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Pithoragarh News: हिंदी के लिए बड़ी-बड़ी बातें, पढ़ाने वाला कोई नहीं
Fri, 11 Oct 2024 10:29 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 11 Oct 2024 10:29 PM IST
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पिथौरागढ़। जिले के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में हिंदी पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है। हिंदी पढ़ाने वाले प्रवक्ताओं के 74 और एलटी संवर्ग के 90 पद लंबे समय से रिक्त हैं। स्कूलों में शिक्षक नहीं होने से हाईस्कूल और इंटर में पढ़ रहे बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
पिथौरागढ़ जिले के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में हिंदी भाषा को सिखाने के लिए शिक्षक का टोटा है। यहां 128 इंटरमीडिएट कॉलेज और 87 हाईस्कूल हैं। इन विद्यालयों में करीब 15 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को हिंदी विषय पढ़ाने वाले प्रवक्ताओं के 74 और एलटी संवर्ग के 90 पदों पर शिक्षक नहीं हैं। यहां तक कि कई स्कूलों में दूसरे विषयों के शिक्षक हिंदी पढ़ा रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हाल जिले के दुर्गम क्षेत्र डीडीहाट, धारचूला, मुनस्यारी, बंगापानी और गंगोलीहाट में बनी हुई हैं। छात्र संख्या अच्छी होने के बावजूद भी इन विद्यालयों में कहीं एक तो कहीं दो शिक्षक विद्यालय को संचालित कर रहे हैं।
विकासखंड धारचूला के राइंका बरम में हिंदी के प्रवक्ता के अलावा एलटी में भी शिक्षक नहीं है। इस विद्यालय में छह से 12 वीं तक 300 से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई कराने के लिए केवल पांच शिक्षक तैनात हैं। यही हाल जिले के कई विद्यालयों का है जहां पर एक शिक्षक के भरोसे विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। स्कूलों में हिंदी के शिक्षक नहीं होने से हाईस्कूल और इंटर में पढ़ रहे बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
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इनसेट कोट
सरकारी कॉलेजों में हिंदी और अन्य विषयों के खाली पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए पद भरे जाने सहित अन्य माध्यमों से वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। - एचआर कोहली, सीईओ, पिथौरागढ़।
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पिथौरागढ़ जिले के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में हिंदी भाषा को सिखाने के लिए शिक्षक का टोटा है। यहां 128 इंटरमीडिएट कॉलेज और 87 हाईस्कूल हैं। इन विद्यालयों में करीब 15 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को हिंदी विषय पढ़ाने वाले प्रवक्ताओं के 74 और एलटी संवर्ग के 90 पदों पर शिक्षक नहीं हैं। यहां तक कि कई स्कूलों में दूसरे विषयों के शिक्षक हिंदी पढ़ा रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हाल जिले के दुर्गम क्षेत्र डीडीहाट, धारचूला, मुनस्यारी, बंगापानी और गंगोलीहाट में बनी हुई हैं। छात्र संख्या अच्छी होने के बावजूद भी इन विद्यालयों में कहीं एक तो कहीं दो शिक्षक विद्यालय को संचालित कर रहे हैं।
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विकासखंड धारचूला के राइंका बरम में हिंदी के प्रवक्ता के अलावा एलटी में भी शिक्षक नहीं है। इस विद्यालय में छह से 12 वीं तक 300 से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई कराने के लिए केवल पांच शिक्षक तैनात हैं। यही हाल जिले के कई विद्यालयों का है जहां पर एक शिक्षक के भरोसे विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। स्कूलों में हिंदी के शिक्षक नहीं होने से हाईस्कूल और इंटर में पढ़ रहे बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
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सरकारी कॉलेजों में हिंदी और अन्य विषयों के खाली पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए पद भरे जाने सहित अन्य माध्यमों से वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। - एचआर कोहली, सीईओ, पिथौरागढ़।