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दीवाली के लिए की गई तैयारियों की खुली पोल
Pauri
Updated Thu, 23 Oct 2014 05:32 AM IST
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कोटद्वार। बस अड्डे पर मंगलवार देर रात हुआ अग्निकांड सरकारी मशीनरी की कार्यशैली की पोल खोलता नजर आ रहा है। अग्निकांड ने पुलिस प्रशासन के उन तमाम दावों की बखिया उधेड़ दी है, जो चार दिन पहले तक पुलिस और प्रशासन के अधिकारी यहां करते नजर आ रहे थे। शुक्र समझिए कि आग की लपटों की चपेट में पास का पेट्रोल पंप नहीं आया।
मंगलवार आधी रात को बस स्टेशन रोड पर आग लगने से जहां आसपास के इलाके में दहशत थी, वहीं लोग पुलिस-प्रशासन की तैयारियों को भी कोस रहे थे। रात करीब 11.45 बजे जहां यह हादसा हुआ वहीं पर बाजार पुलिस चौकी है। चौकी से सटा पेट्रोल पंप है। सड़क पर आधी रात तक पटाखे की दुकानें खुली रहती हैं। कुछ युवा नशे में धुत्त होकर कार के बोनट पर पटाखे छोड़ते हैं, उन्हें ऐसा करने से कोई नहीं रोकता। इसके बाद जो होता है उससे शहरभर की नींद उड़ गई।
दीवाली के लिए पुलिस-प्रशासन की ओर से की गई पहली तैयारियों में फायर ब्रिगेड का नंबर आता है। सीओ और एसडीएम की ओर से फायर ब्रिगेड को झंडाचौक और कोतवाली में खड़ा रखने के निर्देश थे, लेकिन अगिभनकांड के बाद जैसे ही दमकल वाहन की खोज हुई। वह इन दोनों जगहों पर नहीं था। शहर के बीचोंबीच घटनास्थल पर पहुंचने में उसे आधे घंटे से ज्यादा समय लग गया। तब तक सब कुछ खाक हो चुका था। लोगों की तत्परता से आग को पेट्रोल पंप और अन्य दुकानों की ओर बढ़ने से रोका जा सका।
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सवाल यह खड़ा होता है कि पेट्रोल पंप के पास पटाखे की दुकान खोलने की इजाजत किसने दी। क्या पटाखे की दुकान बिना लाइसेंस के चल रही थी। यदि लाइसेंस नहीं था, तो चंद कदम दूरी पर स्थित बाजार चौकी पुलिस ने इसकी पड़ताल क्यों नहीं की। आधी रात को नशे में धुत लड़के कार के बोनट पर पटाखे छोड़ रहे थे तो उन्हें ऐसा करने से क्यों नहीं रोका गया। यदि स्थानीय लोग सक्रिय नहीं होते और फायर ब्रिगेड के भरोसे ही बैठे रहते तो क्या होता। अगिभनकांड के बाद उठे धुएं से गोविंदनगर, उमानंद बड़थ्वाल मार्ग, गोखले मार्ग, स्टेशन मार्ग के लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया।
लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशासन और फायर ब्रिगेड यदि मुस्तैद रहता तो हादसा टल सकता था। दमकल वाहन यदि शहर में खड़ा रहता तो नुकसान को टाला जा सकता था।
एसडीएम को सुबह मिली खबर
कोटद्वार। एसडीएम जीआर बिनवाल का कहना है कि उन्हें अगिभनकांड की खबर बुधवार सुबह लगी। अगिभनकांड की घटना की सूचना उन्हें पब्लिक की ओर से मिली। बुधवार सुबह वह खुद थाने पहुंचे और पुलिस अधिकारियों पर नाराजगी जताई। एसडीएम का कहना है कि इस घटनाक्रम के लिए सीधे-सीधे पुलिस की लापरवाह कार्यशैली जिम्मेदार है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जा रही है। बताया कि उनकी ओर से दीवाली के लिए तहसीलदार और नायब तहसीलदार को गश्त पर लगाया गया है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि बाजार पुलिस चौकी के सामने नशे में धुत युवक कार पर पटाखे छोड़ते रहे और पुलिस चौकी में सोई रही।
किसके निर्देश पर हटी शहर से फायर बिग्रेड
अगर थाने में फायर ब्रिगेड खड़ी होती तो बाजार चौकी के पास अग्निकांड में दुकानें और वाहन खाक होने से बच जाते। दीपावली पर एक फायर ब्रिगेड थाने में और एक झंडाचौक पर खड़ा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन फायर कर्मी दमकल वाहन को शहर से लगभग तीन किमी दूर ग्रास्टनगंज स्थित फायर स्टेशन में ले गए। आग लगने पर गाड़ी को आने में लगभग आधा घंटा लग गया। तब तक एक कार, एक स्कूटर, एक मोटर साइकिल सहित कुछ ठेलियां जलकर खाक हो चुके थे।
