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इनर लाइन परमिट के बिना आईटीबीपी परिसर गर्ब्यांग में प्रवेश करने पर एक गिरफ्तार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Mar 2021 11:29 PM IST
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No entry,No entry in Innerline
इसी सीपू गाड़ में बना था पुल जो ग्लेशियर आने से टूट गया है। - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। धारचूला से गुंजी की ओर जा रहे दिल्ली निवासी युवक को आईटीबीपी की सीमा चौकी गर्ब्यांग के पास हिरासत में ले लिया गया है। पकड़े गए युवक से सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस पूछताछ कर रही हैं। हालांकि युवक के पास आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली है।
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बोलेरो सवारी गाड़ी यूके 05/3350 सोमवार को धारचूला से गुंजी की ओर जा रही थी। तभी धारचूला तहसील की आईटीबीपी सीमा चौकी गर्ब्यांग के पास इसे रोककर चेकिंग की गई। इसी दौरान इसमें सवार एक संदिग्ध व्यक्ति इनर लाइन पास के बिना मिला।
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पूछताछ में युवक ने अपना नाम विपिन पुत्र अजीत सिंह निवासी द्वारिका, दक्षिण दिल्ली बताया। आधार कार्ड और वोटर कार्ड में उसकी जन्मतिथि 14 जून 1996 है। उसने बताया कि तीन माह पूर्व उसने दरभंगा बिहार से जनकपुर नेपाल में प्रवेश किया था।
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नेपाल में घूमकर 14 मार्च की सुबह आठ बजे उसने दार्चूला (नेपाल) से धारचूला (भारत) में प्रवेश किया। इसके बाद सवारी गाड़ी से धारचूला से कालापानी की ओर जा रहा था। युवक के पास से लैपटॉप, राइटिंग टैबलेट, नेपाल का नक्शा बरामद हुआ।
इसलिए पुलिस उसे 15 मार्च को थाना पांगला में लाई। अब उसे गर्ब्यांग में रखा गया है। जहां आईटीबीपी, एसएसबी, आईबी, एमआई और पुलिस पूछताछ कर रही है।
पूछताछ में विपिन ने बताया कि वह शोध के लिए नेपाल से इस क्षेत्र में आया है लेकिन उसे इनरलाइन पास की जानकारी नहीं थी। प्रारंभिक पूछताछ में उससे कोई आपत्तिजनक जानकारी नहीं मिली है।
क्या है इनर लाइन
धारचूला। जिस स्थान से आगे प्रतिबंधित क्षेत्र होता है, उसे इनर लाइन कहा जाता है। धारचूला की चीन सीमा से लगी व्यास घाटी में छियालेख, दारमा घाटी में ढाकर और मुनस्यारी की जोहार घाटी में मिलम इनर लाइन है।
इनर लाइन ऐसा संरक्षित क्षेत्र है, जहां जाने के लिए हर व्यक्ति को परमिट की जरूरत होती है। इस क्षेत्र में बाहरी व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता है। इनर लाइन में प्रवेश करने वाले लोग परमिट की अवधि तक ही संबंधित क्षेत्र में रह सकते हैं।

चीन सीमा से लगे सीमांत धारचूला क्षेत्र में पहले जौलजीबी को इनर लाइन बनाया गया था। क्षेत्रवासियों की मांग पर 1992 में छियालेख को इनर लाइन बनाया गया। इनर लाइन वाले क्षेत्र में जाने के लिए बाहरी व्यक्तियों को स्थानीय प्रशासन से परमिट लेने की जरूरत होती है।
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