्मोड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेसीएस नेगी और उनकी टीम ने तीन साल पूर्व ट्री लाइन को लेकर गढ़वाल के तुंगनाथ क्षेत्र में शोध किया। वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां भी 3800 मीटर की ऊंचाई पर बुरांश की एक प्रजाति और अन्य प्रजाति के पेड़ मिले। इसी तर्ज पर सीमांत जिले के हिमालयी क्षेत्रों में ट्री लाइन ऊंचाई की तरफ खिसक रही है।
यह है ट्री लाइन
ट्री लाइन हिमालयी क्षेत्रों में समुद्र तल से ऊंचाई के आधार पर पेड़ों के उगने की अंतिम सीमा है। हिमालयी क्षेत्रों में ट्री लाइन के बाद पेड़ नहीं उगते हैं।
कोट
जलवायु परिवर्तन के चलते हिमालयी क्षेत्रों में मिट्टी का तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में औसत ऊंचाई के बाद भी पेड़ों की झाड़ीनुमा प्रजाति का फैलाव हो रहा है। तुंगनाथ में किए गए शोध में ऐसा सामने आया है। - डॉ. जेसीएस नेगी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा।
कोट
कोट-हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन से तापमान बढ़ा है। ऐसे में इन क्षेत्रों में पेड़-पौधे उगने और पनपने लगे हैं। ट्री लाइन का ऊंचाई की तरफ बढ़ना भी इसका कारण हो सकता है। - आशुतोष सिंह, डीएफओ, पिथौरागढ़।
कोट
पहले हिमालयी क्षेत्र के बुग्यालों में पेड़ नजर नहीं आते थे। बीते कुछ वर्षों से यहां पेड़ पनपने लगे हैं। इन क्षेत्रों में ट्री लाइन ऊंचाई की तरफ बढ़ रही है जो अच्छे संकेत नहीं है। - सोनू निर्खुपा, ट्रेकर, मुनस्यारी।
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आमतौर पर हिमालयी क्षेत्रों में समुद्र तल से तीन हजार मीटर के आसपास की ऊंचाई पर ही पेड़ होते हैं। इसे ट्री लाइन कहा जाता है। हिमालयी जिला पिथौरागढ़ के मुनस्यारी क्षेत्र में इससे अधिक ऊंचाई स्थित रालम, ल्वां, ग्वार, नंदा कुंड आदि बुग्यालों में पहुंचे ट्रैकरों ने बताया कि यहां बुरांश सहित अन्य प्रजाति के पेड़ उगने और पनपने शुरू हुए हैं।
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वैज्ञानिकों के शोध में भी सामने आया है कि हिमालयी क्षेत्रों के बुग्यालों में बुरांश सहित अन्य प्रजाति की झाड़ियों और पेड़ों का 1.4 मीटर प्रति वर्ष फैलाव हो रहा है। ऊंचाई पर पेड़ों और झाड़ियों की ऊंचाई निचले इलाकों की अपेक्षा कम है। वन विभाग का भी मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में औसत ऊंचाई से ऊपर पेड़ों का पनपना और इससे बुग्यालों का सिमटता दायरा शुभ संकेत नहीं है। वैज्ञानिक और वन विभाग इसकी मुख्य वजह हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन से बढ़ता तापमान और मानवीय दखल बता रहे हैं। संवाद
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तीन साल पूर्व तुंगनाथ क्षेत्र में किया शोध
मानसखंड विज्ञान केंद्र अल्मोड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेसीएस नेगी और उनकी टीम ने तीन साल पूर्व ट्री लाइन को लेकर गढ़वाल के तुंगनाथ क्षेत्र में शोध किया। वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां भी 3800 मीटर की ऊंचाई पर बुरांश की एक प्रजाति और अन्य प्रजाति के पेड़ मिले। इसी तर्ज पर सीमांत जिले के हिमालयी क्षेत्रों में ट्री लाइन ऊंचाई की तरफ खिसक रही है।
यह है ट्री लाइन
ट्री लाइन हिमालयी क्षेत्रों में समुद्र तल से ऊंचाई के आधार पर पेड़ों के उगने की अंतिम सीमा है। हिमालयी क्षेत्रों में ट्री लाइन के बाद पेड़ नहीं उगते हैं।
कोट
जलवायु परिवर्तन के चलते हिमालयी क्षेत्रों में मिट्टी का तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में औसत ऊंचाई के बाद भी पेड़ों की झाड़ीनुमा प्रजाति का फैलाव हो रहा है। तुंगनाथ में किए गए शोध में ऐसा सामने आया है। - डॉ. जेसीएस नेगी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा।
कोट
कोट-हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन से तापमान बढ़ा है। ऐसे में इन क्षेत्रों में पेड़-पौधे उगने और पनपने लगे हैं। ट्री लाइन का ऊंचाई की तरफ बढ़ना भी इसका कारण हो सकता है। - आशुतोष सिंह, डीएफओ, पिथौरागढ़।
कोट
पहले हिमालयी क्षेत्र के बुग्यालों में पेड़ नजर नहीं आते थे। बीते कुछ वर्षों से यहां पेड़ पनपने लगे हैं। इन क्षेत्रों में ट्री लाइन ऊंचाई की तरफ बढ़ रही है जो अच्छे संकेत नहीं है। - सोनू निर्खुपा, ट्रेकर, मुनस्यारी।