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डोली में रखकर आठ किमी दूर मदकोट पहुंचाई प्रसव पीड़िता
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बीमार बुजुर्ग को अस्पताल ले जाने के लिए उफनाई नदी पार करने का प्रयास करते ढुनामानी क्षेत्र के युव
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़/बंगापानी। आपदा से मुनस्यारी तहसील के रास्ते और पैदल पुल ध्वस्त हैं। लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है। मदकोट-दारमा मोटर मार्ग पिछले एक माह से बंद है। चलने के लिए पैदल रास्ता तक नहीं है। मार्ग न होने से ग्रामीणों ने एक बुजुर्ग को दस किमी और एक प्रसव पीड़िता को आठ किमी तक पैदल डोली में लाना पड़ा।
दारमा क्षेत्र के कुंदन भंडारी की बुधवार की सुबह तबियत बिगड़ गई। गांव के युवाओं ने उन्हें लकड़ी की डोली बनाकर अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया। इसके बाद उफनायी नदी और मलबे से पटे रास्ते पार करते हुए 10 किमी की दूरी तय कर बीमार को मदकोट अस्पताल पहुंचाया।
इसी तरह से चौना गांव निवासी प्रदीप की पत्नी राखी को बुधवार की सुबह अचानक तेज प्रसव पीड़ा हुई। मूसलाधार बारिश और मदकोट तक जाने के लिए रास्ते बंद होने से परिजन घबरा गए। इसके बावजूद गांव के लोगों ने साहस का परिचय देते हुए तमाम खतरनाक रास्ते और नदी नालों को पार कर प्रसव पीड़िता को मदकोट स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया। वहां पर महिला ने एक स्वस्थ्य बच्ची को जन्म दिया। समाज सेवी हीरा सिंह चिराल ने प्रशासन से आंतरिक सड़कों को खोलने की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीण राशन तक पीठ में ढोने को मजबूर हैं। संवाद
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दारमा क्षेत्र के कुंदन भंडारी की बुधवार की सुबह तबियत बिगड़ गई। गांव के युवाओं ने उन्हें लकड़ी की डोली बनाकर अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया। इसके बाद उफनायी नदी और मलबे से पटे रास्ते पार करते हुए 10 किमी की दूरी तय कर बीमार को मदकोट अस्पताल पहुंचाया।
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इसी तरह से चौना गांव निवासी प्रदीप की पत्नी राखी को बुधवार की सुबह अचानक तेज प्रसव पीड़ा हुई। मूसलाधार बारिश और मदकोट तक जाने के लिए रास्ते बंद होने से परिजन घबरा गए। इसके बावजूद गांव के लोगों ने साहस का परिचय देते हुए तमाम खतरनाक रास्ते और नदी नालों को पार कर प्रसव पीड़िता को मदकोट स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया। वहां पर महिला ने एक स्वस्थ्य बच्ची को जन्म दिया। समाज सेवी हीरा सिंह चिराल ने प्रशासन से आंतरिक सड़कों को खोलने की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीण राशन तक पीठ में ढोने को मजबूर हैं। संवाद
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