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Pithoragarh News: 46 साल बाद पेंशन का हक, बेटी की जिद ने खोले बंद दरवाजे

Tue, 06 Oct 2026 11:19 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Tue, 06 Oct 2026 11:19 PM IST
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Entitled to pension after 46 years; daughter's persistence opened closed doors
पिथौरागढ़। डीडीहाट के सैनिक मनोहर सिंह की मौत के 46 साल बाद वीर नारी पार्वती देवी को आखिरकार पारिवारिक पेंशन का हक मिल गया है। महज 19 साल की उम्र में विधवा हुईं पार्वती तब गर्भवती थीं। उन्होंने बेटी को अकेले पालकर बड़ा किया। बेटी जीवंती ने मां की पीड़ा को अपनी लड़ाई बनाकर अंजाम तक पहुंचाया। अब उन्हें 18 हजार रुपये मासिक पेंशन और आठ लाख रुपये एकमुश्त मिले हैं।
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कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात रहे मनोहर का वर्ष 1980 में महज 20 साल की उम्र में निधन हो गया था। पति की मौत के बाद पार्वती चार महीने की गर्भवती थीं। वह मायके चली गईं और वहीं बेटी जीवंती पैदा हुई। इसके बाद बेटी के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी उन्होंने अकेले उठाई। मुश्किल हालात के बावजूद बेटी को बड़ा किया और उसका विवाह किया।
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परिजनों ने बताया कि मनोहर की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन उनके पिता ने अपने नाम करा ली थी। इसके कारण पार्वती को पेंशन का फायदा नहीं मिला। समय बीतता गया और यह मामला उनकी जिंदगी की दूसरी प्राथमिकताओं के बीच दब गया और पार्वती ने अभावों में जीवन गुजारा। जीवंती ने पिता को कभी देखा नहीं लेकिन मां के दर्द, अभाव और मुश्किलें देखी थीं। यही वजह रही कि मां के अधूरे हक को उन्होंने अपना संघर्ष बना लिया। लंबी पैरवी और दस्तावेजी कार्रवाई के बाद पार्वती के पेंशन का रास्ता साफ हुआ।
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मां की पीड़ा जानी तो शुरू की लड़ाई

समय के साथ जीवंती को मां के साथ हुए घटनाक्रम की जानकारी हुई। उन्हें पता चला कि पिता की मृत्यु के बाद मां पारिवारिक पेंशन के अधिकार से वंचित रह गई थीं। मां की स्थिति और 46 साल पुराने इस मामले ने उन्हें परेशान किया। उन्होंने तय किया कि मां को उनका हक दिलाकर ही रहेंगी।

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पूर्व सैनिक संगठन आया आगे
वर्ष 2024 में जीवंती ने मामला पूर्व सैनिक संगठन के सामने रखा। संगठन के क्षेत्रीय संयोजक दीवान सिंह ने मामले की जानकारी जुटाई और पुराने रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की। संगठन ने रिकॉर्ड कार्यालय से संपर्क कर पेंशन से जुड़े दस्तावेज खंगाले और आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई। 46 साल बाद मिला यह हक अब पार्वती के बुढ़ापे का सहारा बनेगा।

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दिवंगत सैनिक की पत्नी को पारिवारिक पेंशन दिलाने के लिए पूर्व सैनिक संगठन और उनकी बेटी ने लड़ाई लड़ी। इस लड़ाई में जीत हुई है और सैनिक की पत्नी को उनका हक मिला है। यह पूर्व सैनिक संगठन के लिए गौरव की बात है। पूर्व सैनिक संगठन सैनिकों और उनके आश्रितों के हितों की लड़ाई हमेशा मजबूती से लड़ता रहेगा। -मयूख भट्ट, अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संगठन, पिथौरागढ़
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