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पारपंरिक खेती से आगे बढ़कर औषधीय पौधों की खेती अपनाएं : नेगी
Thu, 06 Nov 2025 05:20 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Thu, 06 Nov 2025 05:20 PM IST
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पौड़ी। राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य पर उद्यान विभाग के तत्वाधान में औद्यानिक फसलों में टपक सिंचाई विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान किसानों ने टपक सिंचाई की तकनीक सीखी।
बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि अस्मिता नेगी ने काश्तकारों से कहा कि राज्य के पर्वतीय जिलों में जल संसाधनों का समुचित उपयोग और संरक्षण भविष्य की स्थायी कृषि के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टपक सिंचाई जैसी तकनीक जल बचत के साथ-साथ किसानों की मेहनत और लागत दोनों को कम करती हैं। उन्होंने कृषकों से कहा कि वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फल, सब्जी, पुष्प एवं औषधीय पौधों की खेती अपनाएं ताकि उनकी आय में दोगुनी वृद्धि संभव हो सके।
एचएनबी गढ़वाल विवि के सहायक प्रो. डॉ. तेजपाल सिंह बिष्ट ने पर्वतीय राज्यों में बदलते औद्यानिक परिदृश्य पर कहा कि टपक सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीक जल संरक्षण के साथ-साथ उत्पादकता में भी वृद्धि करती हैं। उन्होंने कहा कि आय बढ़ाने के लिए बागवानी केंद्रित एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र भरसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अंशुमान सिंह ने कहा कि ड्रिप इरिगेशन प्रणाली जल उपयोग दक्षता को 70 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। जिला उद्यान अधिकारी राजेश तिवारी ने कहा कि विभाग द्वारा किसानों को टपक सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग, पौधशालाओं की स्थापना और उच्च मूल्य फसलों के प्रचार लिए अनुदान आधारित योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
कार्यशाला में परियोजना निदेशक डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, डीडीओ मनविंदर कौर, इंडियन ऑयल से सुरेश सचिदेव आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि अस्मिता नेगी ने काश्तकारों से कहा कि राज्य के पर्वतीय जिलों में जल संसाधनों का समुचित उपयोग और संरक्षण भविष्य की स्थायी कृषि के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टपक सिंचाई जैसी तकनीक जल बचत के साथ-साथ किसानों की मेहनत और लागत दोनों को कम करती हैं। उन्होंने कृषकों से कहा कि वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फल, सब्जी, पुष्प एवं औषधीय पौधों की खेती अपनाएं ताकि उनकी आय में दोगुनी वृद्धि संभव हो सके।
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एचएनबी गढ़वाल विवि के सहायक प्रो. डॉ. तेजपाल सिंह बिष्ट ने पर्वतीय राज्यों में बदलते औद्यानिक परिदृश्य पर कहा कि टपक सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीक जल संरक्षण के साथ-साथ उत्पादकता में भी वृद्धि करती हैं। उन्होंने कहा कि आय बढ़ाने के लिए बागवानी केंद्रित एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र भरसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अंशुमान सिंह ने कहा कि ड्रिप इरिगेशन प्रणाली जल उपयोग दक्षता को 70 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। जिला उद्यान अधिकारी राजेश तिवारी ने कहा कि विभाग द्वारा किसानों को टपक सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग, पौधशालाओं की स्थापना और उच्च मूल्य फसलों के प्रचार लिए अनुदान आधारित योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
कार्यशाला में परियोजना निदेशक डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, डीडीओ मनविंदर कौर, इंडियन ऑयल से सुरेश सचिदेव आदि मौजूद रहे।