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Pauri News: नियमितिकरण के लिए कार्यबहिष्कार पर डटे उपनल कर्मचारी
Wed, 14 Feb 2024 04:42 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Wed, 14 Feb 2024 04:42 PM IST
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फोटो
पौड़ी/थलीसैंण। मानदेय में 40 फीसदी बढ़ोतरी, समान कार्य के लिए समान वेतन व नियमितिकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर उपनल कार्मिकों का कार्यबहिष्कार तीसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को विभिन्न विभागों में कार्यरत उपनल कर्मियों ने दफ्तरों से दूरी बनाए रखी। कहा कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
थलीसैंण धरना स्थल पर आयोजित सभा में उपनल कर्मचारी आशीष ने कहा कि उपनल के माध्यम से जल निगम में कार्य करते हुए करीब 20 साल हो चुके हैं। यदि हमें समान कार्य के लिए समान मानदेय नहीं मिलेगा तो परिवार का भरण पोषण कैसे होगा। अरविंद अण्थवाल ने कहा कि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो परिवार कैसे चलेगा। लक्ष्मण सिंह नेगी ने कहा कि 17 साल से सरकारी दफ्तर में कार्यरत हूं। अब रोजगार का कोई विकल्प नहीं बचा। किसी भी सरकारी सेवा की परीक्षा देने की उम्र भी नहीं बची। इस मौके पर अंजू नेगी, अनिल पोखरियाल, सुशांत धस्माना, सुरेंद्र सिंह, सावित्री, अनिल कुमार, नरेश चंद्र, अनिल ध्यानी, रमेश सिंह, आनंदमणि पोखरियाल, धर्म सिंह, ललित मोहन ममगाईं, चंद्रमोहन सिंह, मनवर सिंह आदि शामिल रहे। संवाद
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पौड़ी/थलीसैंण। मानदेय में 40 फीसदी बढ़ोतरी, समान कार्य के लिए समान वेतन व नियमितिकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर उपनल कार्मिकों का कार्यबहिष्कार तीसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को विभिन्न विभागों में कार्यरत उपनल कर्मियों ने दफ्तरों से दूरी बनाए रखी। कहा कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
थलीसैंण धरना स्थल पर आयोजित सभा में उपनल कर्मचारी आशीष ने कहा कि उपनल के माध्यम से जल निगम में कार्य करते हुए करीब 20 साल हो चुके हैं। यदि हमें समान कार्य के लिए समान मानदेय नहीं मिलेगा तो परिवार का भरण पोषण कैसे होगा। अरविंद अण्थवाल ने कहा कि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो परिवार कैसे चलेगा। लक्ष्मण सिंह नेगी ने कहा कि 17 साल से सरकारी दफ्तर में कार्यरत हूं। अब रोजगार का कोई विकल्प नहीं बचा। किसी भी सरकारी सेवा की परीक्षा देने की उम्र भी नहीं बची। इस मौके पर अंजू नेगी, अनिल पोखरियाल, सुशांत धस्माना, सुरेंद्र सिंह, सावित्री, अनिल कुमार, नरेश चंद्र, अनिल ध्यानी, रमेश सिंह, आनंदमणि पोखरियाल, धर्म सिंह, ललित मोहन ममगाईं, चंद्रमोहन सिंह, मनवर सिंह आदि शामिल रहे। संवाद
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