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Pithoragarh News: अधिक बर्फबारी से कीड़ाजड़ी ढूंढ़ने में आ रही दिक्कतें

Tue, 27 May 2025 10:05 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Tue, 27 May 2025 10:05 PM IST
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Difficulties in finding wormwood due to excessive snowfall
पिथौरागढ़। सीमांत के लोग कीड़ाजड़ी (यारसा गंबू) का दोहन करने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में डेरा डालकर रह रहे हैं। मौसम चक्र में बदलाव और बुग्यालों में लगातार दो दशकों से अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे दोहन के कारण इस वर्ष यारसा गंबू के उत्पादन में कमी आई है। मौसम खराब होने से 12 हजार फुट से अधिक की ऊंचाई पर जाने वाले ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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तहसील धारचूला, बंगापानी और मुनस्यारी के 20 हजार से अधिक लोग उच्च हिमालयी क्षेत्र के 12 से 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित बुग्यालों में कीड़ाजड़ी लेने जाते हैं। यारसा गंबू के बेहतर उत्पादन के लिए उसे 120 से 160 दिन तक पूरी तरह से बर्फ के अंदर दबे रहना जरूरी तो होता है। इसके बाद मौसम का साथ भी चाहिए होता है लेकिन इस बार बुग्यालों में अब तक बर्फ नहीं पिघली है। अन्य वर्ष मार्च से उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ पिघलना शुरू हो जाती थी। बर्फ पिघलते ही यारसा गंबू से तंतु यानी कीड़ाजड़ी बाहर निकल आती है।
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मौसम चक्र में बदलाव और बुग्यालों में अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे इसके दोहन के कारण पिछले कुछ वर्षों से कीड़ाजड़ी के उत्पादन में भारी गिरावट आई है। इस वर्ष मार्च की शुरुआत से ही हिमपात होने से यारसा गंबू का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ नहीं पिघलने से नौ हजार से 12 हजार फुट से अधिक की ऊंचाई पर पहुंचे ग्रामीण निराश हैं।
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यहां होता है उत्पादन
हिमालयी क्षेत्र की कीड़ाजड़ी के कारोबार से आजीविका चलाने वालों को मौसम चक्र में हुए परिवर्तन ने मुसीबत में डाल दिया है। यारसा गंबू का उत्पादन पिथौरागढ़ जिले के सेला, सुमुदुंग, खर्तो, नागलिंग, बौना, पंचाचूली, राजरंभा, लास्पा, नागनी धूरा, बलाती, छिपलाकेदार, नाजुरी कुंड, चेर्थी, दारमा घाटी के घोड़धाप आदि बुग्यालों में ज्यादा होता है।

कोट
कॉर्डिसेप्स साइनेसिस (कीड़ाजड़ी का वैज्ञानिक नाम) समुद्र तल से 3800 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय क्षेत्र में पाया जाता है। इसके बेहतर उत्पादन के लिए उसे 120 से 160 दिन तक पूरी तरह से बर्फ के अंदर दबे रहना जरूरी होता है। अधिक बर्फबारी से कॉर्डिसेप्स साइनेसिस की प्रजनन अवस्था भी प्रभावित हो सकती है। - डॉ. राकेश वर्मा, विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान, लक्ष्मण सिंह महर परिसर, पिथौरागढ़
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