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एनटीटी कोर्स कराने वाले संस्थान फर्जी
Pauri
Updated Fri, 31 Oct 2014 05:32 AM IST
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कोटद्वार। नगर में एनटीटी (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग) कोर्स कराने वाला इंस्टीट्यूट फर्जी है। तहसील प्रशासन की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि यह संस्थान वर्ष 2013 में बंद हो चुका था। तहसील प्रशासन ने अपनी जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दी है।
पिछले दिनों नगर में एनटीटी कोर्स कराने वाले फर्जी इंस्टीट्यूट संचालित करने का मामला सामने आया था। 15 अक्तूबर को जिलाधिकारी के जनता दरबार में यह मामला पहुंचा था। तहसील प्रशासन ने इस मामले की जांच की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संस्थान आर्य कन्या इंटर कालेज के भवन में किराए पर संचालित होता था। वर्ष 2013 में यह सेंटर बंद हो गया। मैनेजर का कार्य देख रहे संस्थान के सचिव आरसी सक्सेना सभी सामान समेटकर ले गए थे। वर्तमान में भवन किराए पर नहीं है। न ही जांच के समय कागजात और रजिस्टर उपलब्ध हो पाए। दो प्रमाणपत्रों 2008-2013 में भिन्नता पाए जाने की जांच में यह संदिग्ध लगता है। प्रथम दृष्या मामला अवैध रूप से जारी किया हुआ प्रतीत होता है। एसडीएम ने पत्र में लिखा है कि फर्जी डिग्री, पैसे के अवैध लेन-देन की जांच पुलिस स्तर से कराया जाना उचित होगा।
दूसरी ओर मामले के संबंध में पछास के कार्यकर्ताओं के साथ प्रभावित छात्राओं ने एसडीएम और कोतवाल से मुलाकात कर मामले की जांच के संबंध में जानकारी ली। साथ ही इसके मुख्यालय कानपुर से जांच कराने की भी मांग की। मिलने वालों में श्वेता अग्रवाल, प्रियंका, संगीता, जयोति, पंकज बवाड़ी, सुरेंद्र, किरन, रंजना, कौशल्या आदि मौजूद थे।
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- अभी मैने जांच रिपोर्ट पढ़ी नहीं, इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। पत्र और जांच आख्या के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- अरुणा भारती, पुलिस क्षेत्राधिकारी कोटद्वार
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पिछले दिनों नगर में एनटीटी कोर्स कराने वाले फर्जी इंस्टीट्यूट संचालित करने का मामला सामने आया था। 15 अक्तूबर को जिलाधिकारी के जनता दरबार में यह मामला पहुंचा था। तहसील प्रशासन ने इस मामले की जांच की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संस्थान आर्य कन्या इंटर कालेज के भवन में किराए पर संचालित होता था। वर्ष 2013 में यह सेंटर बंद हो गया। मैनेजर का कार्य देख रहे संस्थान के सचिव आरसी सक्सेना सभी सामान समेटकर ले गए थे। वर्तमान में भवन किराए पर नहीं है। न ही जांच के समय कागजात और रजिस्टर उपलब्ध हो पाए। दो प्रमाणपत्रों 2008-2013 में भिन्नता पाए जाने की जांच में यह संदिग्ध लगता है। प्रथम दृष्या मामला अवैध रूप से जारी किया हुआ प्रतीत होता है। एसडीएम ने पत्र में लिखा है कि फर्जी डिग्री, पैसे के अवैध लेन-देन की जांच पुलिस स्तर से कराया जाना उचित होगा।
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दूसरी ओर मामले के संबंध में पछास के कार्यकर्ताओं के साथ प्रभावित छात्राओं ने एसडीएम और कोतवाल से मुलाकात कर मामले की जांच के संबंध में जानकारी ली। साथ ही इसके मुख्यालय कानपुर से जांच कराने की भी मांग की। मिलने वालों में श्वेता अग्रवाल, प्रियंका, संगीता, जयोति, पंकज बवाड़ी, सुरेंद्र, किरन, रंजना, कौशल्या आदि मौजूद थे।
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- अभी मैने जांच रिपोर्ट पढ़ी नहीं, इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। पत्र और जांच आख्या के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- अरुणा भारती, पुलिस क्षेत्राधिकारी कोटद्वार