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Pauri News: बुजुर्ग महिला ने मुआवजे के लिए नौ साल तक लड़ी लड़ाई
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IIपुश्तैनी भूमि के एवज में नौ साल बाद मुआवजा मिलने पर खुशी से छलक उठे आंसू
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Iमुआवजा भुगतान पाने के लिए एक बुजुर्ग महिला को नौ साल तक एडिया रंगनी पड़ी। कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने के बाद इन्साफ मिलने के बाद खुशी से बुजुर्ग महिला के आंसू छलक पड़े। पुश्तैनी भूमि के एवज में 36 लाख का मुआवजा भुगतान मिलने पर अधिकारियों का आभार जताया।
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Iचंबा ब्लॉक के साबली गांव निवासी राम प्रसाद बहुगुणा का 2006 में निधन हो गया था। पति के निधन के बाद सुशीला देवी अपनी बेटियों के साथ देहरादून में रहने चले गई थीं। साबली के थान के समीप उनकी पुश्तैनी भूमि थी। 2016 में उक्त भूमि ऑल वेदर परियोजना के लिए अधिग्रहण की गई।
I
Iसुशील देवी के गांव में न रहने पर उक्त भूमि पर अन्य लोगों ने अपना अधिकार बताते हुए मुआवजा भुगतान पाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। समाचार पत्रों में अधिग्रहण की गई भूमि की सूचना प्रकाशित होने पर देहरादून में सुशील देवी को इसकी जानकारी मिली, तो वह भी मुआवाजा भुगतान के लिए भूमि अर्जन अधिकारी कार्यालय में पहुंची।
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Iवहां पता चला कि उनकी भूमि अन्य किसी के कब्जे में है। वर्ष 2017 से यह मामला तसहीलदार, एसडीएम और एडीएम की अदालत में चलता रहा। न्याय पाने के लिए महिला कोर्ट के चक्कर काटती रही। बीते दिन एडीएम केके मिश्रा की अदालत में इस मामले का फैसला सुनाया गया। खात-खौतनी की नकल के आधार पर महिला को उनकी पुश्तैनी भूमि अधिग्रहण करने के एवज में आरटीजीएस के माध्यम से 36 लाख का भुगतान किया गया। नौ साल बाद मुआवजा भुगतान मिलने पर सुशीला देवी के आंखें छलक पड़ी। कहा मुझे ईश्वर पर भरोसा था कि जीत सत्य की ही होगी।I
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IIपुश्तैनी भूमि के एवज में नौ साल बाद मुआवजा मिलने पर खुशी से छलक उठे आंसू
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Iमुआवजा भुगतान पाने के लिए एक बुजुर्ग महिला को नौ साल तक एडिया रंगनी पड़ी। कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने के बाद इन्साफ मिलने के बाद खुशी से बुजुर्ग महिला के आंसू छलक पड़े। पुश्तैनी भूमि के एवज में 36 लाख का मुआवजा भुगतान मिलने पर अधिकारियों का आभार जताया।
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Iचंबा ब्लॉक के साबली गांव निवासी राम प्रसाद बहुगुणा का 2006 में निधन हो गया था। पति के निधन के बाद सुशीला देवी अपनी बेटियों के साथ देहरादून में रहने चले गई थीं। साबली के थान के समीप उनकी पुश्तैनी भूमि थी। 2016 में उक्त भूमि ऑल वेदर परियोजना के लिए अधिग्रहण की गई।
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Iसुशील देवी के गांव में न रहने पर उक्त भूमि पर अन्य लोगों ने अपना अधिकार बताते हुए मुआवजा भुगतान पाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। समाचार पत्रों में अधिग्रहण की गई भूमि की सूचना प्रकाशित होने पर देहरादून में सुशील देवी को इसकी जानकारी मिली, तो वह भी मुआवाजा भुगतान के लिए भूमि अर्जन अधिकारी कार्यालय में पहुंची।
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Iवहां पता चला कि उनकी भूमि अन्य किसी के कब्जे में है। वर्ष 2017 से यह मामला तसहीलदार, एसडीएम और एडीएम की अदालत में चलता रहा। न्याय पाने के लिए महिला कोर्ट के चक्कर काटती रही। बीते दिन एडीएम केके मिश्रा की अदालत में इस मामले का फैसला सुनाया गया। खात-खौतनी की नकल के आधार पर महिला को उनकी पुश्तैनी भूमि अधिग्रहण करने के एवज में आरटीजीएस के माध्यम से 36 लाख का भुगतान किया गया। नौ साल बाद मुआवजा भुगतान मिलने पर सुशीला देवी के आंखें छलक पड़ी। कहा मुझे ईश्वर पर भरोसा था कि जीत सत्य की ही होगी।I