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पीपीपी मोड अस्पताल में डॉक्टरों के सात पद रिक्त
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी
Updated Tue, 18 Jul 2017 10:45 PM IST
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मुनस्यारी का पीपीपी मोड से संचालित अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
पीपीपी मोड से संचालित मुनस्यारी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दशा बेहद दयनीय हो गई है। अस्पताल में इस समय सिर्फ पांच डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि मानक के अनुसार 12 डॉक्टर तैनात होने चाहिए। अस्पताल में महिला डॉक्टर का पद लंबे समय से रिक्त है। इस कारण प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
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सरकार ने 10 अप्रैल 2014 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को गंगाशील अस्पताल बरेली को पीपीपी मोड पर सौंप दिया था। तब से इस अस्पताल में कई तरह की अव्यवस्थाएं हावी होने लगी। अब तक अस्पताल में डॉक्टरों के पूरे पद नहीं भरे गए हैं, जबकि पीपीपी मोड में सौंपते समय यह तय हुआ था कि अस्पताल में 12 डॉक्टर और चिकित्सा कर्मियों का 42 का स्टाफ तैनात रहेगा। अस्पताल प्रबंधन को हर महीने उत्तराखंड सरकार 20 लाख रुपये का भुगतान करती है।
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पीपीपी मोड में सौंपते समय सरकार की मंशा यही थी कि सीमांत के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी, लेकिन अस्पताल में अब तक फिजीशियन और नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई। इस समय महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जन, दंत रोग विशेषज्ञ समेत सात डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। अस्पताल के प्रबंधक उत्कर्ष गंगवार का कहना है कि जल्द ही महिला डॉक्टर की तैनाती हो जाएगी और कुछ अन्य डॉक्टरों की तैनाती के भी प्रयास किए जा रहे हैं।
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रात डेढ़ बजे कर दिया प्रसव पीड़िता को रेफर
पीपीपी मोड अस्पताल के डॉक्टरों ने सोमवार रात डेढ़ बजे एक प्रसव पीड़िता को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। समकोट गांव निवासी मनोहर सिंह की 21 वर्षीय पत्नी ममता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर उनके परिजन सोमवार शाम छह बजे मुनस्यारी अस्पताल लाए। डॉक्टरों ने आधी रात के बाद तक महिला को अस्पताल में रोके रखा और बाद में उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। तड़के करीब साढ़े तीन बजे गोचर थल के पास 108 वाहन में ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया। महिला को गोचर अस्पताल में भर्ती किया गया। फिलहाल दोनों स्वस्थ हैं। समकोट निवासी मनोहर सिंह का कहना है कि बारिश के मौसम में आधी रात के बाद रेफर करने का आदेश देना अमानवीय व्यवहार है। बारिश के मौसम में अक्सर सड़क बंद होने का खतरा रहता है।