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चीन सीमा पर निगहबानी कर रहीं बेटियां
ब्यूराे/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 13 Mar 2016 10:09 PM IST
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4वीं बटालियन में शामिल हुईं महिला
- फोटो : अमर उजाला
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देश की बेटियां अब मुनस्यारी से लगी भारत-चीन सीमा की बखूबी निगहबानी करने लगी हैं। वे 8000 फीट की ऊंचाई पर पेट्रोलिंग कर रही हैं, जहां का तापमान माइनस तीन डिग्री है। अभी तो महिला जवानों के साथ एक कमांडर और रूट की पहचान रखने वाले जवानों को भेजा जा रहा है। रूट का अनुभव होने पर वे अपने दम पर पेट्रोलिंग करेंगी। बता दें कि पहली बार 14वीं वाहिनी आईटीबीपी में महिला जवानों को शामिल किया गया है।
इसी 18 फरवरी को पिथौरागढ़ में 14वीं वाहिनी आईटीबीपी में 40 महिला जवान शामिल हुईं। 24 फरवरी को महिला जवानों की तैनाती चीन सीमा के नजदीक मुनस्यारी स्थित चौकी में कर दी गई। महिला जवान हर दो दिन के अंतराल में चीन सीमा के लीलम-रालम दिशा में लिंगनामी तक पेट्रोलिंग कर रही हैं। करीब 28 किमी की पेट्रोलिंग में तीन से चार दिन का समय लगता है। अग्रिम मोर्चों पर भी महिला जवान बखूबी अपनी ड्यूटी निभा रहीं हैं।
आईटीबीपी की पिथौरागढ़ बटालियन के स्थापना वर्ष 1989 के बाद पहला मौका है जब वाहिनी को जीडी कैडर की महिला जवान मिली हैं। अन्य बटालियनों में महिला जवानों की तैनाती वर्ष 2013 से है। बटालियन के कमांडेंट रणवीर सिंह कहते हैं कि वर्ष 2013 में महिलाओं की अलग से बटालियन बनाने की मंशा से भर्तियां की गई थीं। कुछ कारणों से अलग से बटालियन का गठन नहीं हो पाया। बाद में महिला जवानों को अन्य बटालियनों में तैनाती दे दी गई।
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इसी 18 फरवरी को पिथौरागढ़ में 14वीं वाहिनी आईटीबीपी में 40 महिला जवान शामिल हुईं। 24 फरवरी को महिला जवानों की तैनाती चीन सीमा के नजदीक मुनस्यारी स्थित चौकी में कर दी गई। महिला जवान हर दो दिन के अंतराल में चीन सीमा के लीलम-रालम दिशा में लिंगनामी तक पेट्रोलिंग कर रही हैं। करीब 28 किमी की पेट्रोलिंग में तीन से चार दिन का समय लगता है। अग्रिम मोर्चों पर भी महिला जवान बखूबी अपनी ड्यूटी निभा रहीं हैं।
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आईटीबीपी की पिथौरागढ़ बटालियन के स्थापना वर्ष 1989 के बाद पहला मौका है जब वाहिनी को जीडी कैडर की महिला जवान मिली हैं। अन्य बटालियनों में महिला जवानों की तैनाती वर्ष 2013 से है। बटालियन के कमांडेंट रणवीर सिंह कहते हैं कि वर्ष 2013 में महिलाओं की अलग से बटालियन बनाने की मंशा से भर्तियां की गई थीं। कुछ कारणों से अलग से बटालियन का गठन नहीं हो पाया। बाद में महिला जवानों को अन्य बटालियनों में तैनाती दे दी गई।
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