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मुफलिसी में संचालित हो रहे गरीबों के स्कूल

Sat, 15 Jul 2017 10:43 PM IST
Updated Sat, 15 Jul 2017 10:43 PM IST
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मुफलिसी में संचालित हो रहे गरीबों के स्कूल
नाचनी (पिथौरागढ़)। कभी सबको शिक्षा देने वाले सरकारी स्कूल अब गरीबों के स्कूल साबित होकर रह गए हैं। गरीबों के ये स्कूलों बेहद मुफलिसी में संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में सरकार न बैठने के लिए कुर्सी दे पा रही हैै, न भवन और नहीं शिक्षक। सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि फर्नीचर की व्यवस्था के लिए हाइकोर्ट तक को आदेश देने पड़े हैं। राजकीय इंटर कॉलेज नाचनी भी उन्हीं अभावग्रस्त स्कूलों में शामिल है। स्थापना के 39 साल बाद भी इंटर कॉलेज का अपना भवन नहीं है। हाइस्कूल के 47 साल पुराने जर्जर भवन में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। जीआईसी के विद्यार्थी टाट-पट्टी पर बैठते हैं। पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं। प्रशासनिक व्यवस्था के लिए प्रधानाचार्य की भी तैनाती नहीं है।
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वर्ष 1978 में खुला राजकीय इंटर कॉलेज नाचनी शुरुआत से ही हाइस्कूल के भवन में संचालित हो रहा है। वर्ष 1970 में बना हाइस्कूल का भवन जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। भवन के प्रथम तल के सात कमरों में पानी टपकता है। इन कमरों में कक्षाओं का संचालन नहीं होता है। भूतल सात कमरों के साथ ही चार अतिरिक्त कक्षों में कक्षाओं का संचालन होता है। अतिरिक्त कक्षों की हालत बेहद खराब है। स्कूल में फर्नीचर की भी भारी कमी है। स्कूल में 450 विद्यार्थी पढ़ते हैं। फर्नीचर 300 के लिए ही है। 150 विद्यार्थी टाट-पट्टी पर बैठने को मजबूर हैं। इंटर में गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी, राजनीति विज्ञान के प्रवक्ताओं के पद लंबे समय से रिक्त हैं।
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सामाजिक कार्यकर्ता हरीश बथियाल बताते हैं कि जीआईसी के नाम भूमि भी नहीं थी। वर्ष 2016 में ही विद्यालय को भूमि आवंटित हुई है। लगातार मांग के बाद भी स्कूल भवन के लिए धन नहीं दिया जा रहा। शिक्षकों की तैनाती नहीं की जा रही है। व्यवस्थाओं की कमी से लोग अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की इसी स्कूल में बच्चे पढ़ाना मजबूरी है। प्रभारी प्रधानाचार्य जीआर आर्या कहते हैं कि भवन, फर्नीचर, प्रवक्ताओं की मांग की गई है। एक बार फिर मांग की जा रही है।
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जीआईसी सैंणराथी में एक भी प्रवक्ता नहीं, 24 ने नाम कटवाया
वर्ष 2014 में खुले जीआईसी सैंणराथी में इंटर की कक्षाओं को पढ़ाने के लिए एक भी प्रवक्ता तैनात नहीं है। शिक्षक न होने से इस बार कक्षा 11, 12 के 24 विद्यार्थियों ने विद्यालय से नाम कटा लिया। सैंणराथी के इन विद्यार्थियों ने आठ किमी दूर जीआईसी डोर में प्रवेश लिया है। वर्ष 2016 में अतिथि शिक्षक तैनात थे। पढ़ाई अच्छी हो रही थी। 205 विद्यार्थी वाले इस सरकारी इंटर कॉलेज की खराब होती दशा से अभिभावक भारी तनाव में हैं। क्षेत्र के लोग अपने बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि अब स्कूल से बच्चों को अन्यत्र स्कूल में दाखिल कराना ही विकल्प रह गया है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अन्य स्कूलों में दाखिला कराने में सक्षम नहीं है।


जीआईसी नाचनी और सैंणराथी की समस्याओं के निराकरण के लिए निदेशालय को पत्र भेजा जा रहा है दोनों स्थानों पर शिक्षकों की तैनाती के प्रयास किए जाएंगे। -गणेश प्रसाद कोहली, प्रभारी मुख्य शिक्षाधिकारी, पिथौरागढ़।
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