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नगर निगम में शामिल करने के विरोध में आंदोलन की सुगबुगाहट
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:03 PM IST
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ नगरपालिका को उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा देने का विरोध होने लगा है। निगम में शामिल किए जाने वाले गांवों के लोगों का कहना है कि नगर निगम बनने के बाद गांवों में त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और गांवों में नगर निगम के करों का बोझ बढ़ जाएगा। इन गांवों के लोग नगर निगम में शामिल होने के खिलाफ आपत्तियां दर्ज करने की तैयारी में हैं। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार के फैसले के विरोध का निर्णय लिया है।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने एक माह पहले पिथौरागढ़ नगरपालिका को उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा देने का ऐलान किया है। साथ ही नगर निगम में पिथौरागढ़ नगर के आसपास के 24 गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है। नगरपालिका के माध्यम से इन गांवों की आबादी, ढांचागत सुविधाओं की जानकारी शहरी विकास मंत्रालय ने अपने पास मंगा ली है। अब शहरी विकास मंत्रालय आपत्तियों को मांगेगा और उसके बाद नगर निगम के गठन की अधिसूचना जारी हो जाएगी।
एकतरफा फैसला हुआ तो विरोध होगा
पौण गांव के क्षेत्र पंचायत सदस्य गजेंद्र वल्दिया का कहना है कि सरकार को नगर निगम में शामिल करने का प्रस्ताव बनाने से पहले गांव के लोगों की राय ली जानी चाहिए थी। यदि इतने बड़े फैसले को सरकार एकतरफा लागू करेगी तो उसे बड़े आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि गांव के लोग नगर निगम में शामिल नहीं होंगे।
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गांवों का अस्तित्व समाप्त करने की कोशिश
दौला के प्रधान भूपेश नगरकोटी का कहना है कि सरकार गांवों का अस्तित्व समाप्त करने का प्रयास कर रही है। जो लोग इस समय नगरपालिका के अधीन हैं, उनको ही कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। गांवों को शामिल करने पर विकास की उम्मीद करना संभव नहीं होगा। वह कहते हैं कि इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
नगर का हिस्सा बनाने के पीछे क्या तर्क
तड़ीगांव निवासी हयात चंद का कहना है कि सरकार शहर में रहने वालों को तो सुविधा नहीं दे पा रही है। अब गांवों को शामिल कर वह नई परेशानी खड़ी करने की तैयारी में है। सरकार यह भी तो बताए कि गांवों को नगर का हिस्सा बनाने के पीछे उसका तर्क क्या है। वह विकास का मापदंड बताए, लोगों को नगर निगम में शामिल होने के फायदे समझाए।
गांवों के विकास की नई बात सोचें
नैनीसैनी के प्रधान महेंद्र सिंह ने कहा कि उनका गांव नगर निगम का हिस्सा नहीं बनेगा। गांव के लोग अपने सिर पर करों का बोझ डालने की तैयारी में नहीं हैं। यदि सरकार और प्रशासन के स्तर से जिद की होती है तो गांव के लोग भी बड़े विरोध के लिए कमर कस लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों के विकास के लिए नई बात सोचे।
लोगों के विरोध को नजरअंदाज न किया जाए
ओड़माथा के प्रधान हरीश प्रसाद का कहना है कि सरकार को लोगों के विरोध को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गांव के लोग किसी आशंका से ही नगर निगम में शामिल होने का विरोध कर रहे हैं। यह मामला जिद का नहीं, वरन आपसी बातचीत से सुलझाने वाला है। जब गांव के लोग नगर निगम में शामिल होना ही नहीं चाहते तो फिर सरकार को फैसला वापस लेना चाहिए।
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बता दें कि प्रदेश सरकार ने एक माह पहले पिथौरागढ़ नगरपालिका को उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा देने का ऐलान किया है। साथ ही नगर निगम में पिथौरागढ़ नगर के आसपास के 24 गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है। नगरपालिका के माध्यम से इन गांवों की आबादी, ढांचागत सुविधाओं की जानकारी शहरी विकास मंत्रालय ने अपने पास मंगा ली है। अब शहरी विकास मंत्रालय आपत्तियों को मांगेगा और उसके बाद नगर निगम के गठन की अधिसूचना जारी हो जाएगी।
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एकतरफा फैसला हुआ तो विरोध होगा
पौण गांव के क्षेत्र पंचायत सदस्य गजेंद्र वल्दिया का कहना है कि सरकार को नगर निगम में शामिल करने का प्रस्ताव बनाने से पहले गांव के लोगों की राय ली जानी चाहिए थी। यदि इतने बड़े फैसले को सरकार एकतरफा लागू करेगी तो उसे बड़े आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि गांव के लोग नगर निगम में शामिल नहीं होंगे।
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गांवों का अस्तित्व समाप्त करने की कोशिश
दौला के प्रधान भूपेश नगरकोटी का कहना है कि सरकार गांवों का अस्तित्व समाप्त करने का प्रयास कर रही है। जो लोग इस समय नगरपालिका के अधीन हैं, उनको ही कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। गांवों को शामिल करने पर विकास की उम्मीद करना संभव नहीं होगा। वह कहते हैं कि इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
नगर का हिस्सा बनाने के पीछे क्या तर्क
तड़ीगांव निवासी हयात चंद का कहना है कि सरकार शहर में रहने वालों को तो सुविधा नहीं दे पा रही है। अब गांवों को शामिल कर वह नई परेशानी खड़ी करने की तैयारी में है। सरकार यह भी तो बताए कि गांवों को नगर का हिस्सा बनाने के पीछे उसका तर्क क्या है। वह विकास का मापदंड बताए, लोगों को नगर निगम में शामिल होने के फायदे समझाए।
गांवों के विकास की नई बात सोचें
नैनीसैनी के प्रधान महेंद्र सिंह ने कहा कि उनका गांव नगर निगम का हिस्सा नहीं बनेगा। गांव के लोग अपने सिर पर करों का बोझ डालने की तैयारी में नहीं हैं। यदि सरकार और प्रशासन के स्तर से जिद की होती है तो गांव के लोग भी बड़े विरोध के लिए कमर कस लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों के विकास के लिए नई बात सोचे।
लोगों के विरोध को नजरअंदाज न किया जाए
ओड़माथा के प्रधान हरीश प्रसाद का कहना है कि सरकार को लोगों के विरोध को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गांव के लोग किसी आशंका से ही नगर निगम में शामिल होने का विरोध कर रहे हैं। यह मामला जिद का नहीं, वरन आपसी बातचीत से सुलझाने वाला है। जब गांव के लोग नगर निगम में शामिल होना ही नहीं चाहते तो फिर सरकार को फैसला वापस लेना चाहिए।