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Pithoragarh News: सात माह से मनोरोग विशेषज्ञ नहीं, मरीज परेशान
Fri, 09 Oct 2026 11:04 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:04 PM IST
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चंपावत। जिला अस्पताल में सात महीने से मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो पाई है। इससे मानसिक रोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को बिना जांच के लौटना पड़ रहा है। लोगों ने अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती की मांग की है।
जिला अस्पताल में लोहाघाट, बाराकोट, पाटी, मंच, तामली, अमोड़ी सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से मानसिक रोगों के उपचार के लिए मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 10 से 15 मरीज मनोरोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने आते हैं। अस्पताल में पिछले सात महीने से विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने के कारण मरीजों को बिना उपचार के लौटना पड़ रहा है।
मानसिक रोगियों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। वहीं, जिले में शस्त्र लाइसेंस के लिए आवश्यक काउंसलिंग भी नहीं हो पा रही है। मानसिक रोगों से जूझ रहे मरीजों को नियमित परामर्श और उपचार की जरूरत होती है। ऐसे में उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के लिए हल्द्वानी, बरेली समेत अन्य शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे मरीजों और उनके परिजनों का समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले लोगों को आवाजाही में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संवाद
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सात माह बीत गए नहीं हो पाई है व्यवस्था
जिला अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ का पद करीब सात माह से रिक्त चल रहा है। अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचएस ह्यांकी ने बताया कि यहां तैनात मनोचिकित्सक डॉ. आशुतोष बहुगुणा सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल डिग्री हासिल करने के लिए गए हैं। इसके बाद से अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है।
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मुख्यमंत्री की विधानसभा में ही चिकित्सकों का अभाव होना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में नाकाम रही है। यही स्थिति प्रदेश की अन्य विधानसभाओं में भी बनी हुई है। - हेमेश खर्कवाल, पूर्व विधायक कांग्रेस, चंपावत विधानसभा
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पहले मरीजों को छोटी-छोटी जांचों के लिए भी दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़ती थी। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कमान संभालने के बाद जिले में विकास कार्यों को गति मिली है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी काफी सुधार हुआ है। अब एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई जांचों के लिए मरीजों को जिले से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
- गोविंद सामंत, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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जिला अस्पताल में लोहाघाट, बाराकोट, पाटी, मंच, तामली, अमोड़ी सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से मानसिक रोगों के उपचार के लिए मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 10 से 15 मरीज मनोरोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने आते हैं। अस्पताल में पिछले सात महीने से विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने के कारण मरीजों को बिना उपचार के लौटना पड़ रहा है।
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मानसिक रोगियों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। वहीं, जिले में शस्त्र लाइसेंस के लिए आवश्यक काउंसलिंग भी नहीं हो पा रही है। मानसिक रोगों से जूझ रहे मरीजों को नियमित परामर्श और उपचार की जरूरत होती है। ऐसे में उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के लिए हल्द्वानी, बरेली समेत अन्य शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे मरीजों और उनके परिजनों का समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले लोगों को आवाजाही में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संवाद
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सात माह बीत गए नहीं हो पाई है व्यवस्था
जिला अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ का पद करीब सात माह से रिक्त चल रहा है। अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचएस ह्यांकी ने बताया कि यहां तैनात मनोचिकित्सक डॉ. आशुतोष बहुगुणा सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल डिग्री हासिल करने के लिए गए हैं। इसके बाद से अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है।
मुख्यमंत्री की विधानसभा में ही चिकित्सकों का अभाव होना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में नाकाम रही है। यही स्थिति प्रदेश की अन्य विधानसभाओं में भी बनी हुई है। - हेमेश खर्कवाल, पूर्व विधायक कांग्रेस, चंपावत विधानसभा
पहले मरीजों को छोटी-छोटी जांचों के लिए भी दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़ती थी। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कमान संभालने के बाद जिले में विकास कार्यों को गति मिली है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी काफी सुधार हुआ है। अब एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई जांचों के लिए मरीजों को जिले से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
- गोविंद सामंत, जिलाध्यक्ष, भाजपा