फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pauri News ›   पौड़ी में दिमागी बुखार की चपेट में छह सौ लोग

पौड़ी में दिमागी बुखार की चपेट में छह सौ लोग

Mon, 19 Feb 2018 10:48 PM IST
Updated Mon, 19 Feb 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
पौड़ी में दिमागी बुखार की चपेट में छह सौ लोग

विज्ञापन
पौड़ी। सड़क किनारे फैली गंदगी पर मंडराते लावारिस पशुओं से दूरी बना कर चलें, अन्यथा उनके शरीर से कीट (माइट) आपके शरीर में आ जाएगा। इसके काटने से आपको दिमागी फीवर, लीवर इंफेक्शन व टाइफाइड की बीमारी हो सकती है। एक महीने में करीब 600 लोग इस बीमारी की चपेट में आए हैं और जिला अस्पताल में रोज पांच से छह मरीज भर्ती हो रहे हैं।
पौड़ी शहर में कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कूड़े पर खाने की तलाश करते कुत्ते, बिल्ली व सुअर के शरीर पर पलने वाले परजीवी माइट तेेजी से विकसित हो रहे हैं। जिला अस्पताल के डा. विनोद कुमार कहते हैं कि लावारिस पशुओं के शरीर में चलने वाले माइट इंसान के मांस पर चिपक जाते हैं। कुछ ही सेेकेंड में काटकर वे इंसान को छोड़ देते हैं, इसका पता भी नहीं चलता। माइट अपना लारवा भी मनुष्य के शरीर में छोड़ देता है। इससे दिमागी बुखार के साथ ही लीवर व फेफड़ों में संक्रमण होता है और शरीर कमजोर पड़ने लगता है। जिला चिकित्सालय के रिकार्ड पर नजर डालें तो एक महीने में 600 से अधिक लोग इस बीमारी की चपेट में आए हैं। सोमवार को जिला चिकित्सालय में 12 मरीज सुबह भर्ती मिले। सुभद्रा देवी, विमला देवी, हर्षवर्द्धन, उषा देवी व छह साल का हर्ष व गीता आदि यहां भर्ती हैं।
विज्ञापन

इनसेट
बीमारी के लक्षण
-सिर में दर्द होना
-मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना
-शरीर के सभी बाहरी अंगों में कमजोरी महसूस होना
-मतली या उल्टी लगना
-गर्दन, पीठ और कंधों में अकड़न
-तेज बुखार और ठंड लगना
-दिमागी बुखार होने पर व्यक्तियों की मानसिक स्थिति में भी परिवर्तन
-कोई भी निर्णय लेने में असहजता या परेशानी होना
-चिड़चिड़ापन
-आलस और मानसिक स्थिति सही न होना
इनसेट-
कैसे बचें:-
-घर से बाहर निकलने पर गंदगी के पास मंडराते लावारिस पशुओं से बच कर चलें।
- शरीर पर पूरा लिवास पहनें
- फीवर होते ही तत्काल चिकित्सालय में जांच करवाएं
कोट-

दिमागी बुखार के बढ़ते मरीजों को देखते हुए अब चिकित्सालय में ऐसे रोगियों के लिए अलग से वार्ड की व्यवस्था की जा रही है। अस्पताल के पास रोग से निपटने के लिए पर्याप्त दवाइयां हैं और इसे लगातार मरीजों को बांटा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-डा. अनिल कुमार, प्रमुख चिकित्साधीक्षक पौड़ी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed