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आरटीए की अनुमति मिले बगैर वाहनों का संचालन
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:03 PM IST
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पिथौरागढ़। जिले में कई सड़कें ऐसी हैं, जिनमें क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की अनुमति मिले बगैर वाहनों का संचालन हो रहा है। लंबे समय से ऐसी सड़कों पर वाहन संचालित हो रहे हैं। हालांकि इन सड़कों की मरम्मत, देखरेख का काम निर्माण एजेंसियां कर रही हैं, लेकिन आरटीए की अनुमति मिले बगैर वाहनों के संचालन पर परिवहन विभाग ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है। यदि ऐसी सड़कों पर कोई हादसा हो जाए तो कई तरह की तकनीकी दिक्कतें आती हैं और मृतकों तथा घायलों को मुआवजा राशि दिलाने में भी अड़चन पैदा हो जाती है।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) नवीन सिंह का कहना है कि नियमानुसार जब किसी सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो जाता है तो निर्माण करने वाले विभाग को सबसे पहले वाहन संचालन के लिए आरटीए को आवेदन करना होता है। अक्सर यह देखा गया है कि सड़क का निर्माण पूरा होते ही इलाके के लोग वाहनों का संचालन करने लग जाते हैं और उनको आरटीए से अनुमति का पता नहीं रहता।
उन्होंने बताया कि अब लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को इस आशय का पत्र दे दिया गया है कि वह ऐसी सड़कों पर बोर्ड लगाएं और सड़क के आरटीए से पास न होने की जानकारी दें। उन्होंने यह भी बताया कि सड़कों पर वाहन संचालन के लिए आरटीए से अनुमति लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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इन सड़कों को नहीं है आरटीए की अनुमति
पिथौरागढ़। जिले की कई सड़कों को आरटीए की अनुमति नहीं है, लेकिन उनमें वाहनों का संचालन हो रहा है। इनमें तवाघाट-नारायणआश्रम सड़क भी शामिल है। इस सड़क से कैलाश मानसरोवर यात्रियों के दल जाते हैं। इसके अलावा झूलाघाट-तालेश्वर, बड़ावे-शिलिंग्या, बडारी-कांटेबोरा, मुवानी-गोबराड़ी, चर्मा-लखतीगांव, मदकोट-बोना, बलुवाकोट-पय्यांपौड़ी, नाचनी-बांसबगड़ सड़क को आरटीए की अनुमति नहीं मिली है, लेकिन इन सभी सड़कों पर वर्षों से वाहनों का संचालन हो रहा है।
सड़क सुरक्षा की बैठक में आज उठेगा मुद्दा
पिथौरागढ़। एआरटीओ नवीन सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी सी रविशंकर की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में आरटीए से अनुमति मिले बगैर वाहन संचालन वाली सड़कों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी से आग्रह किया जाएगा कि तैयार हो चुकी सड़कों को आरटीए से जल्दी अनुमति दिलाने का प्रयास करें, ताकि तकनीकी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
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सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) नवीन सिंह का कहना है कि नियमानुसार जब किसी सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो जाता है तो निर्माण करने वाले विभाग को सबसे पहले वाहन संचालन के लिए आरटीए को आवेदन करना होता है। अक्सर यह देखा गया है कि सड़क का निर्माण पूरा होते ही इलाके के लोग वाहनों का संचालन करने लग जाते हैं और उनको आरटीए से अनुमति का पता नहीं रहता।
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उन्होंने बताया कि अब लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को इस आशय का पत्र दे दिया गया है कि वह ऐसी सड़कों पर बोर्ड लगाएं और सड़क के आरटीए से पास न होने की जानकारी दें। उन्होंने यह भी बताया कि सड़कों पर वाहन संचालन के लिए आरटीए से अनुमति लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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इन सड़कों को नहीं है आरटीए की अनुमति
पिथौरागढ़। जिले की कई सड़कों को आरटीए की अनुमति नहीं है, लेकिन उनमें वाहनों का संचालन हो रहा है। इनमें तवाघाट-नारायणआश्रम सड़क भी शामिल है। इस सड़क से कैलाश मानसरोवर यात्रियों के दल जाते हैं। इसके अलावा झूलाघाट-तालेश्वर, बड़ावे-शिलिंग्या, बडारी-कांटेबोरा, मुवानी-गोबराड़ी, चर्मा-लखतीगांव, मदकोट-बोना, बलुवाकोट-पय्यांपौड़ी, नाचनी-बांसबगड़ सड़क को आरटीए की अनुमति नहीं मिली है, लेकिन इन सभी सड़कों पर वर्षों से वाहनों का संचालन हो रहा है।
सड़क सुरक्षा की बैठक में आज उठेगा मुद्दा
पिथौरागढ़। एआरटीओ नवीन सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी सी रविशंकर की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में आरटीए से अनुमति मिले बगैर वाहन संचालन वाली सड़कों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी से आग्रह किया जाएगा कि तैयार हो चुकी सड़कों को आरटीए से जल्दी अनुमति दिलाने का प्रयास करें, ताकि तकनीकी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।