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कई घरों में लगाए गए लकड़ी के बक्से
ब्यूरो/अमर उजाला, बेड़ीनाग
Updated Tue, 28 Mar 2017 10:37 PM IST
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बेड़ीनाग में गौरैया पालन के लिए बक्से वितरित करते कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
लोगों से लगातार दूर होती जा रही गौरैया को फिर से घरों के पास बुलाने की कोशिश शुरू हो गई है। मंगलवार को महिला संगठन, सामाजिक संगठनों और भारतीय शिक्षा संस्थान के पदाधिकारियों ने कई घरों में लकड़ी के बाक्स लगाए। इनमें छोटे-छोटे सुराख बनाए गए हैं, ताकि गौरैया उसमें अपना आशियाना बना सके। पहाड़ पर अब सीमेंट के मकान ज्यादा बनने लगे हैं। इस कारण गौरैया को अपना आशियाना बनाने के लिए घरों में जगह नहीं मिल पा रही है।
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महिला संगठन, सामाजिक संगठनों के साथ ही डा. योगेश चंद्र जोशी, डा. एमएस कोठियाल, प्रकाश बोरा आदि ने मंगलवार को कॉलेज मार्ग, तपेश्वर मंदिर मार्ग, मुख्य बाजार में कई घरों में लकड़ी के यह बाक्स उपलब्ध कराए। बाक्स का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि उसमें गौरैया आसानी से रह सकती है। लोगों से कहा गया है कि गौरैया को संरक्षण दें और उसे पास बुलाएं। महिला संगठन की सुनीता कालाकोटी, गंगा रावत ने कहा कि गौरैया को दूर हो जाना अच्छा संकेत नहीं है।
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उन्होंने कहा कि इस समय गौरैया का प्रजनन काल होता है। उसे सही समय पर उचित आशियाना मिल जाए तो वह दिन दूर नहीं जब हर घर के सामने रोज गौरैया का चहचहाट सुनने को मिल जाएगी। इस दौरान गोविंदी बाफिला, खिला राठौर, उमा रावत, आनंद लाल साह, प्रेम राम, सुरेंद्र, एमसी उप्रेती आदि थे।
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