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Pithoragarh News: दो विभागों के फेर में फंसी 13 सड़कों का बदहाली से बाहर निकलना हुआ मुश्किल
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाकर उनमें आवाजाही सुगम और सुरक्षित बनाने के दावे कागजों में दम तोड़ रहे हैं। दो विभागों के फेर में फंसी जिले की 13 सड़कें इसका प्रमाण हैं। पीएमजीएसवाई से लोनिवि को हस्तांतरित न होने से इन सड़कों के सुधारीकरण और डामरीकरण का काम सालों से अटका है। हस्तांतरण के लिए सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ रहे हैं और क्षेत्र की बढ़ी आबादी इन सड़कों पर जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए विवश है।
नियमों के मुताबिक, पीएमजीएसवाई सड़कों का निर्माण करने के बाद पांच साल तक इनका अनुरक्षण कर उन्हें लोनिवि को हस्तांतरित करता है। इसके बाद लोनिवि संबंधित सड़कों का सुधारीकरण और इनमें डामरीकरण, नाली निर्माण आदि कार्य करता है। पीएमजीएसवाई ने छह से आठ साल पूर्व 13 सड़कों का निर्माण किया जो वर्तमान में बदहाल पड़ीं हैं। इन सड़कों का सुधारीकरण और इन पर डामरीकरण तभी संभव है जब ये लोनिवि को हस्तांतरित होंगीं। पीएमजीएसवाई करीब एक साल से सड़कों को हस्तांतरित करने के लिए लोनिवि को पत्र भेज रहा है। यह पत्र सरकारी फाइलों में सिमटकर रह गए हैं।
दोनों विभागों के फेर में फंसी इन सड़कों के सुधारीकरण और डामरीकरण के बाद इनमें सुगम और सुरक्षित सफर की उम्मीद भी दम तोड़ रही हैं। ये सड़कें जिले के 120 से अधिक गांवों को जोड़ती हैं। दोनों विभागों की लेटलतीफी के चलते 15 हजार से अधिक की आबादी इन बदहाल सड़कों पर जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर है।
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110 किलोमीटर लंबी हैं सड़कें
ये सड़कें 110 किलोमीटर लंबी हैं। इन सड़कों को ग्रामीणों की आवाजाही सुगम और सुरक्षित बनाने के दावे कर बनाया गया। उम्मीद थी कि जल्द इन सड़कों पर डामरीकरण होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। दोनों विभागों के फेर में फंसी ये सड़कें गड्ढों से पटी हैं। हैरानी है कि सुधारीकरण के नाम पर दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपकर लोगों की सुरक्षा को अनदेखा कर रहे हैं।
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ये सड़कें होनी हैं लोनिवि को हस्तांतरित
सड़क लंबाई किलोमीटर में
पव्वाधार-कुंतोला 5.950
राम मंदिर-ग्वाल 9.625
खिरमांडे-नैनी 10.000
ऐंचोली-स्यूनी 8.400
छेड़ा-आगर 4.000
छेड़ा-भुरमुनी 4.350
चंडाक-चमाली 22.500
गंगोलीहाट-रनकोट 2.350
जमराड़ी-निशनी 5.000
बांस पठान-चौड़ा गोल्थी 3.800
जाखपुरान-डुंगरी रावल 16.250
धराड़ी-गानूरा 10.000
कोठेरा-सिमलकोट 7.800
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इन सड़कों का अनुरक्षण कार्य खत्म होने के बाद ये लोनिवि को हस्तांतरित होनी हैं। इसके लिए लोनिवि को लगातार पत्राचार किया जा रहा है। फिर से लोनिवि को पत्र भेजा जाएगा। -विवेक प्रताप सिंह, ईई, पीएमजीएसवाई, पिथौरागढ़
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पीएमजीएसवाई से सड़कों के हस्तांतरण के लिए शासन से फिलहाल कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। यदि हस्तांतरण का आदेश मिलेगा तो सड़कों को लोनिवि अपने अधीन लेगा। -सुनील कुमार, प्रभारी ईई, लोनिवि, पिथौरागढ़
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नियमों के मुताबिक, पीएमजीएसवाई सड़कों का निर्माण करने के बाद पांच साल तक इनका अनुरक्षण कर उन्हें लोनिवि को हस्तांतरित करता है। इसके बाद लोनिवि संबंधित सड़कों का सुधारीकरण और इनमें डामरीकरण, नाली निर्माण आदि कार्य करता है। पीएमजीएसवाई ने छह से आठ साल पूर्व 13 सड़कों का निर्माण किया जो वर्तमान में बदहाल पड़ीं हैं। इन सड़कों का सुधारीकरण और इन पर डामरीकरण तभी संभव है जब ये लोनिवि को हस्तांतरित होंगीं। पीएमजीएसवाई करीब एक साल से सड़कों को हस्तांतरित करने के लिए लोनिवि को पत्र भेज रहा है। यह पत्र सरकारी फाइलों में सिमटकर रह गए हैं।
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दोनों विभागों के फेर में फंसी इन सड़कों के सुधारीकरण और डामरीकरण के बाद इनमें सुगम और सुरक्षित सफर की उम्मीद भी दम तोड़ रही हैं। ये सड़कें जिले के 120 से अधिक गांवों को जोड़ती हैं। दोनों विभागों की लेटलतीफी के चलते 15 हजार से अधिक की आबादी इन बदहाल सड़कों पर जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर है।
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110 किलोमीटर लंबी हैं सड़कें
ये सड़कें 110 किलोमीटर लंबी हैं। इन सड़कों को ग्रामीणों की आवाजाही सुगम और सुरक्षित बनाने के दावे कर बनाया गया। उम्मीद थी कि जल्द इन सड़कों पर डामरीकरण होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। दोनों विभागों के फेर में फंसी ये सड़कें गड्ढों से पटी हैं। हैरानी है कि सुधारीकरण के नाम पर दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपकर लोगों की सुरक्षा को अनदेखा कर रहे हैं।
ये सड़कें होनी हैं लोनिवि को हस्तांतरित
सड़क लंबाई किलोमीटर में
पव्वाधार-कुंतोला 5.950
राम मंदिर-ग्वाल 9.625
खिरमांडे-नैनी 10.000
ऐंचोली-स्यूनी 8.400
छेड़ा-आगर 4.000
छेड़ा-भुरमुनी 4.350
चंडाक-चमाली 22.500
गंगोलीहाट-रनकोट 2.350
जमराड़ी-निशनी 5.000
बांस पठान-चौड़ा गोल्थी 3.800
जाखपुरान-डुंगरी रावल 16.250
धराड़ी-गानूरा 10.000
कोठेरा-सिमलकोट 7.800
इन सड़कों का अनुरक्षण कार्य खत्म होने के बाद ये लोनिवि को हस्तांतरित होनी हैं। इसके लिए लोनिवि को लगातार पत्राचार किया जा रहा है। फिर से लोनिवि को पत्र भेजा जाएगा। -विवेक प्रताप सिंह, ईई, पीएमजीएसवाई, पिथौरागढ़
पीएमजीएसवाई से सड़कों के हस्तांतरण के लिए शासन से फिलहाल कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। यदि हस्तांतरण का आदेश मिलेगा तो सड़कों को लोनिवि अपने अधीन लेगा। -सुनील कुमार, प्रभारी ईई, लोनिवि, पिथौरागढ़