भूकंप की मॉक ड्रील: पौड़ी में 907 लोगों की मौत!

Dehradun Bureau Updated Fri, 13 Oct 2017 10:31 PM IST
पौड़ी/रुद्रप्रयाग/ टिहरी/ उत्तरकाशी/गोपेश्वर। गढ़वाल के सभी जिलों में शुक्रवार को 7.2 भूंकप आने की स्थिति में इससे निपटने के लिए पूर्वाभ्यास किया गया। इस मॉक ड्रिल में कई जगहों पर तालमेल सही रहा तो कहीं तालमेल के कमियां नजर आईं।
पौड़ी जिले में विभिन्न विभागों में तालमेल की कमी पकड़ में आई। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र से सुबह 8.06 बजे जिला प्रशासन को भूकंप आने की जानकारी मिलती है। जिलाधिकारी ने जिले में इनसिडेंट रिस्पांस सिस्टम की टीम, जिला प्रशासन, पुलिस बल, अर्द्ध सैनिक बलों को जिला मुख्यालय के पांच विभिन्न स्थानों पर भूकंप से हुई क्षति की सूचना रेडियो सेट से दी। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जगतराम जोशी ने आईआरएस टीम, सेना और अर्द्ध सैनिक बलों को सुबह 8.33 बजे प्रभावित क्षेत्र में भेजकर राहत व बचाव कार्य शुरू कराए। घायलों को जिला चिकित्सालय भेजा गया। प्रभावितों को पानी और खाद्यान देकर मलबे से दबे लोगों को निकाला गया। साथ ही मार्गों को सुचारू किया गया। रांसी हैलीपेड पर चार हेलीकॉप्टर भी उतारे गए। भूकंप के मॉकड्रिल में जिला मुख्यालय और पौड़ी शहर में विभिन्न स्थानों पर 907 लोगों की मौत, 1862 गंभीर और 91,204 लोगों के मामूली रूप से घायल होने और मकानों के मलबे में 2000 लोगों के बेघर व चार वाहन मलबे में दबने की सूचना आई।
उत्तरकाशी जिले में 7.2 तीव्रता वाले बड़े भूकंप को लेकर मॉक ड्रिल किया गया। इस भूकंप से जनपद में 374 की मौत, 475 गंभीर घायल और 1359 लोगों के घायल होने पर प्रशासन द्वारा बचाव कार्य किया गया। सुबह 8.05 बजे भूकंप आने पर डीएम डा. आशीष चौहान ने सभी विभागों और अधिकारियों कोे सचेत किया। मॉकड्रिल में आर्मी, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, पुलिस, एनआईएम, बीआरओ, एनसीसी, एनएसएस के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रतिभाग किया।
रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय में भी मॉक ड्रिल के तहत भूकंप से व्यापक नुकसान हुआ। भूकंप का केंद्र चमोली जनपद का हेलंग में जमीन से 15 किमी नीचे पाया गया। जिलाधिकारी के दिशा-निर्देशन में आईआरएस द्वारा तत्काल रेस्क्यू कर प्रभावितों को राहत व उपचार दिया गया। जिला सूचना कार्यालय, आवास कॉलोनी, शंकराचार्य अस्पताल, सीईओ कार्यालय, पीएनबी, जीजीआईसी आदि क्षेत्र अति प्रभावित दर्शाए गए। मॉक ड्रिल में आईटीबीपी के 35, एसडीआरएफ के 30, पुलिस के 50, होमगार्ड के 20 होमगार्ड, अग्निशमन के 15 और पीआरडी के 30 जवानों ने भाग लिया। सेना के जेकेएलआई यूनिट के 7 पर्यवेक्षक भी मौजूद थे। इस मौके पर सीडीओ डीआर जोशी, प्रभारी अधिकारी देवानंद, सीएमओ डा. सरोज नैथानी, वरिष्ठ कोषाधिकारी शशि सिंह, पीडी एनएस रावत समेत अन्य लोग मौजूद थे। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि आपदा प्रबंधन को परखने के लिए यह मॉक ड्रिल की गई थी, जो संतोषजनक रही।
