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मशरूम उत्पादन में उत्तराखंड में नैनीताल बना सरताज....
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हल्द्वानी। कोविड के बाद कुमाऊं मंडल में 431 मीट्रिक टन वृद्धि के साथ नैनीताल जिले में मशरूम उत्पादन 4310 मीट्रिक टन पहुंच गया है। उससे पहले 3879 मीट्रिक टन उत्पादन रहा था। इसमें नैनीताल जिला मंडल में 25 प्रतिशत ग्रोथ के साथ पहले नंबर पर है। कम जगह, कम समय और कम लागत में तैयार होने वाली मशरूम की फसल लोगों की आय का अच्छा जरिया बन चुकी है। ग्रामीण से लेकर शहरी तक इसमें पाए जाने वाले पौष्टिक तत्व, औषधीय गुण होने की वजह से काफी पसंद कर रहे हैं।
मशरूम की खेती को देखते हुए अब सोलन की तर्ज पर भीमताल को वैली ऑफ मशरूम के रूप में विकसित करने की भी योजना है। साथ ही यहां स्पॉन नैब बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। मशरूम की सब्जी के अलावा सूप, सलाद, पुलाव, खीर, जैम, अचार, बिस्किट, पापड़, बड़ी और चटनी के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। वर्तमान में पहाड़ का मशरूम दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर आदि बड़े शहरों में सप्लाई किया रहा है। इस बार भीमताल में 2415 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है जबकि वर्ष 2020-21 में यह उत्पादन 1812 मीट्रिक टन रहा था। मंडल में 2412 किसान 4310 मीट्रिक टन मशरूम उत्पादन कर रहे हैं।
मशरूम की प्रजातियां
सफेद, बटन, ढिंगरी, पुआल, दूधिया और शिटाके मशरूम खासतौर पर शामिल हैं। इनमें पर्वतीय जिलों में बटन और ढींगरी मशरूम का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है।
अनुकूल तापमान बेहद जरूरी
हवादार कमरे, शेड, हट या झोपड़ी में आसानी से मशरूम उगाया जा सकता है। ढींगरी मशरूम की खेती वर्षभर की जा सकती है। इसके लिए अनुकूल तापमान 20-30 डिग्री सेंटीग्रेट और आर्द्रता 70 से 90 प्रतिशत चाहिए। संवाद
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कुमाऊं मंडल में मशरूम उत्पादन
जनपद मीट्रिक टन किसान
नैनीताल 2415 632
अल्मोड़ा 22.70 427
ऊधमसिंह नगर 1823 1150
चंपावत 19.00 55
पिथौरागढ़ 16.50 77
बागेश्वर 13.80 71
मशरूम उत्पादन में पूरे कुमाऊं मंडल में नैनीताल जनपद आगे है। जिले में वर्तमान में 11 व्यावसायिक इकाइयां और दो राजकीय इकाइयां मशरूम उत्पादन कर रही हैं। पर्यटकों की आमद को देखते हुए भीमताल के कुछ गांवों को मशरूम विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। भरपूर पौष्टिकता को देखते हुए मशरूम को आंगनबाड़ी केंद्रों में कुपोषित बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन में शामिल किया जाना चाहिए। - डॉ. नरेंद्र कुमार, मुख्य उद्यान अधिकारी, नैनीताल।
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मशरूम की खेती को देखते हुए अब सोलन की तर्ज पर भीमताल को वैली ऑफ मशरूम के रूप में विकसित करने की भी योजना है। साथ ही यहां स्पॉन नैब बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। मशरूम की सब्जी के अलावा सूप, सलाद, पुलाव, खीर, जैम, अचार, बिस्किट, पापड़, बड़ी और चटनी के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। वर्तमान में पहाड़ का मशरूम दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर आदि बड़े शहरों में सप्लाई किया रहा है। इस बार भीमताल में 2415 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है जबकि वर्ष 2020-21 में यह उत्पादन 1812 मीट्रिक टन रहा था। मंडल में 2412 किसान 4310 मीट्रिक टन मशरूम उत्पादन कर रहे हैं।
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मशरूम की प्रजातियां
सफेद, बटन, ढिंगरी, पुआल, दूधिया और शिटाके मशरूम खासतौर पर शामिल हैं। इनमें पर्वतीय जिलों में बटन और ढींगरी मशरूम का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है।
अनुकूल तापमान बेहद जरूरी
हवादार कमरे, शेड, हट या झोपड़ी में आसानी से मशरूम उगाया जा सकता है। ढींगरी मशरूम की खेती वर्षभर की जा सकती है। इसके लिए अनुकूल तापमान 20-30 डिग्री सेंटीग्रेट और आर्द्रता 70 से 90 प्रतिशत चाहिए। संवाद
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कुमाऊं मंडल में मशरूम उत्पादन
जनपद मीट्रिक टन किसान
नैनीताल 2415 632
अल्मोड़ा 22.70 427
ऊधमसिंह नगर 1823 1150
चंपावत 19.00 55
पिथौरागढ़ 16.50 77
बागेश्वर 13.80 71
मशरूम उत्पादन में पूरे कुमाऊं मंडल में नैनीताल जनपद आगे है। जिले में वर्तमान में 11 व्यावसायिक इकाइयां और दो राजकीय इकाइयां मशरूम उत्पादन कर रही हैं। पर्यटकों की आमद को देखते हुए भीमताल के कुछ गांवों को मशरूम विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। भरपूर पौष्टिकता को देखते हुए मशरूम को आंगनबाड़ी केंद्रों में कुपोषित बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन में शामिल किया जाना चाहिए। - डॉ. नरेंद्र कुमार, मुख्य उद्यान अधिकारी, नैनीताल।