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मुवानी घाटी की 3500 नाली जमीन बंजर पड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 09 Dec 2015 10:17 PM IST
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गोबराड़ी से मुवानी के लिए 50 वर्ष पहले बनी सात किलोमीटर लंबी नहर की इस बार सिंचाई विभाग ने मरम्मत ही नहीं की। इस कारण 3500 नाली जमीन में गेहूं की बुआई नहीं हो पाई है। किसान पिछले दो महीने से नहर की मरम्मत की आवाज उठा रहे हैं लेकिन अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। बुधवार को जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार के नेतृत्व में यहां पहुंचे किसानों ने कोई अधिकारी न मिलने पर जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक नरेंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपा। पीडी ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से कहा है कि यदि मरम्मत के लिए धन नहीं है तो मनरेगा की राशि इसमें खर्च की जाए और तत्काल लोगों के खेतों में पानी पहुंचाया जाए।
जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब मानसून सीजन में बंद पड़ी नहर की मरम्मत दिसंबर तक नहीं हो पाई। किसान दो महीने से हल्ला मचा रहे हैं। विभाग ने नहर की मरम्मत नहीं की। यदि मरम्मत का काम कम होता तो गांव के लोग खुद ही इसे पूरा कर लेते लेकिन नहर कई जगह बुरी तरह टूट चुकी है। अब यदि नहर की मरम्मत का काम शुरू भी होता है तो 15 दिन का समय लग जाएगा। तब तक गेहूं बुआई का समय निकल जाएगा। जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार ने कहा है कि यदि विभाग नहर की मरम्मत नहीं करता तो उसे किसानों को नुकसान का मुआवजा देना पड़ेगा। अन्यथा किसान आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
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जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब मानसून सीजन में बंद पड़ी नहर की मरम्मत दिसंबर तक नहीं हो पाई। किसान दो महीने से हल्ला मचा रहे हैं। विभाग ने नहर की मरम्मत नहीं की। यदि मरम्मत का काम कम होता तो गांव के लोग खुद ही इसे पूरा कर लेते लेकिन नहर कई जगह बुरी तरह टूट चुकी है। अब यदि नहर की मरम्मत का काम शुरू भी होता है तो 15 दिन का समय लग जाएगा। तब तक गेहूं बुआई का समय निकल जाएगा। जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार ने कहा है कि यदि विभाग नहर की मरम्मत नहीं करता तो उसे किसानों को नुकसान का मुआवजा देना पड़ेगा। अन्यथा किसान आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
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