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अव्यवस्थाओं के बीच पढ़ रहे बच्चे
Pauri
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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दुगड्डा। विकास खंड जयहरीखाल के राजकीय इंटर कालेज सिद्धपुर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। शासन प्रशासन की लापरवाही कालेज के छात्र-छात्राओं पर भारी पड़ रही है। न कालेज का भवन सही है, न कालेज में शिक्षक पूरे हैं। पीने के पानी के लिए भी छात्रों को लाले पड़े हैं। खेल के मैदान की तो बात ही क्या करनी। ऐसे में छात्र-छात्राएं पढ़ें तो कैसे।
जब सरकार ने ही मुंह फेर रखा है तो फिर पहाड़ के विद्यालयों में कैसे शिक्षा का स्तर बढे़गा। कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र (बफर जोन) की सीमा से लगा राइंका सिद्धपुर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। चाहे पढ़ाई की व्यवस्था हो या कक्षा कक्षों की व्यवस्था, हर तरफ से विद्यालय की स्थिति दयनीय बनी है। विद्यालय परिसर में शौचालय तक नहीं है। इसके अभाव में छात्र-छात्राओं को जंगल की ओर जाना पड़ता है। साथ ही यहां एक महीने से पेयजल की समस्या बनी है। एक किमी दूर से मिड-डे मिल के लिए पानी लाया जाता है। गर्मियों में तो और भी दिक्कत होती है। वर्तमान में विद्यालय में इस समय 13 गांवों के 261 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। स्कूल आने के लिए बरसात में पलेन नदी को पार करना होता है जो छात्र-छात्राओं के लिए बहुत जोखिम भरा रहता है। ढौंटियाल में एक करोड़ 80 लाख की लागत से पुल बनाया गया था लेकिन एप्रोच मार्ग नहीं होने से पुल का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
भवन की स्थिति
- विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं दशकों पुराने जर्जर भवन में पढ़ रहे हैं। यहां पर अतरिक्त कक्षों का निर्माण किया गया था, लेकिन खराब गुणवत्ता के चलते वह भवन और भी जर्जर हो चुके हैं। कक्षों से प्लास्टर गिरता रहता है। विद्यालय में चारदीवारी तक नहीं है। खेल मैदान भी बेकार पड़ा है।
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शिक्षकों की स्थिति
- राजकीय इंटर कालेज सिद्धपुर में एक साल से प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। यहां राजनीतिक विज्ञान के प्रवक्ता तीन वर्ष, गणित के प्रवक्ता तीन वर्ष और अंग्रेजी के प्रवक्ता के पद छह महीने से रिक्त चल रहे हैं।
इनका कहना है
विद्यालय आने के लिए जंगली रास्ते से होकर आना पड़ता है। जंगली जानवरों का खतरा तो बना ही रहता है। वहीं विद्यालय में पानी और शौचालय की व्यवस्था न होने से दिक्कतें होती हैं। - शुभम ध्यानी, छात्र।
- विद्यालय तक यातायात की व्यवस्था होनी चाहिए। पानी और शौचालय नहीं होने से भारी दिक्कत होती है। और भी कई दिक्कतें हैं। -रिया छात्रा।
- जर्जर भवन होने के कारण यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को खतरा बना हुआ है। विद्यालय की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयास किया जाएगा। - बीएस पटवाल, पीटीए अध्यक्ष।
विद्यालय की स्थिति से प्रधानाचार्य को अवगत कराना चाहिए। विद्यालय से समस्याओं के संबंध में प्रस्ताव आने पर उसको आगे भेजा जाएगा। - ललित मोहन चमोला, जिला शिक्षाधिकारी पौड़ी।
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जब सरकार ने ही मुंह फेर रखा है तो फिर पहाड़ के विद्यालयों में कैसे शिक्षा का स्तर बढे़गा। कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र (बफर जोन) की सीमा से लगा राइंका सिद्धपुर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। चाहे पढ़ाई की व्यवस्था हो या कक्षा कक्षों की व्यवस्था, हर तरफ से विद्यालय की स्थिति दयनीय बनी है। विद्यालय परिसर में शौचालय तक नहीं है। इसके अभाव में छात्र-छात्राओं को जंगल की ओर जाना पड़ता है। साथ ही यहां एक महीने से पेयजल की समस्या बनी है। एक किमी दूर से मिड-डे मिल के लिए पानी लाया जाता है। गर्मियों में तो और भी दिक्कत होती है। वर्तमान में विद्यालय में इस समय 13 गांवों के 261 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। स्कूल आने के लिए बरसात में पलेन नदी को पार करना होता है जो छात्र-छात्राओं के लिए बहुत जोखिम भरा रहता है। ढौंटियाल में एक करोड़ 80 लाख की लागत से पुल बनाया गया था लेकिन एप्रोच मार्ग नहीं होने से पुल का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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भवन की स्थिति
- विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं दशकों पुराने जर्जर भवन में पढ़ रहे हैं। यहां पर अतरिक्त कक्षों का निर्माण किया गया था, लेकिन खराब गुणवत्ता के चलते वह भवन और भी जर्जर हो चुके हैं। कक्षों से प्लास्टर गिरता रहता है। विद्यालय में चारदीवारी तक नहीं है। खेल मैदान भी बेकार पड़ा है।
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शिक्षकों की स्थिति
- राजकीय इंटर कालेज सिद्धपुर में एक साल से प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। यहां राजनीतिक विज्ञान के प्रवक्ता तीन वर्ष, गणित के प्रवक्ता तीन वर्ष और अंग्रेजी के प्रवक्ता के पद छह महीने से रिक्त चल रहे हैं।
इनका कहना है
विद्यालय आने के लिए जंगली रास्ते से होकर आना पड़ता है। जंगली जानवरों का खतरा तो बना ही रहता है। वहीं विद्यालय में पानी और शौचालय की व्यवस्था न होने से दिक्कतें होती हैं। - शुभम ध्यानी, छात्र।
- विद्यालय तक यातायात की व्यवस्था होनी चाहिए। पानी और शौचालय नहीं होने से भारी दिक्कत होती है। और भी कई दिक्कतें हैं। -रिया छात्रा।
- जर्जर भवन होने के कारण यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को खतरा बना हुआ है। विद्यालय की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयास किया जाएगा। - बीएस पटवाल, पीटीए अध्यक्ष।
विद्यालय की स्थिति से प्रधानाचार्य को अवगत कराना चाहिए। विद्यालय से समस्याओं के संबंध में प्रस्ताव आने पर उसको आगे भेजा जाएगा। - ललित मोहन चमोला, जिला शिक्षाधिकारी पौड़ी।