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Pauri News: छात्रों ने किया नाटक ‘मुठभेड़’ का शानदार मंचन
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लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र परिसर में ओपन थिएटर में दी गई प्रस्तुति
श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में एमए रंगमंच के पूर्व छात्रों ने ललित मोहन थपलियाल कृत नाटक ‘मुठभेड़’ का ओपन थिएटर (मुक्ताकाशी मंच) में शानदार मंचन किया। नाटक की प्रस्तुति एवं निर्देशन गौरव सिंह व विकेश बाजपेयी द्वारा किया गया।
नाटक ‘मुठभेड़’ में अंधेरी रात में एक पार्क में जेबकतरे और मदारी के बीच हुई एक मार्मिक वार्तालाप की परिधि के चारों ओर घूमता है। एक ओर जहां जेबकतरा अपने जीवन को भूख से बचाने के लिए लोगों की जेब काटता है, वहीं मदारी अपनी अभावग्रस्त जीवन की विडंबना को खाली पेट के माध्यम से व्यक्त करना नहीं चाहता। वह समाज द्वारा रचे गढ़े जीवन के अर्थपूर्ण पहलुओं को ही नकारता है। मदारी के तर्क जेबकतरे के सामाजिक विश्वास के विपरीत हैं। वह उन बुने गए पहलुओं में यथार्थ के अस्तित्व को ही नहीं खोज पाता। अंत में मदारी जेबकतरे को उसके अस्तित्व की निरर्थकता और निराशा का एहसास कराता है।
नाटक में जेबकतरे की भूमिका विकेश बाजपेयी तथा मदारी की भूमिका गौरव सिंह ने निभाई। प्रकाश संचालन अरविंद टम्टा, संगीत संचालन ऋषभ बिष्ट द्वारा किया गया। आयोजन में भरत टम्टा, अंकित भट्ट, सुरभि सिंह, सोमिल असवाल, शेखर नेगी, प्राची, अनुष्का, आशुतोष, उत्सव, प्रियांशु ने विशेष सहयोग किया। विभाग के शिक्षक डाॅ. संजय पांडे एवं अनुबंधक अध्यापक प्रो. डीआर पुरोहित ने दर्शकों का आभार व्यक्त किया।
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श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में एमए रंगमंच के पूर्व छात्रों ने ललित मोहन थपलियाल कृत नाटक ‘मुठभेड़’ का ओपन थिएटर (मुक्ताकाशी मंच) में शानदार मंचन किया। नाटक की प्रस्तुति एवं निर्देशन गौरव सिंह व विकेश बाजपेयी द्वारा किया गया।
नाटक ‘मुठभेड़’ में अंधेरी रात में एक पार्क में जेबकतरे और मदारी के बीच हुई एक मार्मिक वार्तालाप की परिधि के चारों ओर घूमता है। एक ओर जहां जेबकतरा अपने जीवन को भूख से बचाने के लिए लोगों की जेब काटता है, वहीं मदारी अपनी अभावग्रस्त जीवन की विडंबना को खाली पेट के माध्यम से व्यक्त करना नहीं चाहता। वह समाज द्वारा रचे गढ़े जीवन के अर्थपूर्ण पहलुओं को ही नकारता है। मदारी के तर्क जेबकतरे के सामाजिक विश्वास के विपरीत हैं। वह उन बुने गए पहलुओं में यथार्थ के अस्तित्व को ही नहीं खोज पाता। अंत में मदारी जेबकतरे को उसके अस्तित्व की निरर्थकता और निराशा का एहसास कराता है।
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नाटक में जेबकतरे की भूमिका विकेश बाजपेयी तथा मदारी की भूमिका गौरव सिंह ने निभाई। प्रकाश संचालन अरविंद टम्टा, संगीत संचालन ऋषभ बिष्ट द्वारा किया गया। आयोजन में भरत टम्टा, अंकित भट्ट, सुरभि सिंह, सोमिल असवाल, शेखर नेगी, प्राची, अनुष्का, आशुतोष, उत्सव, प्रियांशु ने विशेष सहयोग किया। विभाग के शिक्षक डाॅ. संजय पांडे एवं अनुबंधक अध्यापक प्रो. डीआर पुरोहित ने दर्शकों का आभार व्यक्त किया।
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