{"_id":"596e465f4f1c1ba05d8b46bd","slug":"131500399199-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महाकाली की आवाज उठाएगा विस्थापितों के मुद्दे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महाकाली की आवाज उठाएगा विस्थापितों के मुद्दे
Updated Tue, 18 Jul 2017 11:03 PM IST
विज्ञापन
पिथौरागढ़। भारत और नेपाल के सहयोग से बनने वाले पंचेश्वर बांध से प्रभावित लोगों ने ‘महाकाली की आवाज’ नाम से संगठन बनाकर बांध से प्रभावित होने वाले लोगों के सवाल उठाने का निर्णय लिया है। संगठन ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में विस्थापन का मुद्दा उठाया है।
संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत के नेतृत्व में जिलाधिकारी सी रविशंकर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में कहा है कि बांध को लेकर हो-हल्ला खूब किया जा रहा है, लेकिन परियोजना की नई डीपीआर तक नहीं बनी है। कहा है कि दशकों पहले डूब क्षेत्र चिन्हित किया गया था। उसके बाद परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। आज एक बार फिर बांध निर्माण की कवायद चल रही है तो डूब क्षेत्र चिन्हित नहीं किया जा रहा है। बांध प्रभावितों के लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आ रही है। प्रभावितों को सरकार एक साथ सुगम स्थानों पर बसा पाएगी, इस प्रश्न का उत्तर लोग चाहते हैं।
कहा है कि 315 मीटर का ऊंचा बांध बनता है तो नदी, घाटी से लगी 80,000 की आबादी इससे प्रभावित होगी। बांध बनने से भारत-नेपाल के बीच चलने वाला व्यापार प्रभावित होगा। भारत और नेपाल के बीच विवाह संबंध होते हैं। यह रिश्ते प्रभावित हो जाएंगे। ज्ञापन देने वालों में ललित पाल, कुंडल महर आदि शामिल थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत के नेतृत्व में जिलाधिकारी सी रविशंकर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में कहा है कि बांध को लेकर हो-हल्ला खूब किया जा रहा है, लेकिन परियोजना की नई डीपीआर तक नहीं बनी है। कहा है कि दशकों पहले डूब क्षेत्र चिन्हित किया गया था। उसके बाद परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। आज एक बार फिर बांध निर्माण की कवायद चल रही है तो डूब क्षेत्र चिन्हित नहीं किया जा रहा है। बांध प्रभावितों के लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आ रही है। प्रभावितों को सरकार एक साथ सुगम स्थानों पर बसा पाएगी, इस प्रश्न का उत्तर लोग चाहते हैं।
विज्ञापन
कहा है कि 315 मीटर का ऊंचा बांध बनता है तो नदी, घाटी से लगी 80,000 की आबादी इससे प्रभावित होगी। बांध बनने से भारत-नेपाल के बीच चलने वाला व्यापार प्रभावित होगा। भारत और नेपाल के बीच विवाह संबंध होते हैं। यह रिश्ते प्रभावित हो जाएंगे। ज्ञापन देने वालों में ललित पाल, कुंडल महर आदि शामिल थे।
विज्ञापन