नई टिहरी में भूकंप आने की सूचना मिलते ही जिले का इंसीडेंट रिस्पोंस सिस्टम गतिमान हो गया। भूकंप से नुकसान की सूचना मिलते ही डीएम सोनिका ने सभी विभागों को अलर्ट कर दिया। 11 वीं फील्ड रेजीमेंट नरेंद्रनगर, आईटीबीपी मातली की टीम, एनडीआरएफ ,पुलिस, एनसीसी और होमगार्ड के जवानों सहित पूरा सिस्टम हरकत में आ गया। बौराड़ी मैदान में आठ एंबुलेंस, चार बसें, छह ट्रक, 10 छोटे और चार बडे़ टेंटों की व्यवस्था की गई। दो फायर सर्विस, चार जेसीबी, दो क्रेन, एक दर्जन वायरलेस सेट की व्यवस्था की गई थी। बौराडी में हैलीपैड बनाया गया। दूरस्थ क्षेत्रों में खाद्यान्न भेजने की व्यवस्था की गई थी। मॉक ड्रिल की समीक्षा के लिए पांच ऑब्जर्वर लगाए गए। टिहरी जिला भूंकप की दृष्टि से जोन-4 में आता है। जिले के 33 अधिकारियों को आपदा नियंत्रण के लिए अलग-अलग दायित्व सौंपे गए हैं। इस मौके पर एसएसपी विमला गुंज्याल, सीडीओ आशीष भटगाईं, सीएमओ डा. योगेंद्र थपलियाल, डीडीओ भरत चंद्र भट्ट, एसडीएम चतर सिंह चौहान आदि मौजूद थे।
चमोली जिला आपदाग्रस्त क्षेत्रों में त्वरित रेस्क्यू को लेकर टीमों में सामंजस्य की कमी दिखी। सुबह आठ बजकर चार मिनट पर जिले में 7.2 तीव्रता के भूकंप की सूचना आपदा कंट्रोल रूम को दी गई। इसके बाद जिले के सभी नोडल अधिकारी आपदा कंट्रोल रूम में एकत्रित हुए। नगर के कुंड कॉलोनी, विकास भवन, नेत्र चिकित्सालय, सीतापुर चिकित्सालय, जीआईसी गोपेश्वर व नेग्वाड़ कॉलोनी में भूकंप से भारी जानमाल के नुकसान की सूचना मिली। सामंजस्य की कमी सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में देखने को मिली, जहां रेस्क्यू के दौरान घायलों को ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध न होने पर रेस्क्यू दल ने स्ट्रेक्चर में ही घायलों को अस्पताल तक पहुंचाया। जिला अस्पताल में भी चिकित्सक ढूंढे नहीं मिले। यह तो सिर्फ मॉकड्रिल थी, लेकिन वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रशासन की तैयारियों को सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
नगर में यह भी अफवाह उड़ी कि जीआईसी गोपेश्वर में विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने से छात्र घायल हुए हैं, जिस पर अभिभावक विद्यालय की ओर दौड़ पड़े। बाद में पता चला कि आपदा की मॉकड्रिल के चलते विद्यालय को आपदा प्रभावित क्षेत्र बनाया गया है। अभिभावक मान सिंह का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से पूर्व सूचना न होने से इस प्रकार की स्थिति पैदा हुई है। कम से कम स्कूल प्रशासन को मॉकड्रिल की सूचना होनी चाहिए थी।

आपदा में बचाव पर कार्यशाला
देवप्रयाग। प्रभारी थानाध्यक्ष हाकम सिंह, चौकी प्रभारी विक्रम लाल कोहली और एस आई मदन सिंह रावत ने लोगों को आपदा से बचाव की जानकारी दी। थानाप्रभारी ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आपदा से बचाव के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 13 अक्तूबर को आपदा न्यूनीकरण दिवस घोषित किया गया है। इस मौके पर व्यापार सभा अध्यक्ष विनोद गोयल, वेदप्रकाश, अजय कुमार, सूर्यकांत भंडारी, कीर्तन सिंह आदि मौजूद थे। ब्यूरो

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