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Pauri News: बारिश से आलू, राजमा और लाल धान की फसल खराब होने का खतरा

Sat, 14 Sep 2024 02:58 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2024 02:58 AM IST
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There is a danger of potato, kidney bean and red rice crops getting damaged due to rain
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IIकृषि अधिकारी ने कहा धान के लिए उचित नहीं है यह बारिश
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Iजनपद में रुक-रुककर लगातार हो रही बारिश ने काश्तकारों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के चलते भटवाड़ी प्रखंड में आलू और राजमा की फसल खराब होने का खतरा बना हुआ है। उधर, पुरोला क्षेत्र में भी काश्तकारों को लाल धान सहित अन्य प्रजाति के धान की फसल खराब होने का डर सताने लगा है। काश्तकारों का कहना है कि मानसून के बाद इन दिनों धान की फसल के लिए धूप आवश्यक होती है।
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Iभटवाड़ी विकासखंड में आलू, राजमा काश्तकारों की मुख्य फसल है। लेकिन यहां लगातार जारी बारिश से इन फसलों के साथ दलहन फसलें खराब होने का खतरा बना हुआ है। रैथल गांव के काश्तकार नौबर सिंह पंवार का कहना है कि यदि बारिश इसी प्रकार होती रही तो आलू और राजमा की फसल खराब हो जाएगी। इससे काश्तकारों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
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Iउधर, रवांई घाटी का रामा सिरांई-कमल सिरांई सहित मोरी का गड्डूगाड, सिगतूर पट्टी लाल चावल उत्पादन में एक अपनी अलग पहचान रखता है। इसके साथ की काश्तकार यहां अन्य प्रजाति देशी नाज, चाइना धान और भाद्राइयां का उत्पादन भी करते हैं। क्षेत्र के श्यालिक राम नौटियाल, रमेश असवाल, हकूमत सिंह, राजपाल पंवार, राजेंद्र रावत, सोवेंद्र पंवार का कहना है कि लाल धान की फसल अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में पककर तैयार हो जाती है।
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Iअन्य धान सितंबर के अंत में पककर तैयार हो जाता है। इसलिए मानसून के बाद सितंबर में इनके लिए धूप आवश्यक होती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से धान की फसल के खराब होने का डर सता रहा है।

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Iवहीं अगर लाल धान की फसल खराब होती है। तो इससे सैकड़ों काश्तकारों की आजीविका पर भी बुरा असर पड़ेगा। इस संबंध में क्षेत्रीय कृषि अधिकारी पूजा नौटियाल ने बताया कि इस समय धान के लिए यह बारिश बिल्कुल भी उचित नहीं है। फसल को बचाने के लिए किसानों को अपने खेतों में पानी की निकासी के लिए नालियां बनानी चाहिए।I
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