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वन चौकी के पास कई वन्य जीवों की मौत बनी रहस्य
Updated Fri, 21 Sep 2018 10:44 PM IST
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पौड़ी। आरक्षित वन रेंज नागदेव की ऊली एवं पश्चिमी खिर्सू बीट के पास पुराने भवन के एक कमरे में कई वन्य जीवों की मौत रहस्य बनी है। गढ़वाल वन प्रभाग के अधिकारी शुक्रवार दूसरे दिन भी इनकी मौत के रहस्य से पर्दा नहीं उठा पाए। डीएफओ लक्ष्मण सिंह रावत ने कहा कि उन्हें प्रकरण की जानकारी नहीं है। वे मामले का पता लगा रहे हैं।
पौड़ी में बृहस्पतिवार को चौबट्टा खिर्सू सेे हरियालीसैंण तक ट्रेकिंग के दौरान दल में शामिल लोग उल्खागढ़ी मंदिर से वापस फैडखाल की ओर लौट रहे थे। इस बीच नागदेव रेंज की ऊली एवं पश्चिमी खिर्सू बीट से मात्र 20 मीटर की दूरी पर वर्षों से बंद पड़े एक भवन में ट्रेकिंग दल में शामिल कुछ लोगों को वन्य जीवों के कई कंकाल मिले। पांच से छह कंकालों में कुछ छोटे तो कुछ बड़े थे। वन विभाग के अधिकारी शुक्रवार दूसरे दिन भी इन वन्य जीवों की मौत के रहस्य से पर्दा नहीं उठा पाए। हालांकि वन दारोगा सुरेंद्र पोखरियाल का कहना है कि ये बंदर और लंगूर के कंकाल हैं। बंद कमरे में दम घुटने से इन वन्य जीवों की मौत हुई है, लेकिन सवाल यह है कि वन चौकी के पास इतनी संख्या में वन्य जीव कमरे में बंद कैसे हुए।
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पौड़ी में बृहस्पतिवार को चौबट्टा खिर्सू सेे हरियालीसैंण तक ट्रेकिंग के दौरान दल में शामिल लोग उल्खागढ़ी मंदिर से वापस फैडखाल की ओर लौट रहे थे। इस बीच नागदेव रेंज की ऊली एवं पश्चिमी खिर्सू बीट से मात्र 20 मीटर की दूरी पर वर्षों से बंद पड़े एक भवन में ट्रेकिंग दल में शामिल कुछ लोगों को वन्य जीवों के कई कंकाल मिले। पांच से छह कंकालों में कुछ छोटे तो कुछ बड़े थे। वन विभाग के अधिकारी शुक्रवार दूसरे दिन भी इन वन्य जीवों की मौत के रहस्य से पर्दा नहीं उठा पाए। हालांकि वन दारोगा सुरेंद्र पोखरियाल का कहना है कि ये बंदर और लंगूर के कंकाल हैं। बंद कमरे में दम घुटने से इन वन्य जीवों की मौत हुई है, लेकिन सवाल यह है कि वन चौकी के पास इतनी संख्या में वन्य जीव कमरे में बंद कैसे हुए।
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