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एक महीने तक चलेगा हरेला पर्व
Updated Wed, 12 Jul 2017 10:59 PM IST
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पिथौरागढ़। जिला प्रशासन ने हरेला पर्व पर इस बार भी बृहद पौधरोपण कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष हरेला की थीम नदियों का संरक्षण एवं पुनर्जीवन रखा गया है। रई गधेरे को यशवती नदी नाम देने के साथ ही पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया है।
जिलाधिकारी ने बुधवार को विभिन्न विभागों, संगठनों, विद्यालयों के प्रतिनिधियों, के साथ बैठक कर हरेला कार्यक्रम की रूपरेखा तय की। लोगों ने कहा कि नगर के रई गधेरे का पुरातन नाम यशवती नदी था। उसका वही नाम रखा जाना चाहिए, जिसे मान लिया गया। निर्णय लिया गया कि 16 जुलाई से 15 अगस्त तक हरेला पर्व का आयोजन किया जाएगा। एक महीने तक चलने वाले कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के सहयोग से पौधरोपण किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा यशवती नदी को संरक्षित और पुनर्जीवित करने के लिए जनभागिता की आवश्यकता होगी। तय हुआ कि नदी के आसपास पौधरोपण करने के साथ ही साफ-सफाई कराई जाएगी। इसके लिए ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, वार्ड मेंबरों, गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक समिति का गठन किया जाएगा। यशवती नदी को विभिन्न जोन में बांटकर यह काम किया जाएगा। नदी के स्रोत से लेकर अंत तक सफाई अभियान चलेगा।
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पौधे वन विभाग उपलब्ध कराएगा। 13 जुलाई को विभिन्न विभागों के अधिकारी नदी क्षेत्र का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। पूर्व दर्जा मंत्री महेंद्र लुंठी ने आसपास के गांवों के लोगों को इस अभियान से जोड़ने का सुझाव दिया। बैठक में डीएफओ विनय भार्गव, हरेला, हिमाल संस्था के पदाधिकारी भी मौजूद थे।
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जिलाधिकारी ने बुधवार को विभिन्न विभागों, संगठनों, विद्यालयों के प्रतिनिधियों, के साथ बैठक कर हरेला कार्यक्रम की रूपरेखा तय की। लोगों ने कहा कि नगर के रई गधेरे का पुरातन नाम यशवती नदी था। उसका वही नाम रखा जाना चाहिए, जिसे मान लिया गया। निर्णय लिया गया कि 16 जुलाई से 15 अगस्त तक हरेला पर्व का आयोजन किया जाएगा। एक महीने तक चलने वाले कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के सहयोग से पौधरोपण किया जाएगा।
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जिलाधिकारी ने कहा यशवती नदी को संरक्षित और पुनर्जीवित करने के लिए जनभागिता की आवश्यकता होगी। तय हुआ कि नदी के आसपास पौधरोपण करने के साथ ही साफ-सफाई कराई जाएगी। इसके लिए ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, वार्ड मेंबरों, गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक समिति का गठन किया जाएगा। यशवती नदी को विभिन्न जोन में बांटकर यह काम किया जाएगा। नदी के स्रोत से लेकर अंत तक सफाई अभियान चलेगा।
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पौधे वन विभाग उपलब्ध कराएगा। 13 जुलाई को विभिन्न विभागों के अधिकारी नदी क्षेत्र का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। पूर्व दर्जा मंत्री महेंद्र लुंठी ने आसपास के गांवों के लोगों को इस अभियान से जोड़ने का सुझाव दिया। बैठक में डीएफओ विनय भार्गव, हरेला, हिमाल संस्था के पदाधिकारी भी मौजूद थे।