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विरोध के पीछे पंचायत से मिलने वाली सुविधा बंद होने का डर

Mon, 17 Jul 2017 11:07 PM IST
Updated Mon, 17 Jul 2017 11:07 PM IST
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विरोध के पीछे पंचायत से मिलने वाली सुविधा बंद होने का डर
प्रदेश के शहरी विकास मंत्रालय के आवास अनुभाग ने पिथौरागढ़ तहसील के जिन 24 राजस्व गांवों को प्रस्तावित नगर निगम में शामिल करने का फैसला लिया है उसके विरोध के पीछे यही तर्क है कि इन गांवों को ग्राम पंचायत और विकासखंड कार्यालय से मिलने वाली सुविधाएं बंद हो जाएंगी। नगर निगम में शामिल होने से उन करों का बोझ बढ़ जाएगा। इस मुद्दे को लेकर अब तीन बार इन गांवों के लोग आंदोलन कर चुके हैं और भविष्य में भी आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया गया है। प्रदेश सरकार ने नगर निगम गठित करने के बाद उसमें आसपास के गांवों को शामिल करने का फैसला लिया है। हालांकि अभी तक सरकार ने आपत्तियां मांगने के लिए अधिसूचना जारी नहीं की है लेकिन शामिल होने वाले गांवों के नाम तय कर दिए हैं।
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प्रदेश के मुख्य सचिव एमएस खान ने जिन गांवों को शामिल करने संबंधी प्रस्ताव तैयार किया है उनमें पपदेव, बजेटी, चंडाक, पुनेड़ीमहर, सिल्पाटा, धनौड़ा, नेड़ा, बस्ते, पंडा, सुजई, ओड़माथा, नैनीसैनी, मखोलियागांव, देवलालगांव, दौला, चैंसर, गैठना, किरीगांव, ऐंचोली, दाड़िमखोला, टकाड़ी, हुड़ेती, पौण और कासनी का नाम है। इन सभी गांवों में इस समय ग्राम पंचायतें हैं। त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था के तहत इन गांवों में प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य का चुनाव होता है। नगर निगम में शामिल होने के बाद पंचायतों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इन गांवों से सभासद चुने जाएंगे और वही गांव का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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लोगों का कहना है कि नगर निगम के अधीन आने पर छोटे व्यवसाय में तहबाजारी, भवन कर, स्वच्छता कर लोगों को देना पड़ जाएगा। नगर निगम के अधीन आने पर विकास के लिए मिलने वाले बजट में भी कमी आ जाएगी। पूर्व विधायक मयूख महर का कहना है कि 1994 में इन गांवों को वर्तमान नगरपालिका में शामिल करने का प्रस्ताव लाया गया था। इसके विरोध में उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस याचिका का अब तक निस्तारण नहीं हुआ है।
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कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विरोध कर रहे ग्राम प्रधानों का पूरा साथ दिया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत का कहना है कि नगर निगम में शामिल होने के बाद गांवों की पंचायती व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और लोगों की मुसीबत बढ़ने लगेगी। इस संबंध में भाजपा का तर्क अलग है। भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र वल्दिया का कहना है कि जिस हिसाब से गांवों की आबादी बढ़ रही है और संसाधनों की कमी हो रही है, उसकी पूर्ति ग्राम पंचायत की मद से कर पाना संभव नहीं है। नगर निगम बनने पर गांवों का विकास होगा और गांवों को नगरीय सुविधाएं मिलने लगेंगी।
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