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Nainital News: लैब में तकनीक का उजाला, उपचार पर इंतजार का ताला

Mon, 26 Oct 2026 01:25 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Mon, 26 Oct 2026 01:25 AM IST
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The light of technology in the lab, yet a long wait for treatment.
हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में दिल के मरीजों को राहत देने के लिए तैयार की गई कैथ लैब की धड़कनें (मशीनें) अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं। करीब 12 करोड़ रुपये खर्च कर अत्याधुनिक मशीनों से लैस लैब तैयार कर दी गई लेकिन इसे संचालित करने के लिए कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो पाई है। नौ महीने से मरीज इस सुविधा के शुरू होने की आस लगाए हैं। ऐसे में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए उन्हें दूसरे शहरों या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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करोड़ों के उपकरण मगर इलाज की राह ठहरी
एसटीएच में करीब ढाई साल की देरी के बाद इसी साल फरवरी में कैथ लैब तैयार हुई थी। लैब के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने करीब नौ करोड़ रुपये के उपकरण उपलब्ध कराए जबकि भवन निर्माण पर मंडी परिषद ने लगभग 2.40 करोड़ रुपये खर्च किए। इस तरह पूरी परियोजना पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। अत्याधुनिक मशीनें स्थापित होने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती नहीं होने से लैब का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।
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पीपीपी मोड पर संचालन का विकल्प
कैथ लैब को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बता चुके सांसद अजय भट्ट ने कहा कि सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। जो डॉक्टर उपलब्ध हो रहे हैं, उनका वेतन काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी और यह विचार किया जाएगा कि कैथ लैब का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर किया जा सकता है या नहीं। इससे जरूरतमंद मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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कैथ लैब शुरू करने के लिए अस्पताल प्रबंधन कई बार कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के प्रयास कर चुका है। हर दो-तीन महीने में इंटरव्यू भी कराए जा चुके हैं। अब अन्य उपायों पर विचार किया जा रहा है। - प्रो. डॉ. अजय आर्या, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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