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मंगलवार आधी रात को बस स्टेशन रोड पर आग लगने से जहां आसपास के इलाके में दहशत थी, वहीं लोग पुलिस-प्रशासन की तैयारियों को भी कोस रहे थे। रात करीब 11.45 बजे जहां यह हादसा हुआ वहीं पर बाजार पुलिस चौकी है। चौकी से सटा पेट्रोल पंप है। सड़क पर आधी रात तक पटाखे की दुकानें खुली रहती हैं। कुछ युवा नशे में धुत्त होकर कार के बोनट पर पटाखे छोड़ते हैं, उन्हें ऐसा करने से कोई नहीं रोकता। इसके बाद जो होता है उससे शहरभर की नींद उड़ गई।
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दीवाली के लिए पुलिस-प्रशासन की ओर से की गई पहली तैयारियों में फायर ब्रिगेड का नंबर आता है। सीओ और एसडीएम की ओर से फायर ब्रिगेड को झंडाचौक और कोतवाली में खड़ा रखने के निर्देश थे, लेकिन अगिभनकांड के बाद जैसे ही दमकल वाहन की खोज हुई। वह इन दोनों जगहों पर नहीं था। शहर के बीचोंबीच घटनास्थल पर पहुंचने में उसे आधे घंटे से ज्यादा समय लग गया। तब तक सब कुछ खाक हो चुका था। लोगों की तत्परता से आग को पेट्रोल पंप और अन्य दुकानों की ओर बढ़ने से रोका जा सका।
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सवाल यह खड़ा होता है कि पेट्रोल पंप के पास पटाखे की दुकान खोलने की इजाजत किसने दी। क्या पटाखे की दुकान बिना लाइसेंस के चल रही थी। यदि लाइसेंस नहीं था, तो चंद कदम दूरी पर स्थित बाजार चौकी पुलिस ने इसकी पड़ताल क्यों नहीं की। आधी रात को नशे में धुत लड़के कार के बोनट पर पटाखे छोड़ रहे थे तो उन्हें ऐसा करने से क्यों नहीं रोका गया। यदि स्थानीय लोग सक्रिय नहीं होते और फायर ब्रिगेड के भरोसे ही बैठे रहते तो क्या होता। अगिभनकांड के बाद उठे धुएं से गोविंदनगर, उमानंद बड़थ्वाल मार्ग, गोखले मार्ग, स्टेशन मार्ग के लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया।
लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशासन और फायर ब्रिगेड यदि मुस्तैद रहता तो हादसा टल सकता था। दमकल वाहन यदि शहर में खड़ा रहता तो नुकसान को टाला जा सकता था।
एसडीएम को सुबह मिली खबर
कोटद्वार। एसडीएम जीआर बिनवाल का कहना है कि उन्हें अगिभनकांड की खबर बुधवार सुबह लगी। अगिभनकांड की घटना की सूचना उन्हें पब्लिक की ओर से मिली। बुधवार सुबह वह खुद थाने पहुंचे और पुलिस अधिकारियों पर नाराजगी जताई। एसडीएम का कहना है कि इस घटनाक्रम के लिए सीधे-सीधे पुलिस की लापरवाह कार्यशैली जिम्मेदार है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जा रही है। बताया कि उनकी ओर से दीवाली के लिए तहसीलदार और नायब तहसीलदार को गश्त पर लगाया गया है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि बाजार पुलिस चौकी के सामने नशे में धुत युवक कार पर पटाखे छोड़ते रहे और पुलिस चौकी में सोई रही।
किसके निर्देश पर हटी शहर से फायर बिग्रेड
अगर थाने में फायर ब्रिगेड खड़ी होती तो बाजार चौकी के पास अग्निकांड में दुकानें और वाहन खाक होने से बच जाते। दीपावली पर एक फायर ब्रिगेड थाने में और एक झंडाचौक पर खड़ा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन फायर कर्मी दमकल वाहन को शहर से लगभग तीन किमी दूर ग्रास्टनगंज स्थित फायर स्टेशन में ले गए। आग लगने पर गाड़ी को आने में लगभग आधा घंटा लग गया। तब तक एक कार, एक स्कूटर, एक मोटर साइकिल सहित कुछ ठेलियां जलकर खाक हो चुके थे।