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सेना दिवस पर विशेष: कुमाऊं रेजीमेंट के नाम दो परमवीर चक्र और चार हजार से अधिक बलिदान, केआरसी को मिले वीरता पदक

Mon, 15 Jan 2024 03:48 PM IST
हीरा मेहरा चेतन जोशी, संवाद
चेतन जोशी, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 15 Jan 2024 03:48 PM IST
सार

कुमाऊं रेजीमेंट का गौरव और पराक्रम अपने आदर्श वाक्य पराक्रमो विजयते के अनुरूप है। देश की सुरक्षा के लिए इस रेजीमेंट के 4000 सैनिकों ने अपना बलिदान दिया। 

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Two Paramveer Chakras and more than four thousand sacrifices in the name of Kumaon Regiment
भारतीय सेना दिवस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुमाऊं रेजीमेंट (केआरसी) का गौरव और पराक्रम अपने आदर्श वाक्य पराक्रमो विजयते के अनुरूप है। देश की सुरक्षा के लिए इस रेजीमेंट के 4000 सैनिकों ने अपना बलिदान दिया। रेजीमेंट के खाते में देश का पहला सर्वाेच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र भी है। 

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भारतीय सेना की सबसे पुरानी बटालियन कुमाऊं रेजीमेंट की स्थापना वर्ष 1788 में हैदराबाद में हुई थी। तब इसे हैदराबाद रेजीमेंट का नाम दिया गया। स्थापना के समय इसकी सिर्फ चार बटालियन थीं। 27 अक्तूबर 1945 को इसे कुमाऊं रेजीमेंट नाम मिला और वर्ष 2022 तक इसकी 22 बटालियन अस्तित्व में आई हैं। मई 1948 में इसे केआरसी मुख्यालय रानीखेत शिफ्ट किया गया। 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान और 1962 के भारत-चीन युद्ध में इस रेजीमेंट के विशेष भूमिका रही है। वर्ष 1970 में भारतीय सेना की प्रमुख रेजीमेंट नाग को भी कुमाऊं रेजीमेंट से संबद्ध कर दिया गया।

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मेजर सोमनाथ शर्मा को 1947 में मिला परमवीर चक्र
रानीखेत में चार-कुमाऊं के मेजर सोमनाथ शर्मा को 1947 में मरणोपरांत देश का पहला सर्वोच्च पदक परमवीर चक्र दिया गया। रानीखेत में कुमाऊं रेजीमेंट के केंद्र स्थित सैन्य मैदान को शहीद सोमनाथ शर्मा के नाम से पहचान मिली। यहां म्यूजियम में उनके युद्ध के समय की कई सामग्रियां तथा उनकी यादों से जुड़ी कई चीजें सहेजी गई हैं। वहीं, 1962 के चीन युद्ध में रेजांगला की जंग में अभूतपूर्व भूमिका निभाने वाले मेजर शैतान सिंह को दूसरा परमवीर चक्र मिला। 

केआरसी को मिले वीरता पदक
दो परमवीर चक्र, 13 महावीर चक्र, 82 वीर चक्र, 14 परम विशिष्ट सेना मेडल, 32 अति विशिष्ट, 69 विशिष्ट, चार उत्तम, छह युद्ध सेवा पदक, 303 सेना मेडल, चार अशोक चक्र, 10 कीर्ति चक्र, 43 शौर्य चक्र।

केआरसी ने भारतीय सेना को दिये तीन थल सेनाध्यक्ष
जनरल श्रीनगेश, जनरल केएस थिमैया (डीएसओ पद्म भूषण) और जनरल टीएन रैना (महावीर चक्र)। 
 

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केआरसी के शहीद

  • वर्ष 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में 13-कुमाऊं के 120 जवानों ने चीन के 1300 सैनिकों को मार गिराया। इस युद्ध में कुमाऊं रेजीमेंट के 114 सैनिक शहीद हुए।
  • 1971 में भारत-पाक युद्ध में कुमाऊं रेजीमेंट के 20 जवान शहीद हुए।
  • कारगिल युद्ध में कुमाऊं रेजीमेंट के 31 जवानों ने देश के लिए अपनी शहादत दी। 


आजादी से पहले के युद्ध 
1803 का मराठा युद्ध, 1817 का पिंडारी युद्ध, 1841 भीलों के विरुद्ध युद्ध , 1853 में अरब युद्ध, 1854 में रोहिल्ला सहित अन्य कई युद्धों में कुमाऊं रेजीमेंट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

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