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नजंग पुल से बूंदी तक की यात्रा में कई गुना बढ़ गया जोखिम
Mon, 20 May 2019 10:53 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Mon, 20 May 2019 10:53 PM IST
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ से ढके केएमवीएन के कैंप।
- फोटो : पिथौरागढ़
कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग की सर्वे रिपोर्ट सोमवार को कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक प्रशासन को सौंप दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक केएमवीएन ने यात्रा मार्ग का रखरखाव न होने के कारण पैदल यात्रा को जोखिम से भरी हुई है।
केएमवीएन की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक नजंग पुल से बोलधार होते हुए मालपा तक ढाई से तीन किमी, मालपा से स्यारव होते हुए पेलसीती तक 3.50 किमी, पेलसीती से ध्यांकन तक 1.10 किमी, लामारि से कटारपानी होते हुए बूंदी तक पांच किमी की पैदल यात्रा बेहद कठिन साबित होगी। रिपोर्ट में कहा है कि नाभीढांग कैंप में अभी ढाई फुट बर्फ है। कैंप में 10 फाइबर हटों में से दो के दरवाजे, खिड़की टूटी है। पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।
कैंप का जनरेटर भी खराब है। कालापानी कैंप में 150 मीटर पाइप लाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। गुंजी कैंप में भी जलापूर्ति बाधित है। फाइबर हट और टॉयलेट ब्लॉक के खिड़कियों, दरवाजों में टूटे है। बूंदी और गाला कैंपों की स्थिति भी ठीक नहीं है। धारचूला-गर्वाधार होते हुए नजंग तक मार्ग ठीक है। बूंदी से नाभीढांग तक बने मार्ग पर वर्तमान में बीआरओ, आईटीबीपी और अन्य सैन्य वाहन सुचारु रूप से चल रहे हैं।
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नजंग पुल से बुंदी तक 14 किमी तक अनेक स्थानों पर रोड कटिंग का कार्य चल रहा है। इसके चलते पैदल मार्ग की स्थिति बदल गई है।
नजंग पुल से बूंदी तक के 14 किमी क्षत्र में सड़क कटिंग का कार्य होने से यात्रा मार्ग बेहद उतार-चढ़ाव भरा हो गया है। पहले यात्री सीधे रास्ते पर बुंदी पहुंचते थे। अभी स्थानीय लोग भी बेहद मुश्किल से रास्तों को पार कर पा रहे हैं। इसी मार्ग से यात्रा के साथ ही भारत-चीन व्यापार भी होता है। पैदल मार्ग पर यात्रा मार्ग में घोड़े, खच्चर, भेड़-बकरियों के चलते काफी धूल उड़ रही है। मार्ग में घोड़े द्वारा भी यात्रा करना संभव नहीं है। यात्रा जून में शुरू होगी।
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केएमवीएन की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक नजंग पुल से बोलधार होते हुए मालपा तक ढाई से तीन किमी, मालपा से स्यारव होते हुए पेलसीती तक 3.50 किमी, पेलसीती से ध्यांकन तक 1.10 किमी, लामारि से कटारपानी होते हुए बूंदी तक पांच किमी की पैदल यात्रा बेहद कठिन साबित होगी। रिपोर्ट में कहा है कि नाभीढांग कैंप में अभी ढाई फुट बर्फ है। कैंप में 10 फाइबर हटों में से दो के दरवाजे, खिड़की टूटी है। पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।
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कैंप का जनरेटर भी खराब है। कालापानी कैंप में 150 मीटर पाइप लाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। गुंजी कैंप में भी जलापूर्ति बाधित है। फाइबर हट और टॉयलेट ब्लॉक के खिड़कियों, दरवाजों में टूटे है। बूंदी और गाला कैंपों की स्थिति भी ठीक नहीं है। धारचूला-गर्वाधार होते हुए नजंग तक मार्ग ठीक है। बूंदी से नाभीढांग तक बने मार्ग पर वर्तमान में बीआरओ, आईटीबीपी और अन्य सैन्य वाहन सुचारु रूप से चल रहे हैं।
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नजंग पुल से बुंदी तक 14 किमी तक अनेक स्थानों पर रोड कटिंग का कार्य चल रहा है। इसके चलते पैदल मार्ग की स्थिति बदल गई है।
नजंग पुल से बूंदी तक के 14 किमी क्षत्र में सड़क कटिंग का कार्य होने से यात्रा मार्ग बेहद उतार-चढ़ाव भरा हो गया है। पहले यात्री सीधे रास्ते पर बुंदी पहुंचते थे। अभी स्थानीय लोग भी बेहद मुश्किल से रास्तों को पार कर पा रहे हैं। इसी मार्ग से यात्रा के साथ ही भारत-चीन व्यापार भी होता है। पैदल मार्ग पर यात्रा मार्ग में घोड़े, खच्चर, भेड़-बकरियों के चलते काफी धूल उड़ रही है। मार्ग में घोड़े द्वारा भी यात्रा करना संभव नहीं है। यात्रा जून में शुरू होगी।